'मेरे सामने बैठा लड़का चीखा, कोच में धूल भर गई फिर...', चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के पीड़ित की आपबीती

स्लीपर कोच में यात्रा कर रहे संदीप कुमार ने कहा कि मुझे याद है कि मेरे सामने बर्थ पर बैठा एक लड़का जोर से चीखा. एक पल के लिए कोच में धूल भर गई और चारों तरफ अंधेरा छा गया. मुझे याद नहीं कि अगले कुछ सेकंड में क्या हुआ. बता दें कि लखनऊ से करीब 150 किलोमीटर दूर गोंडा के पास मोतीगंज इलाके में गुरुवार को चंडीगढ़- डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के कई डिब्बे पटरी से उतर गए, जिसमें 2 यात्रियों की मौत हो गई और 31 घायल हो गए.

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चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई (फोटो- पीटीआई) चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई (फोटो- पीटीआई)

aajtak.in

  • गोंडा ,
  • 18 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 9:41 PM IST

चंडीगढ़ से असम के डिब्रूगढ़ जा रही चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के कई डिब्बे पटरी से उतर गए. रेल हादसे के बाद अफरातफरी मच गई. शुरुआती जानकारी के मुताबिक ट्रेन हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई है. जबकि 31 लोग घायल हो गए हैं. ट्रेन में यात्रा कर रहे संदीप कुमार ने बताया कि चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के पटरी से उतरने के बाद उन्होंने एक लड़के की चीखें सुनीं और उनके कोच में धूल भर गई.

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समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक स्लीपर कोच में यात्रा कर रहे संदीप कुमार ने कहा कि मुझे याद है कि मेरे सामने बर्थ पर बैठा एक लड़का जोर से चीखा. एक पल के लिए कोच में धूल भर गई और चारों तरफ अंधेरा छा गया. मुझे याद नहीं कि अगले कुछ सेकंड में क्या हुआ. मुझे बस चीखें याद हैं और कुछ यात्रियों ने मेरा हाथ खींचा और मुझे खिड़की से बाहर निकलने में मदद की. 

लखनऊ से करीब 150 किलोमीटर दूर गोंडा के पास मोतीगंज इलाके में गुरुवार को ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए, जिसमें 2 यात्रियों की मौत हो गई और 31 घायल हो गए. चंडीगढ़ से डिब्रूगढ़ जा रही पैसेंजर ट्रेन दोपहर 01:58 बजे गोंडा स्टेशन से गुजरी. इसका अगला स्टॉपेज बस्ती था, लेकिन मोतीगंज रेलवे स्टेशन से गुजरने के कुछ ही देर बाद यह पटरी से उतर गई.

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'तेज आवाज सुनाई दी और जोरदार झटका लगा'

ट्रेन के B2 कोच में यात्रा कर रहे 35 वर्षीय एक अन्य यात्री मनीष तिवारी ने बताया कि मैं खिड़की के पास बैठा था, तभी मुझे तेज आवाज सुनाई दी. मनीष ने बताया कि उन्हें झटका लगा, जिससे वे कोच में गिर गए, 

'ऊपरी बर्थ पर गिरने से पहले तगड़ा झटका लगा'

वहीं, बिहार के छपरा जा रहे दिलीप सिंह ने बताया कि गोंडा से ट्रेन के रवाना होने के बाद मैं झपकी लेने के लिए ऊपरी बर्थ पर चढ़ गया. मुझे बस इतना याद है कि दूसरी तरफ की ऊपरी बर्थ पर गिरने से पहले मुझे जोरदार झटका लगा, मुझे उम्मीद थी कि यह कोई सपना होगा, लेकिन ऐसा नहीं था. 

हादसे के बाद मच गई अफरातफरी

कोच के पटरी से उतरने और बाईं ओर गिरने की तेज आवाज के बाद यात्रियों, खासकर बच्चों की चीखें सुनाई देने लगीं. यात्री झुके हुए स्लीपर कोच की आपातकालीन खिड़कियों और दरवाजों से बाहर निकलने लगे और कुछ लोग अपना सामान निकालने के लिए वापस चले गए. एसी कोच में यात्रियों ने एक-दूसरे की मदद से खिड़की के शीशे तोड़कर घायलों या फंसे लोगों को बाहर निकाला. हादसे के बाद जब पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं, तो अधिकारियों ने लोगों से क्षतिग्रस्त डिब्बों से दूर रहने की अपील की. ​​बचावकर्मियों ने इलाके की घेराबंदी की. एक अन्य टीम ने घायल यात्रियों को करीब 300 मीटर दूर खड़ी एंबुलेंस तक पहुंचाया. जबकि गंभीर रूप से घायल यात्रियों को स्ट्रेचर पर एंबुलेंस तक ले जाया गया. 

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