'अखिलेश संग फोटो खिंचवाने के 5 हजार और हाथ मिलाने के 10 हजार', राजभर बोले- खुद मुझे सपाइयों ने बताया

ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया के जरिए अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोलते हुए उनके कार्यकर्ताओं से मिलने के नाम पर अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि सपा के सुरक्षा घेरे में फोटो और मुलाकात के लिए मोटी रकम वसूली जा रही है.

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राजभर Vs अखिलेश. (Photo: ITG) राजभर Vs अखिलेश. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • लखनऊ ,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:19 AM IST

यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा मुखिया अखिलेश यादव पर एक बार फिर से हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पत्र लिखकर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ हो रहे कथित 'आर्थिक शोषण' का खुलासा किया है. राजभर ने दावा किया कि खुद को यादव बताने वाले कुछ सपा कार्यकर्ता उनके पास अपनी फरियाद लेकर आए थे. उन्होंने शिकायत की है कि अखिलेश यादव से मिलने और उनके सुरक्षा घेरे को पार करने के लिए हजारों रुपये की अवैध वसूली की जा रही है. राजभर ने इस पत्र के माध्यम से अखिलेश को अपने 'गेट पर रेट' वाले सिस्टम को तुरंत बंद करने की सलाह दी है. 

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राजभर ने पत्र में खुलकर लिखा है कि अखिलेश के यादव कार्यकर्ताओं ने उनसे शिकायत की है. कार्यकर्ताओं के मुताबिक, अखिलेश से फोटो खिंचवाने के 5000 रुपये और हाथ मिलाने के 8000 से 10,000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं. राजभर ने तंज कसते हुए पूछा कि 'धरतीपुत्र के पुत्र' को अपने ही कार्यकर्ताओं से ऐसी वसूली करने की क्या जरूरत आ पड़ी?

राजभर ने अखिलेश यादव की संपत्ति में 900 गुना बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए पूछा कि आखिर इस एक्स्ट्रा इनकम के जुगाड़ की क्या जरूरत है? उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह वसूली बंद नहीं हुई, तो आगामी चुनाव में जनता तो हराएगी ही, खुद प्रताड़ित कार्यकर्ता भी उन्हें हरा देंगे और नेता प्रतिपक्ष बनने लायक सीटें भी नहीं बचेंगी. 

बकौल ओम प्रकाश राजभर- 'आप सोच रहे होंगे कि कार्यकर्ता आपके, वसूली आपकी, घेरा आपका तो उसमें हम क्यों बीच में आ गए. दो वजह से हमें आना पड़ा. एक तो आप हमें भले दुश्मन समझें लेकिन हम आपको अपना मित्र मानते हैं. दूसरा आपके प्रशंसक, आपके कार्यकर्ता अपना दर्द मुझसे कहते हुए बोले कि मंत्री जी, आप इसको कह दीजिए तो शायद हमारा भला हो जाये. उन्होंने कहा कि मंत्री जी, आप बोलेंगे तो अखिलेश भइया जरूर सुनेंगे और समझेंगे. कार्यकर्ता बेचारे गरीब थे तो सोचा आप तक बात पहुंचा दूं. मित्र के रूप में आपको समझा रहा हूं. अपनी मीटिंग का सौदा बंद करवाइए मित्र, वरना बहुत महंगा पड़ सकता है.'

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