राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के एनर्जी प्लांट्स और तेल सुविधाओं पर अगले 10 दिन तक हमला नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है और शांति का मौका है. लेकिन अब अचानक नई रिपोर्ट्स आ गई हैं जो तस्वीर को थोड़ा अलग दिखा रही हैं. ऐसी चर्चाएं हैं कि ट्रंप पश्चिम एशिया में दस हज़ार अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी कर रहा है.
वॉल स्ट्रीट जर्नल की खबर के मुताबिक, पेंटागन मिडिल ईस्ट में 10,000 तक अतिरिक्त ग्राउंड ट्रूप्स भेजने की योजना बना रहा है. इससे ट्रंप को ज्यादा मिलिट्री ऑप्शन्स मिल सकें. भले ही वो ईरान के साथ शांति बातचीत करने की कोशिश कर रहे हों.
28 फरवरी को जब अमेरिका और इज़रायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था, तब भी बड़े स्तर पर वार्ता चल रही थी. लेकिन, इन वार्ताओं के बीच ही ईरान पर हमला हो गया और सुप्रीम लीडर खामेनेई समेत 40 टॉप कमांडर मारे गए.
दूसरी तरफ, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ड्रोन स्पीडबोट्स भी लगा दिए
पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर माना है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने ऑपरेशन्स में बिना चालक वाली तेज ड्रोन नावें इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. ये पहली बार है जब अमेरिका ने किसी चल रही लड़ाई में ऐसी नावों का इस्तेमाल होने की पुष्टि की है.
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ये ड्रोन नावें मुख्य रूप से सर्विलांस के लिए इस्तेमाल हो रही हैं. जरूरत पड़ी तो हमला करने के काम भी आ सकती हैं. पहले इसकी कोई खबर बाहर नहीं आई थी.
पिछले कुछ सालों से अमेरिकी नौसेना ऐसी बिना ड्राइवर वाली नावें बनाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन कई बार दिक्कतें आईं.
यूक्रेन-रूस युद्ध में ऐसी ड्रोन नावों ने रूस की ब्लैक सी फ्लीट को भारी नुकसान पहुंचाया था, जिसके बाद इनकी अहमियत बहुत बढ़ गई. ईरान ने भी पिछले एक महीने में गल्फ में ऑयल टैंकरों पर समुद्री ड्रोन से दो बार हमले किए हैं. लेकिन अभी तक कोई संकेत नहीं है कि अमेरिका ने अपनी इन ड्रोन नावों को हमला करने के लिए इस्तेमाल किया हो.
पेंटागन के सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने बताया कि मैरीलैंड की कंपनी ब्लैकसी द्वारा बनाई गई GARC नाम की ये बिना चालक वाली नावें गश्त के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं. इस पूरे ऑपरेशन का नाम है – “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी”.
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