शंकराचार्य की जंग में कूदे देशभर के साधु-संत... देवकीनंदन ठाकुर, अनिरुद्धाचार्य और बाबा रामदेव क्या बोले

प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पालकी में गंगा स्नान से रोके जाने के बाद मेला प्रशासन से उनका टकराव बढ़ गया, जिसके बाद समर्थकों और पुलिस में धक्का-मुक्की हुई और शंकराचार्य ने धरना दिया. इस मामले में मेला प्राधिकरण के नोटिस, मुख्यमंत्री योगी के कालनेमि वाले बयान, और संत समाज की तीखी प्रतिक्रियाओं ने विवाद को और गहरा दिया.

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कुछ संत प्रशासन की आलोचना कर रहे हैं तो कुछ संयम की बात कर रहे हैं. (File Photo: ITG) कुछ संत प्रशासन की आलोचना कर रहे हैं तो कुछ संयम की बात कर रहे हैं. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:58 PM IST

प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के मौके पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच टकराव का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. स्नान को लेकर पैदा हुआ यह विवाद अब साधु-संतों, राजनेताओं और सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंच गया है.

मौनी अमावस्या के दिन मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पालकी में बैठकर गंगा स्नान के लिए जाने से रोक दिया. इसके बाद शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई. हालात बिगड़ने पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और धरना दिया. इस पूरे मामले में प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से शंकराचार्य को दो अलग-अलग नोटिस भी जारी किए गए हैं, जिसे लेकर संत समाज में नाराजगी और बढ़ गई है.

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मुख्यमंत्री योगी का बयान

विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान सामने आया. उन्होंने कहा कि एक योगी, संत और सन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता. उसकी कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती, धर्म ही उसकी संपत्ति और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कुछ कालनेमि प्रवृत्ति के लोग धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश कर सकते हैं, ऐसे लोगों से सतर्क रहने की जरूरत है.

दो हिस्सों में बंटा संत समाज

इस घटना के बाद देशभर के साधु-संतों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं. कई संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में खुलकर सामने आए, जबकि कुछ संतों ने संयम और आपसी समझ से मामले को सुलझाने की बात कही.

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि प्रशासन से गलती हुई है. चोटी पकड़कर अपमान किया गया. ब्राह्मणों और साधुओं से माफी मांगने में प्रशासन को क्या दिक्कत है. माफी मांग लेने में कोई बुराई नहीं होती. उन्होंने पूछा कि क्या संविधान किसी को यह अधिकार देता है कि वह किसी के बाल पकड़कर अपमान करे.

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वहीं कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने दोनों पक्षों को अपने लिए समान बताया. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में संयम रखा जाना चाहिए था. उन्होंने यह भी कहा कि भगवा धारण करने वाले संत के साथ मारपीट ठीक नहीं है और इस विवाद को तूल देने के बजाय आपसी तालमेल से सुलझाना चाहिए.

वृंदावन और हरिद्वार में विरोध

मथुरा के वृंदावन में ब्रजभूमि के संत समाज ने मांग की कि शंकराचार्य को सम्मानपूर्वक दोबारा गंगा स्नान कराया जाए. संतों का कहना है कि जो कुछ भी हुआ, उसके लिए कुछ अधिकारी जिम्मेदार हैं. फलाहारी बाबा ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी योगी सरकार को बदनाम करना चाहते हैं और उन्होंने शंकराचार्य का अपमान किया है. वहीं स्वामी अतुल कृष्ण दास महाराज ने दोषी अधिकारियों पर जांच और कार्रवाई की मांग की.

महामंडलेश्वर रामदास महाराज ने कहा कि शंकराचार्य की पीठ भगवान शिव की गद्दी मानी जाती है और उसका अपमान पाप के समान है. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी से दोषियों पर कार्रवाई की अपील की.

हरिद्वार की हर की पौड़ी पर भारत साधु समाज और अखंड परशुराम अखाड़े ने एक घंटे का धरना दिया. अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन माफी नहीं मांगता तो वे अपनी शिखा कटवाने तक का कदम उठा सकते हैं.

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बाबा रामदेव क्या बोले?

योगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि तीर्थ स्थलों पर किसी भी तरह का एजेंडा या अहंकार लेकर नहीं आना चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी शंकराचार्य ही नहीं, बल्कि किसी भी साधु के खिलाफ अभद्र टिप्पणी या व्यवहार अस्वीकार्य है. बाबा रामदेव ने यह भी कहा कि साधु का अर्थ ही अहंकार त्यागना होता है. उन्होंने कहा कि आपसी लड़ाई से सनातन कमजोर होता है, जबकि बाहरी चुनौतियां पहले से मौजूद हैं.

नागपुर में एक धर्मसभा को संबोधित करते हुए पश्चिमाम्नाय द्वारकाशारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन हुई घटना की कड़ी निंदा की.

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य के अपमान से हर सनातनी आहत है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और उसके सहयोगी सनातन परंपरा को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं. वहीं उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि शंकराचार्य अच्छे से स्नान करें और इस विवाद को यहीं समाप्त किया जाए. शिवपाल यादव ने मुख्यमंत्री योगी के कालनेमि वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि जब शंकराचार्य का सम्मान नहीं है तो इसका मतलब सभी संतों का अपमान है.

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