मुलायम-साधना गुप्ता की प्रेम कहानी, कैसे नेताजी ने प्रतीक को स्वीकारा था बेटा?

उत्तर प्रदेश के तीन बार के मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का बुधवार अचानक निधन हो गया. प्रतीक मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे. अस्सी के दशक में मुलायम और साधना के बीच प्रेम परवान चढ़ा, लेकिन उसे नेताजी ने जमाने के सामने 2007 में स्वीकारा.

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मुलायम सिंह यादव और साधना गुप्ता के साथ प्रतीक यादव (Photo-ITG) मुलायम सिंह यादव और साधना गुप्ता के साथ प्रतीक यादव (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 13 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:37 AM IST

उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे ताकतवर परिवारों में से एक, सैफई परिवार के लिए बुधवार का दिन एक अपूरणीय क्षति लेकर आया है. सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का लखनऊ में निधन हो गया. राजनीति से दूर रहने वाले प्रतीक यादव  मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे. 

प्रतीक यादव की बुधवार सुबह अचानक तबीयत खराब होने पर लखनऊ के सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया है. प्रतीक यादव बीजेपी नेता और महिला आयोग की अध्यक्ष अपर्णा यादव के पति थे. 

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मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे प्रतीक यादव सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सौतेले भाई थे. प्रतीक यादव ने खुद को सियासी गलियारों से दूर रखा और अपनी एक अलग दुनिया बसाई, लेकिन अब उस दुनिया को छोड़ गए. प्रतीक यादव के निधन के साथ ही मुलायम सिंह यादव और साधना गुप्ता की उस चर्चित प्रेम कहानी का आखिरी जीवंत अध्याय भी थम गया. 

मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी के बेटे प्रतीक
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने दो शादियां की थीं. मुलायम की पहली पत्नी का नाम मालती देवी था. सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मालती देवी के ही बेटे हैं. मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता थीं, जिनके बेटे प्रतीक यादव थे. 

साधना गुप्ता की मुलायम सिंह के साथ दूसरी शादी है उनकी पहली शादी जूलाई 1986 में फर्रूखाबाद के चंद्रप्रकाश गुप्ता के साथ हुई थी.  शादी के बाद साधना ने बेटे प्रतीक जो जन्म दिया था. हालांकि उनकी शादी बहुत ज्यादा दिन नहीं टिक सकी और दोनों अलग हो गए.चंद्रप्रकाश से अलग होने के बाद साधना गुप्ता पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव के संपर्क में आई, जिसके बाद उनमें प्रेम हुआ और फिर शादी के बंधन में बंध गए.

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साधना गुप्ता और मुलायम सिंह की प्रेम कहानी
मुलायम सिंह और साधना गुप्ता की पहली मुलाकात अस्सी के दशक में थी, उस समय मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक उभरते हुए सितारे थे. साधना गुप्ता समाजवादी पार्टी की एक कार्यकर्ता थीं और वो उम्र में मुलायम सिंह से लगभग 20 साल छोटी थीं. 

साधना गुप्ता बेहद खूबसूरत थीं और उनकी तीक्ष्ण बुद्धि ने मुलायम सिंह को प्रभावित किया. ये प्रेम कहानी तब परवान चढ़ी जब मुलायम सिंह की मां मूर्ति देवी बीमार थीं. मुलायम सिंह ने अपनी मां को इलाज के लिए लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया, जहां साधना गुप्ता ने मूर्ती देवी की दिन-रात सेवा की. 

अस्पताल में एक नर्स जब मूर्ती देवी को इंजेक्शन लगाने में गलती कर रही थी, तब ही साधना गुप्ता ने उसे टोका. इस समर्पण ने मुलायम सिंह के दिल में साधना के लिए सम्मान और प्रेम को और गहरा कर दिया. साधना गुप्ता ने एक बेटी की तरह मूर्ती देवी की सेवा की, जिसे देखकर ही मुलायम सिंह उन्हें दिल दे बैठे, लेकिन उस समय मुलायम सिंह यादव विवाहित थे. इसके बाद भी मुलायम सिंह और साधना गुप्ता के प्रेम के किस्से चर्चा का विषय बन गए थे. 

मुलायम सिंह ने साधना के रिश्ते को छुपाए रखा
मुलायम सिंह यादव ने साधना गुप्ता के साथ अपने रिश्ते को लोगों से काफी दिन तक छुपाए नहीं रखा. राजनीतिक हलकों में दबी जुबान में चर्चाएं तो थीं, लेकिन मुलायम सिंह ने इस रिश्ते को कभी सार्वजनिक नहीं किया. मुलायम सिंह यादव अपनी पहली पत्नी मालती देवी और बेटे अखिलेश यादव के प्रति अपनी जिम्मेदारियों और अपनी राजनीतिक छवि को लेकर बहुत सतर्क थे. 

