अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग अब और ज्यादा फैलती नजर आ रही है. इजरायली सेना ने दावा किया है कि यमन से इजरायल की तरफ एक मिसाइल दागी गई है. यह पहली बार है जब इस जंग के दौरान यमन से सीधे हमले की बात सामने आई है. इस दावे ने पूरे मिडिल ईस्ट में बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंकाओं को और तेज कर दिया है.
इस हमले से कुछ घंटे पहले ही हूती ने संकेत दिए थे कि अगर ईरान के खिलाफ कार्रवाई तेज होती है तो वे भी हस्तक्षेप कर सकते हैं. हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन इजरायल का दावा इस बात की ओर इशारा करता है कि हूती अब इस संघर्ष में सक्रिय रूप से शामिल हो सकता है.
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इजरायली सेना के मुताबिक, मिसाइल लॉन्च के बाद दक्षिणी इजरायल के शहरों, खासकर बीयर शेबा के आसपास सायरन बजने लगे. यह इलाका इजरायल के अहम रणनीतिक ठिकानों के करीब माना जाता है. इससे पहले भी ईरान और लेबनान के हिजबुल्लाह की तरफ से लगातार हमले किए जा रहे थे, लेकिन यमन से हमला इस जंग को एक नए मोर्चे पर ले जा सकता है.
दरअसल, हूती विद्रोही लंबे समय से ईरान के करीबी माने जाते हैं और 2014 से उन्होंने यमन की राजधानी सना पर नियंत्रण बना रखा है. 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व में गठबंधन ने इनके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था. हालांकि, हाल के वर्षों में सऊदी अरब और हूतियों के बीच एक अस्थायी युद्धविराम बना हुआ था, जिसके कारण अब तक वे इस बड़े संघर्ष से दूर थे.
लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं. हूती पहले भी गाजा युद्ध के दौरान लाल सागर में शिपिंग मार्गों को निशाना बना चुके हैं. उनकी क्षमता लंबी दूरी तक हमला करने की है, जिससे न सिर्फ इजरायल बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है.
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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हूती पूरी तरह इस जंग में शामिल हो जाते हैं, तो यह संघर्ष सिर्फ ईरान-इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा. पहले ही लेबनान, इराक और खाड़ी क्षेत्र इस जंग की चपेट में हैं. ऐसे में यमन की एंट्री से यह एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है.
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि मिडिल ईस्ट में कई मोर्चों पर एक साथ लड़ाई छिड़ सकती है. इससे न सिर्फ सैन्य हालात बिगड़ेंगे, बल्कि वैश्विक तेल सप्लाई, व्यापार और सुरक्षा पर भी गहरा असर पड़ेगा. मसलन, यमन से मिसाइल लॉन्च की यह घटना इस बात का संकेत है कि जंग अब और लंबी और ज्यादा खतरनाक हो सकती है.
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