सस्ते तेल की ताक में थीं चीन की रिफाइनरियां! नहीं माना सऊदी तो उठाया ये कदम

चीन ने जून महीने के लिए सऊदी अरब से कच्चे तेल की खरीदारी रिकॉर्ड स्तर पर घटा दी है. दरअसल, चीन की रिफाइनरियां सस्ती कीमतों पर तेल खरीदना चाहती है लेकिन सऊदी ने तेल की कीमतें उनके हिसाब से नहीं घटाई है.

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चीन ने सऊदी अरब से तेल खरीद बहुत कम कर दी है (File Photo: AFP) चीन ने सऊदी अरब से तेल खरीद बहुत कम कर दी है (File Photo: AFP)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 12 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:13 PM IST

चीन ने सऊदी अरब से कच्चे तेल की खरीदारी रिकॉर्ड स्तर पर कम कर दी है. बताया जा रहा है कि जून के लिए चीन ने सऊदी तेल का काफी कम ऑर्डर दिया है. इसकी सबसे बड़ी वजह तेल का महंगा होना है जिससे चीन सऊदी का तेल खरीदने से पीछे हट रहा है.

व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका-ईरान संघर्ष की वजह से कच्चा तेल महंगा हो गया है जिससे चीन के साथ-साथ कई अन्य देशों ने भी ऑर्डर घटा दिए हैं.

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सूत्रों के मुताबिक, सरकारी ऊर्जा कंपनी सऊदी अरामको अगले महीने चीन में अपने ग्राहकों को करीब 1 करोड़ बैरल तेल भेजेगी, यानी लगभग 3.33 लाख बैरल प्रतिदिन (BPD) सऊदी का तेल चीन जाएगा.

डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर और समाचार एजेंसी रॉयटर्स के आंकड़ों के अनुसार, चीन ने सऊदी अरब से कभी इतना कम तेल  नहीं खरीदा. इसकी तुलना में 2025 में सऊदी ने चीन को औसतन 13.9 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भेजा था.

सूत्रों ने बताया कि चीन की बड़ी रिफाइनिंग कंपनियों जैसे सीनोपेक, सिनोकेम और रोंगशेंग पेट्रोकेमिकल ने जून के लिए अपनी खरीद कम कर दी है.

सस्ता तेल चाहती थीं चीनी रिफाइनरियां, नहीं मिला तो घटा दी खरीद

पिछले सप्ताह सऊदी अरब ने एशिया के लिए जून महीने के अरब लाइट क्रूड का आधिकारिक बिक्री मूल्य 15.50 डॉलर प्रति बैरल प्रीमियम तय किया था, जो पिछले महीने के रिकॉर्ड 19.50 डॉलर प्रीमियम से कम है.

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सूत्रों के अनुसार, चीन की रिफाइनरियां और सस्ता तेल चाहती थीं इसलिए उन्होंने सऊदी अरब से तेल न लेना ही सही समझा. सऊदी अरब का कच्चा तेल अब भी काफी महंगा बना हुआ है.

अप्रैल में चीन की सरकारी तेल कंपनियों ने अपने ऑपरेटिंग रेट पिछले महीने की तुलना में कम कर दिए थे, क्योंकि तेल-गैस की शिपिंग के लिए अहम रास्ते होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई काफी हद तक बाधित रही.

फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद से सऊदी के कच्चे तेल का निर्यात गिरा है. सऊदी अरब ने अपनी शिपमेंट्स को ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए लाल सागर के बंदरगाह यानबू की ओर मोड़ दिया था.

एनर्जी अस्पेक्ट्स के विश्लेषकों ने सोमवार को जारी एक नोट में कहा कि जून में चीन को कम सप्लाई होने से एशिया के अन्य खरीदारों को फायदा मिल सकता है. उनका अनुमान है कि अतिरिक्त तेल की खेपों को उत्तर-पूर्व एशिया के दूसरे ग्राहकों की ओर भेजा जाएगा.

भारत भी सऊदी अरब के तेल का बड़ा खरीदार है. पिछले महीने, अप्रैल में सऊदी अरब रूस के बाद भारत का शीर्ष तेल सप्लायर रहा. भारत ने सऊदी से हर रोज 6 लाख 85 हजार बैरल तेल खरीदा.

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