45 साल पहले बिजनेस में जापानियों से मिली एक हार से जगा था ट्रंप का टैरिफ प्रेम, अब उसी को बनाया हथियार

ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी पर एक्सपर्ट चिंता जता रहे हैं कि इससे दुनिया में ट्रेड वॉर शुरू हो सकती है. ऐसे में इस रस्साकसी के बीच ये जानना जरूरी है कि आखिर टैरिफ को लेकर ट्रंप इतने अडिग क्यों हैं. क्या वाकई ये कदम अमेरिका के भविष्य के लिए है या फिर इसकी कोई कड़ी अतीत के पन्नों से भी टकराती है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 10:50 AM IST

अमेरिका की सत्ता संभालते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दुनिया के कई देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी ने हलचल बढ़ा दी है. इसे लेकर चीन, मेक्सिको और कनाडा समेत कई देशों में तनाव है. ट्रंप के इस कदम पर एक्सपर्ट चिंता जता रहे हैं कि इससे दुनिया में ट्रेड वॉर शुरू हो सकती है. ऐसे में इस रस्साकसी के बीच ये जानना जरूरी है कि आखिर टैरिफ को लेकर ट्रंप इतने अडिग क्यों हैं. क्या वाकई ये कदम अमेरिका के भविष्य के लिए है या फिर इसकी कोई कड़ी अतीत के पन्नों से भी टकराती है. इसे समझने के लिए हमें करीब 45 साल पीछे चलना होगा. 

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45 साल पहले क्या हुआ था...

कहानी साल 1988 की है जब 'कैसाब्लांका' फिल्म में इस्तेमाल हुए एक पियानो की नीलामी हुई थी. इस नीलामी में ट्रंप ने भी हिस्सा लिया था. लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. नीलामी जीती थी एक जापानी ट्रेडिंग कंपनी ने. ऑक्शन में मिली इस हार के बाद  ट्रंप ने पहली बार टैरिफ शब्द का इस्तेमाल किया था. तब उन्होंने कहा था कि वह नीलामी में हार को गंभीरता से नहीं लेते, लेकिन यह जापान की बढ़ती संपत्ति का एक ताजा उदाहरण है. इस घटना के अगले साल ट्रंप ने एक इंटरव्यू में जापान से आयात पर 15 से 20 प्रतिशत टैक्स लगाने की बात की थी.

उस वक्त ट्रंप की पहचान एक बिजनेसमैन के रूप में हुआ करती थी. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तब ट्रंप ने कहा था, 'मैं टैरिफ में बहुत विश्वास करता हूं.' उन्होंने जापान, जर्मनी, सऊदी अरब और दक्षिण कोरिया के व्यापार तरीकों की आलोचना की थी. उन्होंने कहा था, 'अमेरिका को लूट लिया गया है. हमें टैरिफ लगाना चाहिए और इस देश की रक्षा करनी चाहिए.'

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ट्रंप के करीबी और इतिहासकार मानते हैं कि टैरिफ के प्रति उनका ये प्रेम 1980 के दशक में जापान से मिली इस हार के बाद ही जगा था. वो ऐसा दौर था जब जापान को अमेरिका की आर्थिक सुपरमेसी के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में देखा गया था.

दरअसल, 1980 के दशक में जब जापान की अर्थव्यवस्था और उसका अंतरराष्ट्रीय प्रभाव तेजी से बढ़ रहा था, तब ट्रंप ने जापान की आलोचना की थी. उन्होंने कहा था कि जापान में व्यापार करना कठिन है और यह शिकायत की थी कि जापानी अपने उत्पादों को अमेरिका में बेचते हैं और अमेरिकी कंपनियों को नुकसान पहुंचाते हैं.

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अखबार में दिया था विज्ञापन

1987 में ट्रंप ने एक अखबार में विज्ञापन निकाला था जिसमें कहा था कि 'दशकों से जापान और अन्य देश अमेरिका का फायदा उठा रहे हैं.' उन्होंने जापानी व्यापार प्रथाओं की खुलकर आलोचना की थी. ट्रंप की मौजूदा चिंता उनके व्यक्तिगत अनुभव और विश्वास से जुड़ी हुई है जिसमें वो मानते हैं कि विदेशी कंपनियों ने अमेरिकी फैक्ट्रियों को तबाह कर दिया है.

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बता दें कि ट्रंप ने हाल ही में कनाडा, मेक्सिको और चीन से आने वाले सामानों पर नए शुल्क (टैरिफ) लगाए हैं. ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत कनाडा और मेक्सिको से आने वाले सभी सामानों पर 25% शुल्क लगाया जाएगा. वहीं, चीन से आने वाले सामानों पर 10 फीसदी शुल्क लगाए जाने की बात कही गई है.

ट्रंप और उनके समर्थकों का मानना है कि यह कदम इन देशों को अवैध प्रवासन और नशीले पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है. वहीं, ये भी कहा गया कि टैरिफ ट्रंप की आर्थिक रणनीति का हिस्सा हैं. वह इस कदम के जरिए अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बढ़ाने, अमेरिकी लोगों के हितों की रक्षा करने और नौकरियां बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं. चुनावी प्रचार में भी ट्रंप ने कहा था कि ये शुल्क "आपके लिए कोई लागत नहीं होंगे, यह एक दूसरे देश के लिए लागत होगी".

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