मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध ने कच्चे तेल की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है. बीते शनिवार से अमेरिका और इजरायल ईरान से लड़ रहे हैं जिसके जवाब में ईरान ने मध्य-पूर्वी देशों के तेल निर्यात के अहम रास्ते होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी. इस रोक के बाद भारत की मुश्किलें बढ़ गई हैं क्योंकि रूसी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत ने हाल ही में सऊदी अरब जैसे मध्य-पूर्व देशों से तेल खरीद बढ़ाई है. लेकिन अब भारत के लिए ये विकल्प भी लगभग बंद हो रहा है. ऐसे में भारत एक बार फिर रूस से तेल आयात बढ़ाने पर विचार कर रहा है.
सोमवार को ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट किया कि तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका के बीच दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक भारत रूस के कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने पर विचार कर रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की सरकारी रिफाइनरियों ने वीकेंड में नई दिल्ली में सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक की. इस दौरान एक इमर्जेंसी प्लान पर बातचीत की गई क्योंकि होर्मुज की खाड़ी के रास्ते तेल और गैस की सप्लाई लगभग ठप हो गई है.
समंदर में भटक रहे रूसी जहाजों पर लदे तेल अब भारत खरीदेगा?
समाचार एजेंसी ने मामले से परिचित लोगों के हवाले से कहा कि भारत अब अपने समुद्री क्षेत्र के पास रुके कार्गो पर लदे रूसी तेल को खरीदने पर विचार कर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, एशियाई जलक्षेत्र में टैंकरों पर करीब 95 लाख बैरल रूसी तेल मौजूद बताया जा रहा है.
फरवरी 2026 से पहले रूस भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता था लेकिन अमेरिकी दबाव के बीच भारत को रूस से तेल खरीद कम करनी पड़ी और सऊदी अरब भारत का शीर्ष तेल सप्लायर बन गया.
पिछले महीने भारत और अमेरिका ने कहा था कि दोनों पक्ष एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे रहे हैं, जिसके तहत भारत पर अमेरिकी टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया गया. अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया था.
लेकिन अंतिम व्यापार समझौते पर सहमति के बाद ट्रंप ने रूसी तेल को लेकर लगाए 25% टैरिफ को खत्म कर दिया.
ट्रंप ने दावा किया कि टैरिफ इसलिए घटाए गए क्योंकि भारत 'रूसी तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया.' हालांकि, भारत ने कभी ये नहीं कहा कि वो रूसी तेल खरीदना बंद कर रहा है. रूस ने भी कहा है कि उसे नहीं लगता कि भारत ने इस मुद्दे पर अपना रुख बदला है.
भारत ने भले ही रूसी तेल की खरीद रोकने पर कुछ नहीं कहा लेकिन रूस से तेल खरीद काफी कम हो गई और भारतीय रिफाइनरियों ने मध्य-पूर्व के देशों से तेल खरीद बढ़ा दी. फरवरी में सऊदी अरब भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया.
अमेरिकी दबाव के बीच भारत ने फरवरी में प्रतिदिन केवल 10 लाख बैरल रूसी तेल खरीदना जो सितंबर 2022 के बाद सबसे कम स्तर है. भारत तब हर दिन रूस से 20 लाख बैरल तक तेल खरीद रहा था.
अब सऊदी भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता है लेकिन उसके तेल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. इजरायल-अमेरिका के हमलों के जवाब में ईरान सऊदी समेत खाड़ी देशों पर हमले कर रहा है.
सोमवार को ही ईरान ने दुनिया की सबसे बड़ी तेल-गैस कंपनी अरामको की तेल रिफाइनरी रास तनुरा पर ड्रोन हमले हुए. हालांकि, इस हमले को सऊदी ने नाकाम कर दिया लेकिन एहतियात के तौर पर रिफाइनरी को बंद कर दिया गया है. इससे सऊदी के तेल क्षेत्र को भारी नुकसान हो रहा है. होर्मुज की खाड़ी बंद होने से उसके तेल आयात को भी भारी नुकसान हो रहा है.
रूसी तेल को लेकर तेल मंत्रालय के अधिकारियों ने विदेश मंत्रालय से की बात
अब रूसी तेल की खरीद में गिरावट आई है जिस वजह से रूस से भारत के लिए चला तेल समंदर में ही पड़ा रहा. अब भी भारत के आसपास समंदर में रूसी तेल के कई कार्गो भटक रहे हैं जिनका कोई खरीदार नहीं है. हालांकि, मध्य-पूर्व में युद्ध से रूस को फायदा होता दिख रहा है. भारत की रिफाइनरियां भी रूसी तेल की खरीद के रास्ते तलाश रही हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के तेल मंत्रालय के अधिकारी विदेश मंत्रालय से आग्रह कर रहे हैं कि अमेरिका से कुछ छूट दिलाई जाए. तेल कंपनियां नहीं चाहतीं कि वो बिना अमेरिका से छूट लिए तेल खरीदें वरना वो अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में आ सकती हैं.
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