'ईरान से भिड़कर नहीं खुलेगा होर्मुज', मैक्रों ने डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य विकल्प को बताया फेल प्लान

Macron rejects US military option for Hormuz: फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों होर्मुज के मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान से बिल्कुल विपरीत विचार साझा कर रहे हैं. उनका कहना है कि होर्मुज का रास्ता मिलिट्री ऑप्शन के ज़रिए नहीं खुलेगा. अगर यह रास्ता खोलना है तो बातचीत के ज़रिए खोला जा सकता है.

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फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने बताया कि अगर सेना उतरी तो यह ऑपरेशन बहुत लंबा और मुश्किल हो जाएगा (Photo: AFP) फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने बताया कि अगर सेना उतरी तो यह ऑपरेशन बहुत लंबा और मुश्किल हो जाएगा (Photo: AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:49 PM IST

पश्चिम एशिया की जंग अब सिर्फ इजरायल, ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रही. इसकी आग अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को जला रही है. और इस आग का सबसे बड़ा दरवाजा है होर्मुज की खाड़ी, जिसे लेकर अब दुनिया के बड़े नेताओं में मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिका को साफ़ संदेश दे दिया है कि होर्मुज का रास्ता ताकत दिखाने से नहीं खुलेगा. अगर यह रास्ता अमेरिका अपनाती है तो और ख़तरनाक के साथ-साथ बेकार होगा.

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होर्मुज की खाड़ी दुनिया का सबसे अहम तेल रास्ता है. दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल इसी रास्ते से गुजरता है. सऊदी अरब, UAE, कुवैत और इराक का तेल इसी खाड़ी से होकर बाकी दुनिया तक पहुंचता है. 

जब से ईरान पर अमेरिका-इजराइल का हमला शुरू हुआ है तब से ईरान ने इस खाड़ी में तेल के टैंकरों पर हमले शुरू कर दिए हैं और रास्ता लगभग बंद कर दिया है. इसी वजह से दुनियाभर में तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है और हर जगह महंगाई बढ़ रही है.

अमेरिका क्या चाहता है?

अमेरिका इस खाड़ी को फिर से खोलना चाहता है और उसकी सोच है कि अगर जरूरत पड़े तो सैन्य ताकत से यह काम किया जाए. ट्रम्प प्रशासन ने कई बार यह संकेत दिया है.

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मैक्रों ने क्या कहा?

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इन दिनों दक्षिण कोरिया के दौरे पर हैं. वहां पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने सीधे और साफ शब्दों में कहा कि होर्मुज को ताकत से खोलना "अवास्तविक" है यानी ऐसा हो नहीं सकता. उन्होंने कहा कि कुछ लोग और कभी-कभी अमेरिका भी मिलिट्री ऑपरेशन की बात करता है लेकिन फ्रांस ने कभी यह रास्ता नहीं चुना और न चुनेगा.

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मैक्रों ने समझाया कि होर्मुज की खाड़ी से गुजरना इतना आसान नहीं है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के पास तट पर बैलिस्टिक मिसाइलें और कई तरह के हथियार हैं. अगर कोई देश मिलिट्री सैन्य ऑपरेशन करके खाड़ी खोलने की कोशिश करेगा तो वहां से गुजरने वाला हर जहाज इन हथियारों की जद में होगा. यह ऑपरेशन अनंत काल तक चल सकता है और नुकसान बहुत ज्यादा होगा.

उनका सीधा कहना था कि होर्मुज की खाड़ी सिर्फ ईरान के साथ बातचीत और समझौते के जरिए ही खुल सकती है. पहले युद्ध की सबसे तीव्र अवस्था खत्म हो, फिर बातचीत हो और तब जाकर रास्ता खुले.

फ्रांस का अपना प्लान क्या है?

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मैक्रों ने बताया कि फ्रांस एक अंतरराष्ट्रीय मिशन की तैयारी कर रहा है. इसमें यूरोप के साथ-साथ दूसरे देश भी शामिल होंगे. यह मिशन तेल और गैस के टैंकरों को सुरक्षित सुरक्षा घेरा देकर होर्मुज से गुजारेगा. लेकिन यह तब होगा जब जंग का सबसे भयंकर दौर खत्म हो जाए.

यह बयान क्यों अहम है?

यह बयान बहुत मायने रखता है क्योंकि यह पहली बार है जब किसी बड़े पश्चिमी नेता ने इतनी साफ तरीके से अमेरिका की सोच से असहमति जताई है. ट्रंप एक तरफ तीन हफ्ते में जंग खत्म करने और होर्मुज खोलने की बात कर रहे हैं. दूसरी तरफ मैक्रों कह रहे हैं कि यह सोचना ही गलत है.

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यह दरार बताती है कि पश्चिमी देश इस जंग पर एकमत नहीं हैं. अमेरिका अकेले अपनी शर्तों पर जंग लड़ रहा है और यूरोप अब खुलकर अलग राय रख रहा है.

जंग जारी है, तेल महंगा है, और दुनिया दो धड़ों में बंटती जा रही है. होर्मुज का यह छोटा सा रास्ता अब पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था का केंद्र बन गया है.

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