मिडिल ईस्ट की जंग में रूस की सीधी हिस्सेदारी तो नहीं है, लेकिन एक सीक्रेट जानकारी से अमेरिका परेशान लग रहा है. इसके बाद रूस को संदेश भी भिजवाया गया है. दरअसल, शनिवार को अमेरिका की तरफ से खुद बताया गया था कि ईरान को रूस ऐसी जानकारी दे रहा है जिससे तेहरान को अमेरिकी सेना पर हमला करने में मदद मिल सकती है.
इसको ध्यान में रखते हुए अब अमेरिका ने रूस को संदेश भेजा है कि वह ऐसा न करे. स्टीव विटकॉफ की तरफ से ये जानकारी दी गई. वह मिडिल ईस्ट के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के विशेष दूत हैं.
पत्रकारों के सवाल पर स्टीव विटकॉफ ने कहा कि उन्होंने रूस से कहा है कि वह ईरान को टारगेटिंग जानकारी और दूसरी मदद न भेजे.
ट्रंप बोले- कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा
स्टीव विटकॉफ के साथ उस वक्त डोनाल्ड ट्रंप भी मौजूद थे. उन्होंने दावा किया कि अगर रूस ऐसी जानकारी दे भी रहा है तो उससे जंग में कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा. उनका मतलब था कि इससे ईरान को कोई खास मदद या बढ़त नहीं मिल रही.
ट्रंप ने कहा, 'अगर आप देखें कि पिछले हफ्ते ईरान के साथ क्या हुआ, अगर उन्हें जानकारी मिल रही है, तो इससे उन्हें ज्यादा मदद नहीं मिल रही है.'
बता दें कि शनिवार को पता चला था कि रूस ने ईरान को ऐसी जानकारी दी है जो तेहरान को क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और अन्य संपत्तियों पर हमला करने में मदद कर सकती है. रूस का इस जंग में शामिल होने का ये पहला संकेत माना जा रहा था.
बता दें कि रूस ने यूक्रेन के खिलाफ जारी अपने चार साल पुराने युद्ध में मिसाइलों और ड्रोन की बढ़ती जरूरत को देखते हुए ईरान के साथ रिश्ते और मजबूत किए हैं. दूसरी तरफ, परमाणु कार्यक्रम और Hezbollah, Hamas और Houthis जैसे प्रॉक्सी संगठनों के समर्थन के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़े तेहरान के लिए मॉस्को का साथ अहम माना जाता है.
पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर बात भी की थी. इस दौरान उन्होंने खामेनेई की मौत और हमलों में आम नागरिकों के मारे जाने पर दुख जताया था. जंग शुरू होने के बाद क्रेमलिन की तरफ से तेहरान को यह पहला फोन कॉल था. पुतिन ने टकराव तुरंत खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि ईरान या पूरे मिडिल ईस्ट से जुड़े किसी भी मुद्दे का समाधान ताकत से नहीं, बल्कि कूटनीतिक रास्ते से निकाला जाना चाहिए.
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