स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस पर फिर दिया बयान, बोले- देश में लोगों ने पाठ कराना बंद किया

सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने फिर रामचरितमानस का राग छेड़ दिया है. उन्होंने कहा कि लोग अब रामचरितमानस का पाठ नहीं कर रहे हैं. इससे पहले मौर्य ने कहा था कि यह महाकाव्य महिला और दलित विरोधी है. उन्होंने कहा था कि तुलसीदास ने अपनी खुशी के लिए इसे लिखा था. उनके इस बयान के बाद वह बीजेपी के निशाने पर आ गए थे.

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स्वामी प्रसाद मौर्य ने शिवपाल के निर्देश के बाद भी धार्मिक मुद्दे पर दिया बयान (फाइल फोटो) स्वामी प्रसाद मौर्य ने शिवपाल के निर्देश के बाद भी धार्मिक मुद्दे पर दिया बयान (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 15 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 5:46 PM IST

सपा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक बार फिर रामचरितमानस को लेकर टिप्पणी कर दी. उन्होंने अपना एक वीडियो क्लिप ट्वीट किया, जिसमें वह कह रहे हैं कि अब पूरे देश में लोगों ने अपने आप रामचरितमानस का पाठ कराना बंद कर दिया, इसलिए सरकार अपने खर्चे से मानस की पाठ कराने पर मजबूर हो रही है. जो ऐसा कर रहे हैं वे देश की महिलाओं, आदिवासियों, दलितों व पिछड़ों को अपमानित करने की साजिश की जा रही है.

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किसी भी पंथनिरपेक्ष, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक सरकार को किसी धर्म विशेष को बढ़ावा देना संविधान के निर्देशों का उल्लंघन है. उन्होंने पूछा कि जब हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं तो फिर एक ही धर्म को बढ़ावा क्यों? 

स्वामी प्रसाद ने इससे पहले कहा था कि रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि इन चौपाइयों में आपत्तिजनक अंश, जिसमें महिलाओं, आदिवासियों, दलितों व पिछड़ों को सामाजिक, धार्मिक स्तर पर अपमानित होना पड़ता है. स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस बयान के बाद वह बीजेपी के निशाने पर आ गए थे. इतना ही नहीं लखनऊ के हजरतगंज थाने में उनके खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने का केस भी दर्ज करा दिया गया था.

मौर्य ने पीएम मोदी को लिख दिया था पत्र

विवाद बढ़ने के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों को हटाने की मांग कर दी थी. इस पत्र में उन्होंने लिखा था कि भारत का संविधान धर्म की स्वतंत्रता और उसके प्रचार प्रसार की अनुमति देता है. धर्म मानव कल्याण के लिए है. ईश्वर के नाम पर झूठ, पाखंड और अंधविश्वास फैलाना धर्म नहीं हो सकता. 

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उन्होंने लिखा कि क्या कोई धर्म अपने अनुयायियों को अपमानित कर सकता है. क्या धर्म बैर करना सिखाता है. मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं, लेकिन धर्म के नाम पर फैलाई जा रही घृणा और वर्णवादी मानसिकता का विरोध करता हूं. इसलिए हमारी मांग है कि पाखंड और अंधविश्वास फैलाने वाले और हिंसा प्रेरित प्रवचन करने वाले कथावाचकों के सार्वजनिक आयोजनों पर प्रतिबंध लगाया जाए और उन पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाए.

धार्मिक मुद्दों से दूर रहने के दिए हैं निर्देश

रामचरितमानस पर विवाद उठने के बाद सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य को धार्मिक मुद्दों में शामिल न होने के भी निर्देश दिए थे. शिवपाल ने कहा था कि हम धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दों से दूर रहना चाहते हैं. स्वामी प्रसाद मौर्य को इस तरह के धार्मिक मुद्दों से दूर रहने के निर्देश दिया गया है. बीजेपी हमेशा चाहती है कि इस मुद्दे को उठाया जाए. हम भगवान राम के आदर्शों का पालन करते हैं. हम भगवान कृष्ण के वंशज हैं. हमारा देश एक धर्मनिरपेक्ष देश है. हम धर्मनिरपेक्ष हैं. हम बीजेपी की पिच पर खेलना नहीं चाहते. हम समाजवादी लोग हैं.

 

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