किल्लत होते ही भेजा दोगुना तेल... यूएई-सऊदी के टैंकर होर्मुज में रुके तो भारत का सहारा बना रूस

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से मध्य पूर्व से तेल सप्लाई लगभग ठप हो गई है, जिससे भारत के कच्चे तेल आयात में 13% की गिरावट आई है. इस सप्लाई संकट के बीच रूस ने तेल भेजकर भारत के ऊर्जा बाजार को संभाले रखा.

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होर्मुज के बंद होने के बाद रूसी तेल की सप्लाई ने भारत को बहुत संभाला है होर्मुज के बंद होने के बाद रूसी तेल की सप्लाई ने भारत को बहुत संभाला है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:59 PM IST

ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट के जरिए मध्य पूर्व से तेल सप्लाई लगभग रुक सी गई है. सप्लाई रुकने की वजह से मार्च में भारत के कच्चे तेल का आयात फरवरी के युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में 13% गिर गया है. इसमें भी कुल आयात का आधा हिस्सा रूस से आया है. यानी मिडिल ईस्ट से सप्लाई संकट के बीच रूस से तेल आयात ने भारत को संभाले रखा है.

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इंडस्ट्री के सूत्रों से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता भारत ने मार्च में 45 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया. 

मार्च में रूस से भारत का तेल आयात फरवरी की तुलना में लगभग दोगुना होकर 22.5 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया. वहीं, मध्य पूर्व से सप्लाई 61% गिरकर 11.8 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई.

होर्मुज स्ट्रेट, जहां से आमतौर पर दुनिया की करीब पांचवें हिस्से की तेल सप्लाई गुजरती है, 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत से ही लगभग ठप हो गया है. पिछले दो महीनों में केवल कुछ ही तेल टैंकर भारत पहुंचे हैं. शनिवार को स्ट्रेट पार करने की कोशिश कर रहे भारत के झंडे वाले दो जहाजों पर हमला भी किया गया.

इराक और यूएई से तेल खरीद में भारी गिरावट

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डेटा के अनुसार, मार्च में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में मध्य पूर्वी तेल की हिस्सेदारी घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर 26.3% पर आ गई. इराक और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से सप्लाई कई सालों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई.

मध्य पूर्वी तेल की कमी पूरी करने के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने समुद्र में उपलब्ध रूसी तेल की खरीद तेज कर दी. यह खरीद रूसी तेल पर अमेरिका की तरफ से जारी छूट के बाद वापस शुरू की गई है. अमेरिका ने ईरान युद्ध के कारण तेल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए रूसी तेल से प्रतिबंध हटा दिए हैं और रूसी तेल खरीदने की छूट पाने वाला भारत पहला देश बना था.

ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को रूसी तेल की खरीद पर छूट एक महीने के लिए बढ़ा दी है जिसके बाद दुनिया के देश समुद्र में उपलब्ध प्रतिबंधित रूसी तेल खरीद सकते हैं. यह छूट भारत के लिए बड़ी राहत लेकर आई है और उम्मीद है कि रूसी तेल आयात बढ़ता ही जाएगा.

रूस रहा टॉप सप्लायर, अफ्रीकी देश से तेल खरीद भी बढ़ी

मार्च में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना रहा और सऊदी अरब ने इराक को पीछे छोड़कर दूसरा स्थान हासिल किया. डेटा के मुताबिक, मध्य पूर्वी सप्लाई घटने के कारण भारतीय रिफाइनरियों ने अफ्रीका से आयात बढ़ाया, जिससे अंगोला तीसरे स्थान पर पहुंच गया. इसके बाद UAE और इराक का स्थान रहा.

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मध्य पूर्व से कम आयात के कारण भारत के कुल आयात में ओपेक (OPEC) तेल की हिस्सेदारी घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर 29% पर आ गई.

मार्च 2026 तक समाप्त वित्त वर्ष में भारत का रूसी तेल आयात पिछले साल की तुलना में 6.2% घट गया, क्योंकि अमेरिकी दबाव के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने रूस के तेल खरीद कम कर दी थी. लेकिन अब अमेरिकी छूट के बाद रूस से तेल आयात फिर से बढ़ गया है और रूस भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है.

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