झांसी में बैंकिंग धोखाधड़ी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के परिवार से जुड़े व्यवसायी के खाते से 40 लाख रुपये की रकम फर्जीवाड़े के जरिए दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दी गई. हालांकि झांसी पुलिस की त्वरित कार्रवाई, बैंक अधिकारियों की सजगता और तकनीकी जांच के चलते महज 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया तथा लगभग पूरी धनराशि को सुरक्षित करा लिया गया.
थाना नवाबाद पुलिस ने पश्चिम बंगाल निवासी अंतरराज्यीय ठग समीर सामन्थ को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से नकदी, सोने के आभूषण, मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड, चेकबुक और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की है. पुलिस ने आरोपी के विभिन्न खातों में मौजूद लगभग 37 लाख रुपये की शेष रकम भी फ्रीज करा दी है.
ऐसे हुआ 40 लाख रुपये के 'फर्जीवाड़े' का खुलासा
पीड़ित तुषार सिंह ने बताया कि उनका झांसी के रक्सा क्षेत्र में पेट्रोल पंप है और वे नियमित रूप से तेल कंपनियों को भुगतान करने के लिए बैंक के माध्यम से RTGS करते हैं. 2 जून को उन्होंने 40 लाख रुपये का चेक, RTGS फॉर्म और PPS फॉर्म बैंक में जमा कराया था ताकि भारत पेट्रोलियम को भुगतान किया जा सके.
लेकिन अगले दिन जब उन्होंने भुगतान की स्थिति की जानकारी ली तो पता चला कि न तो रकम भारत पेट्रोलियम के खाते में पहुंची और न ही लेनदेन सही तरीके से हुआ. बैंक में जांच करने पर खुलासा हुआ कि उनके मूल RTGS फॉर्म की जगह किसी अन्य व्यक्ति 'सुकुमुंडी' के नाम का फॉर्म लगा हुआ था.
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि हस्ताक्षर बिल्कुल उनके जैसे दिखाई दे रहे थे. तुषार सिंह के अनुसार, बाद में पता चला कि आरोपी ने उनके असली दस्तावेज से हस्ताक्षर वाला हिस्सा काटकर दूसरे फॉर्म पर चिपका दिया था और उसी आधार पर रकम अपने खाते में ट्रांसफर करा ली थी.
झांसी रेलवे स्टेशन के पास से दबोचा गया ठग
घटना की सूचना मिलते ही थाना नवाबाद पुलिस हरकत में आई. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में टीम गठित कर जांच शुरू की गई. तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर आरोपी समीर सामन्थ को झांसी रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने जो खुलासे किए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं. उसने स्वीकार किया कि वह देश के विभिन्न शहरों में घूम-घूमकर बैंकों की रेकी करता था. बैंक कर्मचारियों की नजर बचाकर ग्राहकों के चेक और RTGS/NEFT फॉर्म बदल देता था और बाद में फर्जी हस्ताक्षर करके रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा लेता था.
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने 'सुकुमण्डी' नाम से बैंकों में करीब 8 खाते खुलवा रखे थे. इन खातों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संचालित किया जा रहा था. रकम ट्रांसफर होने के बाद वह उसे UPI, फोन बैंकिंग और अन्य माध्यमों से अलग-अलग खातों में भेज देता था ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके.
फर्जी खातों का जाल और गहनों की खरीदारी
आरोपी ने स्वीकार किया कि झांसी में हुई 40 लाख रुपये की धोखाधड़ी की रकम से उसने शहर के प्रतिष्ठित आभूषण प्रतिष्ठानों से सोने के गहने भी खरीदे थे. पुलिस ने मालाबार ज्वैलर्स और कल्याण ज्वैलर्स से खरीदे गए आभूषण बरामद कर लिए हैं.
वहीं, एसपी सिटी प्रीति सिंह ने बताया कि पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह 31 मई को झांसी आया था और कई बैंक शाखाओं की रेकी कर चुका था. इसी दौरान उसने ग्वालियर रोड स्थित बैंक शाखा से ग्राहकों के दस्तावेज हासिल किए थे. पुलिस के अनुसार आरोपी के निशाने पर अन्य खाताधारक भी थे और वह आगे भी इसी प्रकार की घटनाओं को अंजाम देने की तैयारी में था.
आरोपी के पास से क्या-क्या हुआ बरामद?
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 94 हजार 100 रुपये नकद, तीन सोने की अंगूठियां, एक सोने का लॉकेट, 12 भरे हुए चेक, पांच डेबिट कार्ड, एक पैन कार्ड, दो एंड्रॉयड मोबाइल, एक की-पैड मोबाइल समेत तीन सिम कार्ड बरामद किए हैं.
बैंक अधिकारी प्रियंका और झांसी पुलिस की तारीफ
पीड़ित तुषार सिंह ने बताया कि बैंक की अधिकारी प्रियंका द्वारा समय रहते कार्रवाई करते हुए संबंधित खातों को होल्ड कराने और रकम सुरक्षित कराने में अहम भूमिका निभाई गई. इसी कारण बड़ी धनराशि को वापस सुरक्षित किया जा सका.
इस पूरे मामले में झांसी पुलिस की कार्रवाई की व्यापक सराहना हो रही है. महज एक दिन के भीतर आरोपी की गिरफ्तारी, करोड़ों रुपये के संभावित नुकसान को रोकना और अधिकांश रकम को सुरक्षित कराना पुलिस की पेशेवर कार्यशैली का उदाहरण माना जा रहा है.
फिलहाल आरोपी को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया है. पुलिस उसके अन्य बैंक खातों, संभावित सहयोगियों और देश के कई राज्यों में की गई समान घटनाओं की भी जांच कर रही है.
अजय झा