अपहरण की झूठी कहानी से खुला इंटरनेशनल सट्टा रैकेट, ग्रेटर नोएडा में 8 गिरफ्तार

ग्रेटर नोएडा में फर्जी अपहरण की जांच के दौरान पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सट्टा गिरोह का पर्दाफाश किया है. कासना थाना और स्वाट टीम ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो RUDRA CRIC LIVE ऐप के जरिए क्रिकेट सट्टा चला रहे थे. आरोपी थाईलैंड-दुबई से संचालित नेटवर्क से जुड़े थे. गिरोह की रोजाना की कमाई 30 लाख थी. पुलिस मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है.

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी. पुलिस की गिरफ्त में आरोपी.

अरुण त्यागी

  • ग्रेटर नोएडा,
  • 15 जून 2025,
  • अपडेटेड 7:18 PM IST

ग्रेटर नोएडा में कासना थाना पुलिस और स्वाट टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल की है. एक फर्जी अपहरण की सूचना की जांच करते हुए पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सट्टा गिरोह का भंडाफोड़ किया है. इस गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है. इनके पास से चार लैपटॉप, 26 मोबाइल, 16 सिम कार्ड, फर्जी आधार कार्ड, पासपोर्ट, पासबुक, चेकबुक और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं.

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दरअसल, मामला 12 जून को सामने आया जब राजस्थान के अलवर निवासी सुभाष चंद्र ने कासना पुलिस को सूचना दी कि उनके बेटे भीम सिंह (22) और भतीजे नारायण (25) का नोएडा में अपहरण हो गया है और अपहरणकर्ताओं ने 7 लाख रुपये की फिरौती मांगी है. मामला गंभीर होने के चलते डीसीपी ग्रेटर नोएडा शाद मियां खान के निर्देश पर पुलिस और स्वाट टीम ने जांच शुरू की.

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इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मैन्युअल इंटेलिजेंस के जरिए पुलिस ने भीम सिंह की लोकेशन ट्रेस की, जो गौर सिटी के व्हाइट ऑर्किड अपार्टमेंट में पाई गई. वहां से पुलिस ने ध्रुव, मुकीम, विशाल और सन्नी नामक चार युवकों को पकड़ा. पूछताछ में पता चला कि सभी युवक RUDRA CRIC LIVE नामक प्रतिबंधित मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा चला रहे थे.

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जीत-हार पर लगवाए जाते थे दांव

इसके बाद पुलिस ने राधा स्काई गार्डन और एक अन्य स्थान पर भी दबिश दी, जहां से भीम सिंह, नारायण, हिमांशु और सुखदेव को गिरफ्तार किया गया. जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह गिरोह थाईलैंड और दुबई में बैठे सरगनाओं के इशारे पर काम करता था. सट्टेबाजी के लिए ग्राहकों को व्हाट्सएप के माध्यम से आईडी दी जाती थी और फिर ऐप पर लाइव ओवर, रन, विकेट और जीत-हार पर दांव लगवाए जाते थे.

गिरोह की दैनिक आमदनी लगभग 30 लाख रुपये बताई गई है, जो फर्जी बैंक खातों के जरिए विदेशी खातों में ट्रांसफर होती थी. पूछताछ में भीम सिंह ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि अपहरण की झूठी कहानी खुद उसने गढ़ी थी ताकि वह अपने पिता से फिरौती के नाम पर पैसे ले सके.
 
अब ग्रेटर नोएडा पुलिस इस गिरोह के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और डिजिटल लेन-देन के पहलुओं की भी जांच कर रही है. जिन खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं, उन्हें फ्रीज किया जा रहा है. साथ ही, जिन सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स ने इस ऐप का प्रचार किया था, उन्हें नोटिस भेजने की तैयारी भी की जा रही है.

मामले में DCP ने कही ये बात

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डीसीपी ग्रेटर नोएडा शाद मियां खान ने बताया, 12 जून को अपहरण की सूचना मिली थी. जांच में पाया गया कि यह एक झूठी कहानी थी, जिसे सट्टा गिरोह ने रचा था. गिरोह का संचालन थाईलैंड और दुबई से हो रहा था. 8 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं. बड़ी मात्रा में मोबाइल, लैपटॉप, सिम कार्ड और फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं. बैंक खातों को फ्रीज किया जा रहा है और सोशल मीडिया प्रमोटर्स को नोटिस भेजे जाएंगे.

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