ग्लोबल ट्रेड के लिए डबल झटका... होर्मुज के बाद इस समुद्री रास्ते पर संकट, रुक जाएगा तेल, व्यापार और सप्लाई सिस्टम?

अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग अब और फैलती दिख रही है. हूती की एंट्री के बाद बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर खतरा बढ़ गया है. पहले से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित है. अगर दोनों समुद्री रास्ते बाधित हुए तो वैश्विक व्यापार, तेल सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट आ सकता है.

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होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान ने पहले ही पाबंदियां लगा रखी हैं. (Photo- ITG) होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान ने पहले ही पाबंदियां लगा रखी हैं. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:21 AM IST

मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक नए और ज्यादा खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुकी है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग में अब हूती की एंट्री हो गई है, जिसने पहली बार सीधे इजरायल की तरफ मिसाइल दागकर इस युद्ध को और बढ़ा दिया है. इस कदम ने न सिर्फ क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी नए खतरे खड़े कर दिए हैं.

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हूती विद्रोही पहले चार हफ्तों तक इस जंग से दूरी बनाए हुए थे, लेकिन अब उन्होंने खुलकर मोर्चा संभाल लिया है. यमन की राजधानी सना और देश के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण रखने वाला यह समूह पहले भी गाजा युद्ध के दौरान इजरायल के खिलाफ हमले कर चुका है. हालांकि, उस समय इन हमलों से सीमित नुकसान हुआ था, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हैं और दांव कहीं ज्यादा बड़ा है.

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असल खतरा सिर्फ इजरायल पर मिसाइल हमलों से नहीं, बल्कि समुद्री रास्तों पर हूती की पकड़ से है. यमन लाल सागर और अदन की खाड़ी के तट पर बसा है और इसकी राजधानी सना हूतियों के नियंत्रण में है. इन्हीं दोनों सागर को जोड़ने वाला चोक पॉइंट बाब अल-मंदेब स्ट्रेट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए काफी अहम है. यहां से करीब 12% वैश्विक व्यापार गुजरता है. अगर हूती इस जंग में एक्टिव रूप से शामिल होते हैं, बाब अल-मंदेब पर पाबंदियां लगाते हैं और जहाजों की आवाजाही रोकते हैं, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा.

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होर्मुज और बाब-अल मंदेब की अहमीयत

हालात और ज्यादा गंभीर इसलिए हो जाता है क्योंकि पहले से ही हॉर्मुज स्ट्रेट पर संकट बना हुआ है. यह स्ट्रेट दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का सबसे अहम मार्ग है, जहां से करीब 20% तेल गुजरता है. अगर होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों एक साथ प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक सप्लाई चेन को दोहरा झटका लगेगा.

इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ेगा. अगर गल्फ देशों से तेल सप्लाई रुकती है, तो दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल महंगा हो जाएगा. इसके अलावा जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते से जाना पड़ेगा, जिससे कमोबेश दो हफ्ते ज्यादा लगेंगे और लागत भी काफी बढ़ जाएगी. यही लागत आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगी, जिससे महंगाई बढ़ेगी.

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ग्लोबल इकोनॉमी पर क्या असर पड़ेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो वैश्विक जीडीपी ग्रोथ में 1% से ज्यादा की गिरावट आ सकती है. ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर, जो "जस्ट-इन-टाइम" सप्लाई पर निर्भर हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. हूती पहले भी लाल सागर में जहाजों को निशाना बना चुके हैं और सऊदी अरब और यूएई के ऊर्जा ठिकानों पर हमले कर चुके हैं. ऐसे में आशंका है कि वे एक बार फिर बड़े पैमाने पर समुद्री नाकेबंदी या हमले शुरू कर सकते हैं.

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हालांकि, इस तरह की कार्रवाई का जवाब भी कड़ा हो सकता है. पहले जब हूती ने ऐसे हमले किए थे, तब अमेरिका और इजरायल ने उनके ठिकानों पर हवाई हमले किए थे. ऐसे में यह संघर्ष और ज्यादा भड़क सकता है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर हूती इस जंग में पूरी ताकत से शामिल होते हैं, तो यह सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहेगा, बल्कि एक बड़ा वैश्विक संकट में बदल सकता है. फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि हूती आगे कितना आक्रामक रुख अपनाते हैं, क्योंकि उनका अगला कदम ही तय करेगा कि यह जंग कितनी दूर तक जाएगी.

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