अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए संयुक्त सैन्य हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता जा रहा है. इस तनाव के बीच लाखों भारतीय परिवार जो विदेश यात्रा का प्लान बना रहे थे वो सोच में पड़ गए हैं.
इस संकट ने वैश्विक पर्यटन और एविएशन सेक्टर के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है. अगर आप भी इस समर वेकेशन में यूरोप, अमेरिका या खाड़ी देशों की यात्रा का मन बना रहे हैं, तो यह खबर आपके बजट और प्लानिंग को पूरी तरह बदल सकती है.
मिडल-ईस्ट, विशेष रूप से ईरान और इराक का हवाई क्षेत्र एशिया को यूरोप और उत्तरी अमेरिका से जोड़ने वाला सबसे व्यस्त मार्ग है. युद्ध जैसी स्थिति में सुरक्षा कारणों से एयरलाइंस इन क्षेत्रों के ऊपर से उड़ान भरने से बचती हैं.
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एयर टिकट हो सकता है महंगा
एयर इंडिया, अमीरात और कतर एयरवेज जैसी प्रमुख एयरलाइंस को अब वैकल्पिक रास्तों (जैसे सऊदी अरब या मध्य एशिया के ऊपर से) का चुनाव करना पड़ रहा है. इससे उड़ान का समय 1 से 3 घंटे तक बढ़ सकता है. उदाहरण के लिए, दिल्ली से लंदन या मुंबई से न्यूयॉर्क की फ्लाइट्स को अब लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ रहा है, जिससे यात्रियों के लिए सफर थकाