Basti: 8 सालों से फर्जी नंबर प्लेट और RC के साथ चला रहा था कार, ऐसे हुआ खुलासा

बस्ती से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां एक शख्स को शोरूम मालिक ने फर्जी नंबर प्लेट और आरसी के साथ कार बेची. पीड़ित को आठ साल बाद इसका पता चला जब वह RTO ऑफिस में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए आवेदन किया. जहां उसे बताया गया कि उसकी कार की नंबर प्लेट फर्जी है.

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8 साल बाद पता चला कि कार की नंबर प्लेट और आरसी फर्जी है 8 साल बाद पता चला कि कार की नंबर प्लेट और आरसी फर्जी है

संतोष सिंह

  • बस्ती ,
  • 27 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 2:47 PM IST

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां एक शख्स पिछले 8 सालों से जिस कार को चला रहा था उसके पेपर और नंबर प्लेट फर्जी निकले. इतना ही नहीं पीड़ित लगातार कार का इंश्योरेंस भी करवा रहा था. एक्सीडेंट के बाद इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम भी ले चुका था. बावजूद इसके किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी. 

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ऐसे हुआ फर्जी नंबर प्लेट का खुलासा--

यह मामला उस समय सामने आया जब सितंबर 2022 में कार के मालिक ने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए आवेदन किया. आरटीओ विभाग में यह आवेदन पहुंचा तो वहां से चौंकाने वाली बात सामने आई और कार मालिक को यह बताया गया कि कार की नंबर प्लेट फर्जी है. यह सुनकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. यानि 8 साल वह फर्जी रजिस्ट्रेशन पेपर लेकर कार चला रहा था और इसकी भनक तक किसी को नहीं लगी.  

कार मालिक मनीष मिश्रा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2014 में गोरखपुर के एक कार शोरूम से कार खरीदी थी. इसके बाद उन्होंने रजिस्ट्रेशन पेपर के लिए भारी भरकम शुल्क भी जमा किया. लेकिन उन्हें फर्जी आरसी पेपर दे दिए गए.

मनीष ने बताया कि उन्हें जो रजिस्ट्रेशन पेपर मिला था उसके अनुसार UP 51 AA 6262 दिया गया.  उसे पूरा भरोसा था कि शोरूम मालिक से फर्जी पेपर नहीं मिलेंगे. लेकिन उनके साथ बहुत बड़ा धोखा किया गया.  इस नंबर प्लेट को लगाकर वह अपनी कार को 8 साल से चला रहे हैं और इंश्योरेंस कंपनी से इसका क्लेम भी लिया और हर साल इंश्योरेंस का रिन्यूअल भी करवाया.

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पीड़ित ने बताया कि अगर सिक्योरटी नंबर प्लेट का पोर्टल शुरू ना किया गया होता तो उन्हें कभी भी शोरूम मालिक और RTO विभाग की मिली भगत का पता ही नहीं चलता. ऐसे में अगर कोई बड़ा हादसा हो जाता तो उन्हें जेल जाना पड़ता 

इस मामले पर अपर पुलिस अधीक्षक दीपेंद्रनाथ चौधरी ने बताया कि वादी पक्ष ने एक तहरीर दी थी कि कुछ समय पहले उन्होंने कार ली थी. जब उन्होंने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए आवेदन किया तो आरसी और कार के अन्य पेपर फर्जी निकले. शिकायत के आधार पर तत्कालीन एआरटीओ और बाबू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की विवेचना जारी है. 

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