हूतियों के हमले के बाद तेल और LNG की कीमतों में भारी इजाफा, क्या बढ़ने जा रहा संकट?

हूतियों ने फिलिस्तीन, लेबनान, इराक और ईरान के समर्थन में हमले जारी रखने का ऐलान किया है. लाल सागर के अहम समुद्री मार्गों पर नियंत्रण के चलते वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर संकट गहरा गया है. शिपिंग कंपनियों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ गया है.

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परिवहन लागत में भी भारी बढ़ोतरी हुई है. (Photo: ITG) परिवहन लागत में भी भारी बढ़ोतरी हुई है. (Photo: ITG)

पल्लवी पाठक

  • नई दिल्ली,
  • 31 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:06 AM IST

28 मार्च को यमन के शिया राजनीतिक और सैन्य संगठन 'अंसार अल्लाह' हूतियों) ने इजरायल पर मिसाइलें और ड्रोन दागी थीं. इस तरह हूती ईरान-इजरायल की जंग में सीधे तौर पर शामिल हो गए थे. हूतियों ने कहा है कि वो फिलिस्तीन, लेबनान, इराक और ईरान जैसे अपने सहयोगियों के समर्थन में हमले जारी रखेंगे.

हूती विद्रोही यमन की राजधानी सना और उत्तर-पश्चिमी हिस्से सहित लाल सागर की तटरेखा पर काबिज हैं. हूती'बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट'को प्रभावित करने की क्षमता भी रखता है.

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ये संकरा रास्ता हिंद महासागर को लाल सागर और स्वेज नहर से जोड़ता है. एशिया और यूरोप के बीच होने वाले व्यापार के लिए ये रास्ता लाइफलाइन माना जाता है. वैश्विक व्यापार का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, जिसमें तेल, गैस और रोजमर्रा का सामान शामिल है.

दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा व्यापार पहले से ही प्रतिबंधित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये दोनों समुद्री रास्ते बाधित होते हैं, तो दुनिया के समुद्री व्यापार का लगभग एक-चौथाई हिस्सा संकट में पड़ जाएगा.

गल्फ न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कई जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद शिपिंग कंपनियों को अपने जहाजों का रास्ता बदलकर अफ्रीका के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. इससे सफर का समय दो सप्ताह तक बढ़ गया है और परिवहन लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है. इसके साथ ही सामान की डिलीवरी में भी देरी हो रही है.

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स्वेज नहर में यातायात कम होने से मिस्र को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. मिडिल-ईस्ट में तनाव की वजह से तेल और एलएनजी (LNG) की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. आंकड़ें बताते हैं कि इस मार्ग से तेल की आवाजाही 2023 के 93 लाख बैरल रोजाना से घटकर 2024 में सिर्फ 41 लाख बैरल रह गई है.

यह भी पढ़ें: आने वाला है बड़ा तेल संकट? रूस और अमेरिका की रिफाइनरी तक पहुंच गई 'जंग की आग'

कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल

2024 के आखिर और 2025 की पहली छमाही के बीच एलएनजी की शिपमेंट लगभग जीरो हो गई थी. सोमवार को हूतियों के इजरायल पर ताजा हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया. ब्रेंट क्रूड में 3.20 डॉलर या 2.8% की बढ़ोतरी हुई और ये 114.35 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट में 1.87 डॉलर या 1.9% की बढ़ोतरी हुई और ये 101.51 डॉलर पर पहुंच गया.

हूतियों के इस कदम ने पूरी दुनिया के लिए महंगाई और सप्लाई चेन का नया संकट खड़ा कर दिया है.

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