Uttar Pradesh News: जिला प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने इटावा सफारी पार्क के पीछे वन भूमि पर अवैध रूप से बनी 'बीहड़ वाले सैयद बाबा' की मजार को बुलडोजर चलाकर पूरी तरह ध्वस्त कर दिया. तीन महीने तक चली लंबी कानूनी सुनवाई के दौरान मजार के केयरटेकर फजले इलाही और उनके सहयोगी जमीन के मालिकाना हक के जरूरी दस्तावेज पेश करने में पूरी तरह असमर्थ रहे. इसके बाद विशेष वन विभाग की कोर्ट से जारी आदेश के अनुपालन में अधिकारियों ने मीडिया की नजरों से दूर रहकर गुप्त तरीके से इस पूरी कार्रवाई को शांतिपूर्ण ढंग से अंजाम दिया. मलबा हटाने के तुरंत बाद वन विभाग ने उस विवादित जमीन पर सैकड़ों पौधे रोपित कर बड़े पेड़ों का वृक्षारोपण भी कर दिया.
रात के अंधेरे में गुपचुप एक्शन, मीडिया को रखा गया दूर
इटावा सफारी पार्क के पीछे बीहड़ में स्थित इस मजार को हटाने के लिए प्रशासन ने बेहद गुप्त रणनीति अपनाई. रात के अंधेरे में कड़ी सुरक्षा के घेरे में सबसे पहले वहां मौजूद अवशेष और पूजा-अर्चना की सामग्रियों को हटाया गया.
जिला प्रशासन और वन विभाग ने इस संयुक्त कार्रवाई को मीडिया की नजरों से पूरी तरह दूर रखा. बुलडोजर चलाकर वहां बने कमरों और मजार के ढांचे को जमींदोज कर दिया गया और सुबह होने तक मलबे को भी मौके से गायब कर दिया गया.
3 महीने की सुनवाई में दस्तावेज नहीं दिखा पाए मजार के केयरटेकर
बढ़पुरा वन रेंज के रेंजर अशोक शर्मा ने पूर्व में बताया था कि वन भूमि पर अनधिकृत तरीके से बनी इस मजार के केयरटेकर को विभाग की तरफ से बकायदा नोटिस जारी किया गया था. उनसे जमीन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था. लगातार तीन महीने तक चली कई तारीखों की सुनवाई के बाद भी केयरटेकर फजले इलाही और उनके सहयोगी कोई भी वैध कागज नहीं दिखा सके. इसके बाद कोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई हुई.
मलबे की जगह अब लहलहाएंगे पेड़, अधिकारी साधे हैं चुप्पी
मजार के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पूरी होते ही वन विभाग की टीम ने उस खाली हुई जगह को अपने कब्जे में ले लिया. रात में ही वहां पर त्वरित कार्रवाई करते हुए बड़े पेड़ लगा दिए गए और साथ ही सैकड़ो की संख्या में नए पौधे भी रोपित कर दिए गए. हालांकि, इस बड़ी कार्रवाई के संपन्न होने के बाद जिला प्रशासन और वन विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कैमरे के सामने कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है.
अमित तिवारी