राजनीतिक बंदियों की रिहाई, सभी केस खत्म और 3 महीने में चुनाव, खालिदा जिया की पार्टी ने तैयार किया बांग्लादेश का रोडमैप

बीएनपी महासचिव आलमगीर ने बताया कि राष्ट्रपति से चर्चा के मुताबिक अंतरिम सरकार का कार्यकाल 3 महीने का होगा. इस दौरान अंतरिम सरकार बांग्लादेश में चुनाव प्रक्रिया पूरी करेगी. पिछले 16 वर्षों में विपक्षी नेताओं के खिलाफ दर्ज सभी राजनीतिक मामले वापस लिए जाएंगे और सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाएगा.  

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बांग्लादेश में राजनीतिक संकट का हल निकालने के लिए अंतरिम सरकार के गठन का फैसला किया गया है. (PTI Photo) बांग्लादेश में राजनीतिक संकट का हल निकालने के लिए अंतरिम सरकार के गठन का फैसला किया गया है. (PTI Photo)

अनुपम मिश्रा

  • ढाका,
  • 06 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 1:34 PM IST

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद अब आगे का रास्ता क्या होगा, इसे लेकर मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रतिनिधियों की राष्ट्रपति शहाबुद्दीन के साथ मंगलवार को महत्वपूर्ण बैठक हुई. इस मीटिंग के बाद बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और राष्ट्रपति के साथ हुई चर्चा के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि हमने राष्ट्रपति शहाबुद्दीन से संसद को तुरंत भंग करने और आज ही अंतरिम सरकार के गठन का आग्रह किया है. 

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अगले प्रधानमंत्री के लिए बीएनपी की ओर से अभी तक कोई नाम प्रस्तावित नहीं किया है, लेकिन पार्टी का कहना है कि जब राष्ट्रपति हमें बुलाएंगे तो हम नाम का प्रस्ताव देंगे. बीएनपी ने प्रदर्शनकारियों से तुरंत हिंसा रोकने का भी आग्रह किया है. मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के अनुसार पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान बांग्लादेश लौटेंगे. उन्होंने तारिक रहमान से बांग्लादेश आने का आग्रह किया है. 

बीएनपी महासचिव आलमगीर ने बताया कि राष्ट्रपति से चर्चा के मुताबिक अंतरिम सरकार का कार्यकाल 3 महीने का होगा. इस दौरान अंतरिम सरकार बांग्लादेश में चुनाव प्रक्रिया पूरी करेगी. पिछले 16 वर्षों में विपक्षी नेताओं के खिलाफ दर्ज सभी राजनीतिक मामले वापस लिए जाएंगे और सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाएगा. बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि खालिदा जिया बीमार हैं और जेल में बंद रहने के दौरान बेहद कमजोर हो गई हैं. जब वह पूरी तरह ठीक हो जाएंगी तो सार्वजनिक मंचों पर दिखेंगी.

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मुहम्मद यूनुस हो सकते हैं अंतरिम सरकार के प्रमुख

सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान से मिलने वाले छात्र नेताओं ने नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाने का आह्वान किया है. सूत्रों के अनुसार उन्होंने अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में सत्ता संभालने के लिए सहमत हो गए हैं. इस बीच बांग्लादेश में सेना ने मंगलवार की सुबह कर्फ्यू हटा लिया, सरकारी और निजी दफ्तर, शैक्षणिक संस्थान फिर से खुल गए. हालांकि सरकारी नौकरी में कोटा सिस्टम के खिलाफ हफ्तों के विरोध प्रदर्शन और उसके बाद हुई हिंसा के बाद उपस्थिति कम थी. इन हिंसक प्रदर्शनों में 300 से अधिक लोगों की जान चली गई और हजारों लोग घायल हो गए. ढाका एयरपोर्ट पर भी फ्लाइट सर्विस फिर से शुरू हो गई.

एक सैन्य विमान से भारत पहुंचीं शेख हसीना कथित तौर पर यूनाइटेड किंगडम या फिनलैंड में राजनीतिक शरण लेने पर विचार कर रही हैं. हालांकि, उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय ने इन खबरों को खारिज कर दिया और कहा कि उनकी भविष्य में बांग्लादेश लौटने की कोई योजना नहीं है. इस बीच नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने सोमवार को कहा कि घातक सरकार विरोधी प्रदर्शन शेख हसीना सरकार के खिलाफ गुस्से के कारण भड़के. उन्होंने कहा कि अवामी लीग के सत्ता में रहने के दौरान बांग्लादेश में लोकतंत्र समाप्त हो गया था. 

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मुहम्मद यूनुस ने हसीना सरकार के पतन पर जताई खुशी

पेरिस में ओलंपिक आयोजकों के साथ सलाहकार के रूप में काम कर रहे यूनुस ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'पूरे बांग्लादेश में जश्न का माहौल है, क्योंकि शेख हसीना सत्ता से बाहर हो गई हैं. छात्रों ने इसे संभव बनाया है. उन्होंने कहा कि छात्र प्रदर्शनकारियों की मौत 'लोकतंत्र की विफलता' थी. मुहम्मद यूनुस ने कहा, 'छात्रों की आवाज दबाने के लिए अर्धसैनिक बल और सेना को लाया गया. छात्रों के अंदर भरा गुस्सा ज्वालामुखी विस्फोट की तरह फैल गया.' हसीना सरकार के खिलाफ छात्रों का विरोध कोटा सिस्टम में बदलाव की मांग के साथ शुरू हुआ था. लेकिन प्रदर्शनों के दौरान सेना और पुलिस के साथ हुई झड़पों के कारण कई लोग मारे गए. 

सुप्रीम कोर्ट ने आंदोलनकारी छात्रों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कोटा सि​स्टम में बड़ा बदलाव किया. शीर्ष अदालत ने 1971 मुक्ति संग्राम के स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों को सरकारी नौकरियों में मिलने वाला 30 फीसदी कोटा समाप्त कर दिया और 93 फीसदी भर्तियां मेरिट के आधार पर कर दीं. साथ ही आरक्षण का दायरा 7 फीसदी सीमित कर दिया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बावजूद छात्रों ने शेख हसीना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन बंद नहीं किया और उनके इस्तीफे की मांग पर अड़ गए. हसीना सरकार ने बल प्रयोग के जरिए छात्रों के प्रदर्शन को दबाने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें विफल हुईं और अंतत: उन्हें इस्तीफा देकर देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. 
 

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