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साधना गुप्ता लंबे समय तक नेपथ्य में रहीं, लेकिन समाजवादी कुनबे के भीतर उनकी मौजूदगी को महसूस किया जाने लगा था. साधना गुप्ता सालों तक लखनऊ के एक बंगले में गुमनामी में रहीं, ताकि मुलायम सिंह की राजनीतिक छवि और अखिलेश यादव के भविष्य पर कोई आंच न आए. प्रतीक यादव के स्कूल फॉर्म पर पिता का नाम एमएस यादव और पते में मुलायम सिंह के ऑफिस का पता दिया रहता था.

परिवारिक तनाव के बाद भी मुलायम की शादी
मुलायम का साधना के प्रति प्रेम इतना गहरा था कि उन्होंने विरोध के बावजूद इस रिश्ते को खत्म नहीं होने दिया. जैसे-जैसे समय बीता, मुलायम सिंह के जीवन में साधना गुप्ता का प्रभाव बढ़ता गया. इस प्रेम में कहानी का सबसे बड़ी बाधा 'पारिवारिक स्वीकृति' थी. यही वजह थी कि तमाम चर्चा के बाद भी मुलायम सिंह ने इस रिश्ते को दुनिया से छिपाए रखा. 

अखिलेश यादव अपनी मां मालती देवी के प्रति समर्पित थे और वे साधना गुप्ता के साथ अपने पिता के संबंधों के सख्त खिलाफ थे. सालों तक समाजवादी पार्टी के भीतर एक अघोषित युद्ध चलता रहा. ऐसे में 2003 में मुलायम सिंह की पहली पत्नी मालती देवी का निधन हो गया, इसके बाद साधना गुप्ता को घर में स्थान देने की मांग तेज होने लगी. अखिलेश यादव अब भी तैयार नहीं थे.

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मामला तब और पेचीदा हो गया जब अमर सिंह ने इस रिश्ते को आधिकारिक पहचान दिलाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई. अमर सिंह के हस्तक्षेप और कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए मुलायम सिंह यादव ने स्वीकार किया. साल 2007 में एक अदालती हलफनामे के माध्यम से मुलायम सिंह ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि साधना गुप्ता उनकी दूसरी पत्नी हैं. इसके अलावा प्रतीक यादव उनके बेटे हैं. 

यह वह क्षण था जब सालों से चल रहा 'सीक्रेट' एक आधिकारिक हकीकत बन गया. ये साधना गुप्ता की कई सालों की तपस्या की जीत थी और उन्हें अंततः 'नेताजी' के परिवार की छोटी बहू का दर्जा मिला. मुलायम सिंह और साधना गुप्ता की शादी कोई सामान्य विवाह नहीं था, बल्कि दो अलग-अलग व्यक्तित्वों का एक ऐसा मेल था, जिसने सैफई परिवार की पूरी संरचना को बदल दिया.

साधना गुप्ता का प्रभाव और अंत कैसे हुआ
साधना गुप्ता ने कभी सक्रिय राजनीति में नहीं आईं, लेकिन कहा जाता है कि मुलायम सिंह के हर बड़े फैसले के पीछे उनकी राय शामिल होती थी, उनके बेटे प्रतीक यादव ने राजनीति के बजाय बिजनेस को चुना, लेकिन उनकी बहू अपर्णा यादव ने जरूर राजनीति में कदम रखा.

जुलाई 2022 में साधना गुप्ता का बीमारी के कारण निधन हो गया और इसके तीन महीनों के बाद अक्टूबर 2022 में मुलायम सिंह यादव ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया. माता-पिता के जाने के बाद प्रतीक यादव काफी अकेले पड़ गए थे,हालांकि वे अपने काम में व्यस्त रहने की कोशिश करते थे. 

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आज प्रतीक यादव के जाने से वह कड़ी टूट गई है जो मुलायम सिंह यादव के 'दूसरे परिवार' का प्रतिनिधित्व करती थी. लखनऊ की गलियों में अपनी नीली लैम्बोर्गिनी के साथ घूमने वाला वह मुस्कुराता हुआ चेहरा अब हमेशा के लिए खामोश हो गया है. प्रतीक यादव उस प्रेम का प्रतीक थे, आज उनके निधन पर न केवल सैफई परिवार, बल्कि लखनऊ समाजवादी पार्टी को दुखी कर गया है. 

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