होल्डिंग सेंटर्स से 4800 घुसपैठियों को बांग्लादेश भेजा, 836 जल्द होंगे डिपोर्ट: बंगाल सीएम शुभेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों का मुद्दा गर्म है. इस बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि सीमावर्ती जिलों के होल्डिंग सेंटरों से करीब 4,800 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश भेजा जा चुका है, जबकि 836 लोगों का डिपोर्टेशन बाकी है. उन्होंने सीमा सुरक्षा और बाड़बंदी को राज्य सरकार की प्राथमिकता बताया.

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CM शुभेंदु ने कहा जो CAA के दायरे में नहीं आते हैं ऐसे लोगों को सीधे बीएसएफ को सौंपा जा रहा (फाइल फोटो- PTI) CM शुभेंदु ने कहा जो CAA के दायरे में नहीं आते हैं ऐसे लोगों को सीधे बीएसएफ को सौंपा जा रहा (फाइल फोटो- PTI)

aajtak.in

  • कोलकाता,
  • 08 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:23 AM IST

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध प्रवासियों को लेकर ताजा जानकारी साझा की. रविवार को उन्होंने बताया कि राज्य के सीमावर्ती जिलों में स्थापित होल्डिंग सेंटर्स से लगभग 4,800 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश भेजा जा चुका है और ऐसे 836 लोग इन केंद्रों से प्रत्यर्पण (डिपोर्ट) किए जाने बाकी हैं.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, बंगाल सीएम ने कहा कि अवैध अप्रवासन एक बड़ा मुद्दा है, और उनकी सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा को सुरक्षित करने के लिए जरूरी 556 किलोमीटर में से लगभग 100 किलोमीटर की बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन सौंप दी है.

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उन्होंने कहा कि जमीन ट्रांसफर देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है.

बीजेपी के विशेष प्रशिक्षण शिविर की तैयारी बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, 'बाड़ लगाने के लिए जरूरी 556 किलोमीटर जमीन में से हमने बीएसएफ को लगभग 100 किलोमीटर भूमि सौंप दी है और उत्तरी बंगाल में चिकन नेक कॉरिडोर को प्राथमिकता दी है.'

'चिकन नेक', जिसे आधिकारिक तौर पर सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नाम से जाना जाता है, उत्तरी बंगाल में लगभग 20-22 किलोमीटर चौड़ा और लगभग 60 किलोमीटर लंबा एक संकरा भूभाग है जो भारत के बाकी हिस्सों को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है. सुरक्षा और रणनीतिक दोनों ही दृष्टिकोणों से इसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना जाता है.

सभी राज्यों में से पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के साथ सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, जो कुल 4,096 किलोमीटर में से 2,217 किलोमीटर तक फैली हुई है.

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शुभेंदु ने कहा कि जो नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दायरे में नहीं आते हैं ऐसे लोगों को सीधे बीएसएफ को सौंपा जा रहा है.

उन्होंने कहा कि हालांकि यह कानून देश के अन्य राज्यों में लागू किया गया था, लेकिन पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार ने इसे लागू नहीं किया, और कहा कि अवैध अप्रवासियों को राज्य की जेलों में रखा गया था और उन्होंने करदाताओं के पैसे पर सुविधाओं का लाभ उठाया था.

शुभेंदु अधिकारी ने आगे कहा, 'राज्य के सीमावर्ती जिलों में स्थापित होल्डिंग सेंटर्स से लगभग 4,800 अवैध प्रवासियों को वापस भेज दिया गया है,' उन्होंने आगे कहा कि ऐसे 836 लोग डिपोर्ट किए जाने हैं.

उत्तर 24 परगना जिले के हकीमपुर सीमा पर लोगों की आवाजाही की ओर इशारा करते हुए अधिकारी ने कहा कि कई अवैध अप्रवासी पहले ही अपनी मर्जी से चले गए हैं.

अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली टीएमसी सरकार द्वारा राज्य में जनगणना का काम शुरू नहीं किया गया था, और कहा कि बीजेपी सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है और घर-घर सर्वेक्षण 1 से 15 अगस्त तक होंगे.

मुख्यमंत्री ने कहा, 'जनगणना अगले फरवरी के अंत तक पूरी हो जाएगी और उसी के आधार पर परिसीमन किया जाएगा.'

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