इजरायल के रामला शहर से स्पेशल ग्राउंड रिपोर्ट में आजतक आपको बताएगा कियहां की सबसे बड़ी मेडिकल इमरजेंसी सर्विस मैगन डेविड एडोम (MDA) कैसे काम करती है. ग्राउंड रिपोर्ट में एमडीए के नेशनल इमरजेंसी डिस्पैच सेंटर के अंदर की कार्यप्रणाली के बारे में हम आपको विस्तार से बता रहे हैं. रामला स्थित यह अंडरग्राउंड कमांड सेंटर हर जीवनरक्षक मिशन की शुरुआत का केंद्र है. अत्याधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित स्टाफ और मजबूत इमरजेंसी नेटवर्क के दम पर एमडीए यह सुनिश्चित करता है कि शांति हो या युद्ध, इजरायल में जरूरतमंदों तक मेडिकल हेल्प मिनटों में पहुंच सके.
यह हाई-टेक कमांड सेंटर जमीन से करीब 50 मीटर नीचे एक मजबूत, सुरक्षित अंडरग्राउंड फैसिलिटी में स्थित है, जिसे युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह सेंटर इजरायल के इमरजेंसी मेडिकल रिस्पॉन्स सिस्टम का सबसे जरूरी हिस्सा है. यहां देशभर से इमरजेंसी नंबर 101 पर आने वाले कॉल्स कुछ ही सेकंड में ट्रेंड मेडिकल प्रोफेशनल्स द्वारा रिसीव किए जाते हैं. कॉल के साथ ही सिस्टम ऑटोमेटिकली लोकेशन और किस तरह की इमरजेंसी है, इसकी पहचान लेता है और तुरंत नजदीकी एंबुलेंस, मोटरसाइकिल रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट, मोबाइल आईसीयू और वॉलंटियर फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स को अलर्ट कर देता है.
आधुनिक तकनीक और AI का इस्तेमाल
एमडीए ने वर्षों के अनुभव के आधार पर खुद की एडवांस तकनीक विकसित की है, जिसमें GPS ट्रैकिंग, लाइव मैपिंग और डेटा इंटीग्रेशन शामिल है. बड़ी स्क्रीन पर पूरे देश की रियल-टाइम स्थिति दिखाई जाती है- कहां मिसाइल गिर सकती है, ट्रैफिक कैसा है और किस जगह कौन-सी टीम मौजूद है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम रिस्पॉन्स टाइम को कम करने में मदद करता है.
मिसाइल हमलों के दौरान भी 24x7 मदद
मिसाइल हमलों के दौरान भी यह सेंटर चौबीसों घंटे काम करता है. स्क्रीन पर मिसाइलों के संभावित रास्ते और वे कहां गिर सकते हैं, ये लगातार मॉनिटर किया जाता है. सायरन बजते ही टीमें एक साथ कई मोर्चों पर सक्रिय हो जाती हैं. एमडीए की टीमें इमरजेंसी के समय सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन, होम फ्रंट कमांड के साथ मिलकर घायलों को तुरंत इलाज देने और अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाने जैसे काम करती हैं. साथ ही सामान्य मेडिकल इमरजेंसी- हार्ट अटैक, सड़क हादसे में भी घायलों और मरीजों का ध्यान रखती हैं.
एमडीए की टीमें खतरनाक परिस्थितियों में भी मौके पर पहुंचकर घर-घर तलाशी, मलबे में फंसे लोगों को निकालना और प्राथमिक उपचार देने का काम करती हैं. इसके बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया जाता है. खास बात यह है कि युद्ध जैसी स्थिति में भी सामान्य मरीजों की सेवाएं बाधित नहीं होतीं. यहां कॉल आते ही मेडिकल एक्सपर्ट तुरंत प्राथमिक जांच (ट्रायेज) करते हैं और जरूरत पड़ने पर फोन पर ही CPR या ब्लीडिंग कंट्रोल जैसी जीवनरक्षक सलाह देते हैं. कुछ ही सेकंड में एमडीए हेल्प मौके पर भेज दिया जाता है. मल्टी-इंसिडेंट की स्थितियों में अलग-अलग टीमें एक साथ कई घटनाओं को संभालती हैं.
जानें मोबाइल इमरजेंसी यूनिट की खासियत
एमडीए के पास 2000 से ज्यादा एंबुलेंस, 650 मोटरसाइकिल यूनिट, 230 फर्स्ट रिस्पॉन्स व्हीकल और मेडिकल इवैक्यूएशन के लिए 5 हेलीकॉप्टर हैं. इसके अलावा करीब 36,000 वॉलंटियर्स और 3,200 कर्मचारी 24x7 सेवाएं दे रहे हैं. इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल के अंदर अत्याधुनिक मेडिकल बेड, लाइफ सपोर्ट सिस्टम और विशेष रूप से डिजाइन किया गया केबिन मौजूद होता है. ये व्हीकल चलते-फिरते मिनी हॉस्पिटल की तरह काम करते हैं.
प्रणय उपाध्याय