ईरान में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच चीन ने सभी पक्षों से तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने और युद्ध को फैलने से बचाने की अपील की है. चीन के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार 3 मार्च को यह बयान जारी किया.
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता Mao Ning ने नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि चीन पड़ोसी देशों में युद्ध के फैलाव को लेकर गहराई से चिंतित है. उन्होंने कहा कि चीन सभी पक्षों से अपील करता है कि वो सैन्य कार्रवाई रोकें और हालात को और बिगड़ने से बचाएं.
चीन ने सभी पक्षों से संयम बरतने को कहा
माओ निंग ने कहा कि मौजूदा हालात पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर हैं. चीन का मानना है कि संघर्ष को सीमित रखना और बातचीत के रास्ते तलाशना ही स्थायी समाधान की दिशा में सही कदम होगा. इस बयान से एक दिन पहले चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने खाड़ी देशों से एकजुट होने की अपील की थी. उन्होंने अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद बढ़ते तनाव के बीच बाहरी दखल का विरोध करने की बात कही थी.
अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद बढ़ा तनाव
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, वांग यी ने ओमान के विदेश मंत्री के साथ फोन पर बातचीत की. इस बातचीत में उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों को एकजुटता मजबूत करनी चाहिए और आपसी मित्रता को आगे बढ़ाना चाहिए. उनका कहना था कि क्षेत्र के देशों को अपना भविष्य और भाग्य अपने हाथ में रखना चाहिए.
दरअसल, शनिवार से शुरू हुए अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद क्षेत्र में हालात और बिगड़ गए हैं. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई. इसके बाद ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई की गई. ईरान ने इजरायल के साथ-साथ उन खाड़ी देशों को भी निशाना बनाया, जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं. इन हमलों के बाद पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.
चीन का कहना है कि अगर सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो इसका असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पड़ोसी देशों में भी हालात बिगड़ सकते हैं. चीन ने स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्र में स्थिरता और शांति बनाए रखने के पक्ष में है.
चीन का कूटनीतिक समाधान पर जोर
विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन का यह बयान ऐसे समय आया है जब संघर्ष का दायरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. चीन लगातार कूटनीतिक समाधान पर जोर देता रहा है और उसने एक बार फिर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है. फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे हालात किस दिशा में बढ़ते हैं और क्या संबंधित देश तनाव कम करने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाते हैं.
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