'शेख हसीना को लौटाए भारत...', बांग्लादेश में चुनावी जीत के बाद BNP ने प्रत्यर्पण की मांग तेज की

बांग्लादेश ने एक फिर से भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग तेज कर दी है. आम चुनाव में बीएनपी को बंपर जीत मिलने के बाद, पार्टी के वरिष्ठ नेता सलाहुद्दीन अहमद का कहना है कि कानूनों के तहत हसीना की वापसी हो और उनको ट्रायल के अदालत में पेश किया जाए.

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चुनावी जीत के बाद बीएनपी ने शेख हसीना की वापसी पर बढ़ाया दबाव (Photo: ITG) चुनावी जीत के बाद बीएनपी ने शेख हसीना की वापसी पर बढ़ाया दबाव (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:33 PM IST

बांग्लादेश में हुए आम चुनाव के परिणाम आ गए हैं. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी को बंदर जीत मिली है. इस जीत के बाद एक बार फिर से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग तेज हो गई है. बीएनपी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत हसीना की वापसी होनी चाहिए और फिर ट्रायल का सामना करना चाहिए.

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बीएनपी पार्टी के वरिष्ठ नेता सलाहुद्दीन अहमद ने इस बात को साफ करते हुए कहा कि हसीना को भारत से वापस लाकर कानून के तहत ट्रायल का सामना करना चाहिए.

सलाहुद्दीन ने बताया कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री पहले ही शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मामला भारत के सामने उठा चुके हैं, और बीएनपी इस मांग के समर्थन में पूरी तरह खड़ी है. 

उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच चल रहा है, लेकिन बीएनपी लगातार इस पर जोर देती रहेगी कि शेख हसीना को बांग्लादेश भेजा जाए ताकि वे न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर सकें.

यह भी पढ़ें: 'BNP की जीत पर नहीं, जमात की हार पर खुश हूं...', बांग्लादेश चुनाव नतीजों पर बोलीं तसलीमा नसरीन

बांग्लादेश अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ सामान्य और फ्रेंडली रिलेशन कायम करने का इच्छुक है, जिसमें भारत भी शामिल है. हालांकि, बीएनपी ने यह साफ किया कि यह संबंध म्यूचुअल रिस्पेक्ट और समानता के आधार पर होना चाहिए.

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यह बयान ऐसे समय आया है जब 2026 के आम चुनाव में बीएनपी को बड़ी जीत मिली है. यह चुनाव अगस्त 2024 के जन आंदोलन के बाद पहला चुनाव था, जिसके कारण शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी और वे भारत के राजधानी दिल्ली में रह रही हैं. नवंबर 2025 में एक विशेष ट्रिब्यूनल ने 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामलों में हसीना को गैरहाजिरी में सजा भी सुनाई थी.

बीएनपी नेताओं ने चुनाव की समावेशिता पर उठ रहे सवालों को भी खारिज किया और कहा कि जनता ने अगस्त 2024 के आंदोलन के जरिए अपना रुख साफ कर दिया है. अवामी लीग पर प्रतिबंध और उसके खिलाफ जांच प्रक्रिया कानूनी ढांचे के तहत जारी है.

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