दिल्ली में हुई ब्रिक्स बैठक में ईरान-UAE की भिड़ंत, नहीं जारी हो पाया साझा बयान, भारत ने क्या कहा?

BRICS देशों की नई दिल्ली में हुई दो दिवसीय विदेश मंत्रियों की बैठक बिना किसी संयुक्त बयान के समाप्त हो गई है. बैठक में मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेद साफ दिखे, खासकर ईरान और यूएई के बीच तनाव दिखा.

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ईरान और यूएई तनाव का असर ब्रिक्स में भी देखने को मिला (Photo: Reuters) ईरान और यूएई तनाव का असर ब्रिक्स में भी देखने को मिला (Photo: Reuters)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 15 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:12 PM IST

BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक शुक्रवार को नई दिल्ली में बिना किसी संयुक्त बयान के समाप्त हो गई. मेजबान भारत ने कहा कि मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर सदस्य देशों के बीच 'कुछ मुद्दों पर अलग-अलग राय' होने की वजह से साझा बयान जारी नहीं किया जा सका.

भारत की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सदस्य देशों ने संप्रभुता, समुद्री सुरक्षा, नागरिक ढांचे की सुरक्षा और मध्य पूर्व में आम लोगों की जान की रक्षा जैसे मुद्दों पर 'अपने-अपने देश की स्थिति स्पष्ट की और अलग-अलग राय शेयर की.'

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बयान में एक फुटनोट भी शामिल था, जिसमें कहा गया कि 'एक सदस्य देश' को गाजा और लाल सागर व बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट की सुरक्षा से जुड़े हिस्सों पर आपत्ति थी.

BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इथियोपिया, मिस्र, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और इंडोनेशिया शामिल हैं.

ईरान युद्ध के दौरान सदस्य देशों के बीच मतभेद और ज्यादा खुलकर सामने आए हैं, खासकर ईरान और यूएई के बीच. माना जा रहा है कि दोनों देशों के मतभेद की वजह से ब्रिक्स बैठक के बाद कोई साझा बयान जारी नहीं किया जा सका. 

गुरुवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने BRICS देशों से अमेरिका और इजरायल की कथित 'गैरकानूनी आक्रामकता' की निंदा करने की अपील की थी. उन्होंने सदस्य देशों से अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के 'राजनीतिक इस्तेमाल' का विरोध करने का भी आग्रह किया था.

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ब्रिक्स मीटिंग में ईरान और यूएई के बीच बढ़ा तनाव

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ हमले शुरू किए थे जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी में स्थित अमेरिकी हितों को निशाना बनाया. ईरान के हमलों में सबसे अधिक यूएई प्रभावित हुआ और उसके तेल ठिकानों और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भी भारी नुकसान हुआ.

ईरान ने युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट को भी बंद कर रखा है जिससे यूएई समेत खाड़ी देशों की तेल और गैस सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. इन सभी वजहों से यूएई ईरान से नाराज है.

इस बीच बुधवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि युद्ध के बीच वो यूएई के गुप्त दौरे पर गए थे. उन्होंने दावा कि दौरे में उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान से मुलाकात की. हालांकि, यूएई ने नेतन्याहू के इस दावे को खारिज कर दिया है.

ये खबर सामने आने के बाद ईरान बौखला गया और उसने यूएई पर इजरायल के साथ गठजोड़ का आरोप लगाया. ब्रिक्स मीटिंग के लिए भारत पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के युद्ध में यूएई भी शामिल है.

बैठक में भिड़े ईरान-यूएई के मंत्री

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ब्रिक्स की बैठक में अराघची और यूएई के विदेश राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार के बीच तीखी बहस देखने को मिली. अराघची ने कहा कि ईरान अवैध युद्ध का शिकार हो रहा है. उन्होंने ब्रिक्स देशों से अपील की कि वो अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन के लिए अमेरिका और इजरायल की खुलकर निंदा करें.

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को पश्चिमी देशों के दबदबे के खिलाफ खड़ा होना चाहिए. इसके बाद जब यूएई के मंत्री के बोलने की बारी आई तो उन्होंने ईरान का नाम लेकर आरोप लगाया कि उसने पड़ोसी देशों पर हमले किए.

जवाब में अराघची ने आरोप लगाया कि यूएई ने ईरान के खिलाफ हमले के लिए अमेरिका को अपनी जमीन इस्तेमाल करने दी. दोनों देशों के बीच तनाव का असर ब्रिक्स की बैठक पर भी देखने को मिला जहां कोई साझा बयान जारी नहीं हो पाया. 

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