सितंबर 2024 में लेबनान में हिज्बुल्लाह के हजारों पेजर फटने के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. इस हमले के तुरंत बाद हंगरी ने ईरान को मदद की पेशकश की थी. हंगरी सरकार के एक लीक ट्रांसक्रिप्ट से इस का राज का पर्दाफाश हुआ है.
'द वॉशिंगटन पोस्ट' की मानें तो पेजर फटने की घटना के बाद हंगरी की ओर्बन सरकार ईरान की मदद के लिए आगे आई थी. विदेश मंत्री पीटर सिज्जार्टो ने हिज्बुल्लाह के समर्थक ईरान को फोन करके जांच में सहयोग का वादा किया था.
सिज्जार्टो ने ईरान को भरोसा दिया था कि वो हर दस्तावेज उन्हें देंगे. उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर कहा, 'हमारी खुफिया सर्विस ने पहले ही आपकी सेवाओं से संपर्क किया है. हम जांच के दौरान जुटाई गई सभी जानकारी आपके साथ शेयर करेंगे.'
बता दें कि जब हिज्बुल्लाह के पेजर फटे थे तो उस समय हंगरी शक के घेरे में था. ताइवानी कंपनी (जिसका ब्रांड पेजर पर था) ने कहा था कि ये पेजर हंगरी की एक कंपनी ने लाइसेंस के तहत बनाए थे. ऐसे में सिज्जार्टो ने सफाई देते हुए ईरान को भरोसा दिलाया था कि हंगरी इस हमले में शामिल नहीं था और ये पेजर हंगरी में नहीं बने थे.
हंगरी की दोहरी विदेश नीति
अहम बात ये है कि हंगरी खुद को इजरायल का सबसे बड़ा समर्थक बताता है. ओर्बन सरकार अक्सर संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के पक्ष में ही वोट करती है अप्रैल 2025 में भी इजरायली पीएम नेतन्याहू की बुडापेस्ट यात्रा के दौरान हंगरी ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) से हटने का ऐलान किया था. ऐसे में ईरान के साथ इस तरह गुप्त रूप से जानकारी शेयर करने का खुलासा बड़े सवाल खड़े कर रहा है.
चुनाव के बीच बड़ा खुलासा
बता दें कि हंगरी में 12 अप्रैल 2026 को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. चुनाव में ओर्बन की स्थिति फिलहाल कमजोर दिख रही है और वो अपने प्रतिद्वंद्वी पीटर मग्यार से पिछड़ रहे हैं. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस हाल ही में ओर्बन को समर्थन देने बुडापेस्ट पहुंचे थे.
यह भी पढ़ें: क्या पेजर ब्लास्ट में गई थी ईरान के पूर्व राष्ट्रपति की जान, क्यों लग रही अटकलें, रईसी का जाना क्यों बड़ा झटका?
हंगरी सरकार पर पहले भी रूस के साथ मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं. ऐसी खबरें सामने आईं कि विदेश मंत्री सिज्जार्टो अक्सर यूरोपीय संघ (EU) की बैठकों के दौरान अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव को लाइव रिपोर्ट देते थे. दरअसल रूस और ईरान के बीच पुराना सैन्य और राजनीतिक गठबंधन है, ऐसे में हंगरी का ईरान को खुफिया जानकारी देना पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है.
aajtak.in