बिना अदालत को बताए विदेश नहीं जा पाएंगे अभिषेक बनर्जी, कलकत्ता हाई कोर्ट का निर्देश

कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को सुरक्षा देते हुए अमित शाह पर टिप्पणी मामले में पुलिस की दंडात्मक कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी.

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अभिषेक बनर्जी को अमित शाह मामले में हाई कोर्ट से राहत मिली है. (File Photo: ITG) अभिषेक बनर्जी को अमित शाह मामले में हाई कोर्ट से राहत मिली है. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • कोलकाता,
  • 21 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:58 PM IST

कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को सिक्योरिटी कवर दिया. पश्चिम बंगाल पुलिस को चुनाव रैलियों के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित टिप्पणियों के संबंध में उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने पर भी रोक लगा दी गई है.

यह सुरक्षा 31 जुलाई तक या जब तक मामले का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक लागू रहेगी. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता यानी अभिषेक बनर्जी बिना पूर्व अनुमति के सफर नहीं कर सकते और किसी भी आवाजाही से पहले जांच अधिकारी को 48 घंटे का नोटिस देना अनिवार्य होगा.

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पिछले हफ्ते, 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित भड़काऊ भाषण देने के मामले में बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक FIR दर्ज की गई थी.

चुनाव नतीजों के 15 दिन बाद हुई FIR

एफआईआर के मुताबिक, यह केस 15 मई को दर्ज किया गया था. यह FIR सामाजिक कार्यकर्ता राजीव सरकार की 5 मई को की गई शिकायत के आधार पर चुनाव नतीजों के ऐलान के ठीक एक दिन बाद दर्ज की गई थी. 

सरकार ने बागूइहाटी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी ने 27 अप्रैल से 3 मई के बीच हुए कई चुनावी कार्यक्रमों के दौरान भड़काऊ बयान दिए. शिकायत में आगे आरोप लगाया गया कि इन भाषणों से दुश्मनी को बढ़ावा मिला, सार्वजनिक शांति भंग हुई और इनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सीधे तौर पर धमकियां भी दी गईं. सरकार ने शिकायत के साथ-साथ कई भाषणों के लिंक भी जमा किए.

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पुलिस ने बताया कि FIR भारतीय न्याय संहिता की धारा 192, 196, 351(2) और 353(1)(c) के तहत दर्ज की गई है. ये धाराएं सार्वजनिक व्यवस्था, दंगा और दुराचार से संबंधित हैं. इसके अलावा, एआईआर में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123(2) और 125 भी शामिल हैं.

शिकायत में कहा गया है कि इन भाषणों में कथित तौर पर ऐसे उकसाने वाले, धमकी भरे और भड़काऊ तत्व शामिल थे, जिनसे सार्वजनिक अव्यवस्था फैल सकती थी और सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता था. पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान विपक्षी कार्यकर्ताओं के खिलाफ आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया. 

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