होर्मुज के लिए फ्रांस का प्लान-35 क्या है? इजरायल-अमेरिका के हमलों से अलग ये क्या चल रही कवायद

फ्रांस ने होर्मुज को युद्ध के बाद फिर से खोलने के लिए 35 देशों से बातचीत शुरू की है. यह पहल पूरी तरह रक्षात्मक बताई गई है, जिसका मकसद समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाना और तेल सप्लाई को बहाल करना है. फ्रांस और ब्रिटेन इस योजना में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं.

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फ्रांस ने होर्मुज में सुरक्षा मिशन के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन मांगा (Photo: AP) फ्रांस ने होर्मुज में सुरक्षा मिशन के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन मांगा (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:29 AM IST

अभी दुनिया में एक बड़ा युद्ध चल रहा है. अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर हमले कर रहे हैं. इस लड़ाई में ईरान ने एक ऐसा काम किया जिससे पूरी दुनिया की चिंता बढ़ गई. उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की खाड़ी से गुजरने वाले तेल के जहाजों पर हमले शुरू कर दिए.

दुनिया में जितना तेल एक जगह से दूसरी जगह जाता है, उसका पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. सऊदी अरब, कुवैत, इराक इन सब देशों का तेल इसी रास्ते से बाहर जाता है. अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहा, तो पेट्रोल-डीजल के दाम पूरी दुनिया में आसमान छू सकते हैं.

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फिलहाल हालत यह है कि इस रास्ते से जहाजों का आना-जाना लगभग रुक गया है. कोई भी कंपनी अपना जहाजं वहां भेजने को तैयार नहीं है क्योंकि हमले का डर है.

यूरोप के देश फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी इस युद्ध में सीधे हिस्सा नहीं ले रहे. लेकिन वो चुप भी नहीं बैठे हैं. फ्रांस ने एक बड़ी पहल की है. गुरुवार को फ्रांस की सेना के सबसे बड़े अधिकारी ने एक साथ करीब 35 देशों से बात की. बात सिर्फ एक थी कि जब यह लड़ाई खत्म हो जाए, तो इस तेल के रास्ते को दोबारा कैसे खोला जाए.

फ्रांस का साफ कहना है कि यह मिशन किसी पर हमला करने के लिए नहीं है. इसका मकसद सिर्फ यह है कि जहाज सुरक्षित तरीके से आ-जा सकें. फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने यह भी कहा है कि यह तभी होगा जब लड़ाई रुक जाए, ईरान भी राजी हो, और संयुक्त राष्ट्र यानी UN इसे मंज़ूरी दे.

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यह भी पढ़ें: डोनाल्ड ट्रंप का डबल गेम... इधर ईरान संग बातचीत भी, उधर मिडिल ईस्ट में 10 हजार और सैनिक भेजने की तैयारी

ब्रिटेन भी इस योजना में फ्रांस के साथ है. फ्रांसीसी नौसेना के प्रमुख ने भारत, जापान, जर्मनी, ब्रिटेन और इटली के नौसेना अधिकारियों से भी अलग से बात की.

सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि ईरान ने इस रास्ते में जगह-जगह पानी के अंदर बम बिछा दिए हैं जिन्हें "माइन्स" कहते हैं. इन्हें हटाना बहुत मुश्किल और खतरनाक काम है. अकेले अमेरिका के पास भी इतनी ताकत नहीं है कि वो यह काम खुद कर सके. इसीलिए कई देशों को मिलकर यह काम करना होगा.

तो फिलहाल दुनिया युद्ध खत्म होने का इंतज़ार कर रही है और साथ में यह भी सोच रही है कि उसके बाद तेल का यह ज़रूरी रास्ता कैसे वापस खोला जाए.

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