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चीन से तनाव के बीच अमेरिका की दो टूक, सैन्य मोर्चे पर भारत के साथ

aajtak.in
  • 07 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 6:29 PM IST
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भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री की बातचीत के बाद लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव में थोड़ी नरमी आई है. चीनी सेना पीछे हटने लगी है लेकिन फिर भी भारतीय सेना और मोदी सरकार चीन की चालबाजी को लेकर पूरी तरह सतर्क है, ऐसे में अमेरिका ने एक बार फिर भारत का साथ देने की प्रतिबद्धता को दोहराया है जो निश्चित तौर पर चीन के लिए एक झटका है.

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व्हाइट हाउस के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के संबंध में संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना भारत के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी.

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व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ मार्क मीडोज ने फॉक्स न्यूज को बताया, स्पष्ट संदेश है कि हम चीन या किसी और को उस क्षेत्र में अपना प्रभुत्व स्थापित नहीं करने देंगे और सबसे शक्तिशाली बल होने के कारण बागडोर संभालेंगे.

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मीडोज ने दोनों देशों के बीच सीमा विवाद पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए यह टिप्पणी की. उन्होंने कहा, ''हमारी सेना मजबूत है और मजबूत बनी रहेगी, चाहे वह भारत और चीन के बीच संघर्ष के संबंध में हो या कहीं और.''

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भारत और चीन के बीच करीब दो महीने से जारी गतिरोध के बाद देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री में तनाव को कम करने को लेकर बातचीत हुई थी. इसके बाद पूर्वी लद्दाख के कई क्षेत्रों में आठ सप्ताह से जारी तनाव में थोड़ी नरमी आई है.

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पैंगोंग त्सो, गलवान घाटी और गोगरा हॉट स्प्रिंग में भारत और चीनी सेना के बीच तनाव चरम पर था. गलवान घाटी में 15 जून को हिंसक झड़प के बाद  स्थिति और बिगड़ गई थी. इस झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे जबकि चीन को भी नुकसान हुआ था. इसके बाद दोनों पक्षों ने एलएसी के साथ अधिकांश क्षेत्रों में अपनी तैनाती को काफी तेज कर दिया था.

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चीनी सेना गलवान घाटी में पेट्रोलिंग पॉइंट 14 पर हुए संघर्ष की साइट से 1.8 किमी पीछे हट गई है. इसे लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव में कमी के पहले संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

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