दिल्ली में काकोली घोष ने ममता बनर्जी की 'पार्टी' बिगाड़ दी

ममता बनर्जी दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक में जहां अपनी ताकत दिखा रही थीं, वहां से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर उनकी पार्टी को तोड़ने की मीटिंग चल रही थी. इस मीटिंग में TMC के बागी सांसदों का नेतृत्व कर रही थीं, 40 वर्षों से उनकी सहयोगी रहीं काकोली घोष दस्तीदार.

Advertisement
ममता बनर्जी और काकोली घोष का राजनीतिक सफर 40 वर्षों का है. (Photo: ITG) ममता बनर्जी और काकोली घोष का राजनीतिक सफर 40 वर्षों का है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:31 PM IST

कोलकाता में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में हुई बगावत के बाद पूर्व सीएम ममता बनर्जी 8 जून को दिल्ली में थीं. बंगाल में ममता की पार्टी TMC टूट चुकी थी. ममता दिल्ली में ताकत दिखाकर अपने समर्थकों और प्रतिद्वंदियों दोनों को संदेश देना चाहतीं थी कि पार्टी अभी भी उनके हाथ में लेकिन इस नाजुक मौके पर ममता की एक पुरानी विश्वासपात्र साथी ने बगावत कर दिल्ली में उनकी 'पार्टी' खराब कर दी. 

Advertisement

दरअसल 8 जून को दिल्ली में INDIA ब्लॉक के नेताओं की मीटिंग थी. बंगाल हारने के बावजूद इस मीटिंग में ममता का इंतजार था. INDIA ब्लॉक की मीटिंग में सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के गले मिलने की तस्वीर चर्चा में रही. 

जिस वक्त ममता बनर्जी विपक्षी INDIA गठबंधन के नेताओं के साथ मोदी सरकार को घेरने की रणनीति बनाने में जुटी थी. ठीक उसी वक्त उन्हीं की पार्टी के सांसद बगावत की नई इबारत लिख रहे थे. बड़ी बात ये है कि INDIA गठबंधन की जहां बैठक हो रही थी उससे 1 किलो मीटर दूर पर ममता के 14 बागी सांसदों ने दोपहर में केंद्रीय मंत्री और BJP के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर पर बैठक की. 

इस दौरान सोमवार सुबह TMC के राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा दे चुके सुखेंदु शेखर रे भी मौजूद रहे बंगाल मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी इनसे मिलने पहुंचे. 

Advertisement

इस बैठक में लोकसभा सांसद काकोली घोष, शताब्दी रॉय, अबू ताहिर, अरूप चक्रवर्ती, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, असित मल, कालीपद सोरेन जगदीश बसुनिया और प्रसून बनर्जी मौजूद रहे. 

ये इतेफाक नहीं था कि जब ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी दिल्ली में मौजूद थे उसी मौके पर पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु भी दिल्ली पहुंच गए. 

फिर शुरू हुआ दरवाजों के पीछे की बैठकों का दौर, जोड़-तोड़ और सियासी समीकरणों को बिठाने की कोशिश. 

कोलकाता में विधायकों की बगावत का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी ने किया तो कोलकाता में सांसदों के बगावत की बागडोर बारासात की सांसद और 40 वर्षों से ममता की विश्वसनीय रहीं काकोली घोष दस्तीदार के हाथ में थी. 

काकोली घोष दस्तीदार पेशे से डॉक्टर हैं और तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेताओं में गिनी जाती रही हैं. हाल तक वह लोकसभा में टीएमसी की मुख्य सचेतक भी रह चुकी हैं, लेकिन ममता बनर्जी ने काकोली घोष दस्तीदार के खिलाफ कदम उठाते हुए उन्हें लोकसभा में टीएमसी के मुख्य सचेतक पद से हटा दिया गया था. उनकी जगह वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी को यह जिम्मेदारी दी गई थी. 

दोपहर तक बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर में पहले राउंड की बैठक खत्म हो चुकी थी. इसमें 14 बागी सांसदों के पहुंचने का दावा किया गया. 

Advertisement

शाम 6.30 बजे पार्टी सांसद शताब्दी रॉय के घर एक और बैठक हुई. दावा किया गया कि इसमें 20 बागी सांसद मौजूद थे. इस बैठक में शामिल होने वाले सभी सांसदों के नाम तो सामने नहीं आए लेकिन इसमें अभिषेक बनर्जी के करीबी पार्थ भौमिक का दिखना सबको चौंका गया. 

बैठक के बाद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि लोकसभा में टीएमसी के लगभग 20 सांसदों ने बीजेपी की अगुआई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को समर्थन देने का फैसला किया है और इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी भेज दिया गया है. काकोली ने कहा कि उन्होंने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर लोकसभा में TMC के इस गुट के लिए अलग से सीटिंग अरेंजमेंट की व्यवस्था करने को कहा है. उन्होंने इंडिया टुडे के साथ बातचीत में साफ कहा कि सांसदों का ये गुट NDA में शामिल हो सकता है. 

उन्होंने कहा, "उस तरफ से किसी ने संपर्क करने की कोशिश नहीं की. जब मैं जिला अध्यक्ष थी और चुनाव के नतीजे खराब रहे, तो मैंने व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी ली. मुझे लगा कि शायद मैंने अपना काम ठीक से नहीं किया और मैंने पद छोड़ दिया. उसके बाद भी न तो कोई मुझसे मिला और न ही किसी ने फोन किया; मुझे बस किनारे कर दिया गया. ऐसा लगा जैसे किसी को मुझ पर भौंकने के लिए छोड़ दिया गया हो. मैं 40 साल से ममता बनर्जी के साथ हूं. मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे ऐसा दिन भी देखना पड़ेगा जब वह किसी को मुझे गालियां देने के लिए कहेंगी."

Advertisement

काकोली घोष दस्तीदार ने स्पष्ट कहा कि उनका फैसला पार्टी की चुनावी हार से नहीं जुड़ा है. इंडिया टुडे से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कोलकाता के आरजी कर केस के बाद पार्टी से मेरा मन टूटने लगा था. 

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शासन व्यवस्था काफी बिगड़ गई है. वित्तीय अनियमितताएं, विकास की कमी, कानून-व्यवस्था का पतन और प्रशासन में अत्यधिक राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे मुद्दे लगातार बढ़ते गए. हम पश्चिम बंगाल के विकास और राष्ट्रीय हित में काम करना चाहते हैं.  

बता दें कि काकोली के इस्तीफे से पहले सोमवार को सांसद सुखेंदु शेखर भी पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके थे. 

फिलहाल ममता बनर्जी ने बगावत की खबरों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. लेकिन  ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली में सांसदों को एकजुट रखने के लिए लगातार काम कर रही हैं. हालांकि काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में सामने आई इस नई चुनौती ने यह स्पष्ट कर दिया है कि टीएमसी का आंतरिक संकट अब बंगाल की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक पहुंच चुका है. 
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »