मां को ब्रेन हैमरेज, पिता को कैंसर, बेटा गैस सिलेंडर लेने शाहजहांपुर से 200 KM दूर पहुंचा बाराबंकी

बाराबंकी में गैस सिलेंडर की किल्लत ने आम जनता को बेहाल कर दिया है. शाहजहांपुर में माली का काम करने वाले अरुण कुमार अपने कैंसर पीड़ित पिता और ब्रेन हेमरेज से जूझ रही मां के लिए खाना पकाने के इंतजाम में 200 किलोमीटर दूर गांव पहुंचे और कड़ाके की रात में गैस एजेंसी के बाहर लाइन में लग गए.

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गैस एजेंसी के बाहर लाइन में खड़े अमित (Photo- Screengrab) गैस एजेंसी के बाहर लाइन में खड़े अमित (Photo- Screengrab)

सैयद रेहान मुस्तफ़ा

  • बाराबंकी ,
  • 19 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST

यूपी के बाराबंकी निवासी अरुण कुमार बुधवार सुबह 3 बजे से अमित गैस एजेंसी के बाहर लाइन में खड़े मिले. शाहजहांपुर में माली का काम करने वाले अरुण करीब 200 किलोमीटर का सफर तय कर अपने पैतृक गांव बरेठी पहुंचे, ताकि बीमार माता-पिता के लिए रसोई गैस का इंतजाम कर सकें. उनके पिता कैंसर और मां ब्रेन हेमरेज जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं. घर में सिलेंडर खत्म होने से खाना बनना बंद हो गया था. बुकिंग के चार-पांच दिन बाद भी सिलेंडर न मिलने पर वह रात 2 बजे घर से निकले और 8 किलोमीटर पैदल चलकर सुबह होने से पहले ही एजेंसी पहुंच गए.

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बीमार माता-पिता और बंद चूल्हा

अरुण की मजबूरी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि घर के दोनों मुखिया बिस्तर पर हैं. मां को ब्रेन हेमरेज हुआ है और पिता कैंसर से लड़ रहे हैं. शाहजहांपुर में रहकर मजदूरी करने वाले अरुण को जब पता चला कि घर में चूल्हा जलना बंद हो गया है, तो वह सब काम छोड़कर गांव भागे. 

उन्होंने बताया कि सिलेंडर की कीमतें और किल्लत इतनी बढ़ गई है कि गरीब आदमी के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी अब एक बड़ी चुनौती बन गया है. अमित का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. 

रात 3 बजे से एजेंसी के बाहर पहरा

गैस एजेंसी सुबह 10 बजे खुलती है, लेकिन अरुण जैसे दर्जनों लोग रात 3 बजे से ही कतार में लग जाते हैं. अरुण को डर था कि अगर वह देर से पहुंचे तो शायद उनका नंबर ही न आए. उन्होंने चार-पांच दिन पहले बुकिंग कराई थी, लेकिन अब तक उन्हें खाली हाथ ही रहना पड़ा. एजेंसी के बाहर लगी लंबी लाइनें इस संकट की गवाही दे रही हैं.  

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