Iran-Israel War: बाराबंकी, अमेठी, बांदा और चंदौली... यूपी के इन जिलों के लोग खाड़ी देशों में फंसे; मिडिल ईस्ट में तबाही से खौफ में परिवार

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी भीषण जंग ने उत्तर प्रदेश के कई परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है. चंदौली से लेकर झांसी और अंबेडकरनगर तक के सैकड़ों लोग खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं. परिजनों ने अब प्रधानमंत्री मोदी से अपनों की सुरक्षित वतन वापसी के लिए गुहार लगाई है.

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विदेश में फंसे परिजनों से वीडियो कॉल पर बात करते घरवाले (Photo- ITG) विदेश में फंसे परिजनों से वीडियो कॉल पर बात करते घरवाले (Photo- ITG)

उदय गुप्ता

  • लखनऊ ,
  • 03 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:02 PM IST

मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के कारण उत्तर प्रदेश के चंदौली, अंबेडकरनगर, झांसी, बाराबंकी, अलीगढ़, सिद्धार्थनगर, अमेठी, उन्नाव और बांदा जिलों के सैकड़ों नागरिक विदेश में फंस गए हैं. ये लोग रोजी-रोटी, पढ़ाई, बिजनेस ट्रिप और प्री-वेडिंग शूट के लिए ईरान, इजरायल, दुबई (UAE), बहरीन और कुवैत जैसे देशों में गए थे. युद्ध शुरू होने और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द होने के कारण ये सभी वहीं फंसे रह गए हैं. 

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भारत में मौजूद इनके परिजन वीडियो कॉल के जरिए संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कई इलाकों में इंटरनेट बंद होने से संपर्क टूट गया है. पीड़ित परिवारों ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप कर सभी भारतीयों को सुरक्षित निकालने की अपील की है.

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दुबई में फंसा चंदौली का प्री-वेडिंग शूट कपल

चंदौली के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के रहने वाले प्रिंस जैन की अप्रैल में शादी होनी है. प्रिंस अपनी मंगेतर, छोटे भाई और मंगेतर के भाई-भाभी के साथ प्री-वेडिंग शूट के लिए दुबई गए थे. उन्हें 2 मार्च को वापस लौटना था, लेकिन युद्ध की स्थिति और फ्लाइट्स रद्द होने के कारण वे बुर्ज खलीफा के पास एक होटल में फंस गए हैं. प्रिंस के पिता अजय जैन काफी चिंतित हैं और सरकार से बच्चों की सलामती की मांग कर रहे हैं.

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अंबेडकरनगर और झांसी के परिवारों में मातम

अंबेडकरनगर के अब्दुल्लापुर मोहल्ले के एतबार हुसैन के परिवार के पांच सदस्य ईरान में फंसे हैं. इंटरनेट बंद होने के कारण उनसे बात नहीं हो पा रही है, जिससे एतबार हुसैन फफक कर रो पड़ते हैं. वहीं, झांसी के नकी असगरी पिछले 10 साल से ईरान में मौलवी की शिक्षा ले रहे हैं. वे अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ वहां हैं. पिछले कई दिनों से उनसे संपर्क न होने के कारण झांसी में उनका परिवार अनहोनी की आशंका से डरा हुआ है.

ईरान पर यूएस-इजरायल के हमले के बाद के हालात (Photo: Reuters)

ईरान में फंसे बाराबंकी के दर्जनों इस्लामिक स्कॉलर

बाराबंकी जिले के करीब तीन दर्जन से ज्यादा लोग ईरान के कुम शहर और अन्य इलाकों में फंसे हैं. इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जो दीनी तालीम हासिल करने या जियारत के लिए वहां गए थे. आलमपुर और जैदपुर थाना क्षेत्र के कई परिवारों का संपर्क अपनों से टूट चुका है. मौलाना जौहर अब्बास और मौलाना जफर अब्बास जैसे कई स्कॉलर्स के परिजन अपनों की सलामती के लिए दिन-रात दुआएं मांग रहे हैं.

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इजरायल और यूएई में मिसाइल अटैक का खौफ

सिद्धार्थनगर के शिवा सिंह इजरायल में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने वीडियो भेजकर बताया कि सायरन बजते ही उन्हें बंकरों में भागना पड़ता है. बीते दिनों उनके पास 300 मिसाइलें गिरीं. वहीं अलीगढ़ के सलमान शाहिद की बहन यूएई में रहती हैं, जिनके घर के पास हाल ही में मिसाइल गिरने से परिवार दहशत में है. हालांकि इजरायल में मौजूद शिवा वहां के डिफेंस सिस्टम से संतुष्ट हैं, लेकिन घरवाले उनकी वापसी चाहते हैं.

अमेठी के रिसर्चर्स और बांदा के छात्र की पीड़ा

अमेठी के भनौली गांव के आधा दर्जन बच्चे ईरान में रहकर रिसर्च और पढ़ाई कर रहे हैं, जिनसे परिजनों का संपर्क टूट गया है. वहीं, बांदा के सुदर्शन होटल मैनेजमेंट की इंटर्नशिप के लिए बहरीन गए थे. सुदर्शन की मां प्रियंका ने बताया कि बेटा डरा हुआ है और मिसाइल हमलों से घबरा जाता है. बांदा और अमेठी के परिवारों ने जिला प्रशासन को पूरी डिटेल भेजकर भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है.

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उन्नाव के लोग दुबई एयरपोर्ट पर अटके

उन्नाव के रहने वाले राजकुमार, उनके दामाद और साले दुबई में फंसे हैं. उनकी कंपनी ने उन्हें घरों में रहने और एंबेसी के संपर्क में रहने का अलर्ट जारी किया है. परिजनों के अनुसार, दुबई एयरपोर्ट पर भारी भीड़ है और लोगों के निकलने की कोई व्यवस्था नहीं है. कुवैत में भी यूपी के कई परिवारों के बच्चे फंसे हुए हैं, जो युद्ध की इस विभीषिका के बीच किसी तरह वतन वापसी का रास्ता तलाश रहे हैं.

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धमाकों के बाद दुबई एयरपोर्ट को पहुंचा नुकसान (Photo: Reuters)

बरेली के शहर काजी सऊदी में फंसे 

बरेली के शहर काजी मौलाना अमजद रजा खान ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देश में फंसे हुए हैं. काजी साहब 23 फरवरी को इबादत के लिए मक्का शरीफ गए थे, जहां उनके साथ उनके बच्चे और अन्य रिश्तेदार भी मौजूद हैं. इंटरनेशनल फ्लाइट्स रद्द होने की वजह से उनकी 4 तारीख की वापसी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. उनके परिजनों और मुरीदों में दहशत का माहौल बना हुआ है.

सरकार से सुरक्षित कॉरिडोर की मांग

सभी प्रभावित जिलों के परिजनों की केवल एक ही मांग है कि भारत सरकार युद्ध रोकने का प्रयास करे या कम से कम भारतीयों के लिए एक सुरक्षित कॉरिडोर बनाकर उन्हें वापस लाए. खाड़ी देशों में रहने वाले करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा अब एक बड़ी चिंता बन गई है. इंटरनेट की पाबंदी और मिसाइल हमलों के बीच फंसे इन लोगों के लिए अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं.

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इनपुट- अभिषेक त्रिपाठी, सिद्धार्थ गुप्ता, अनिल तिवारी, सूरज सिंह, रेहान मुस्तफा, केके पांडेय, अकरम खान, प्रमोद गौतम, कृष्ण गोपाल राज

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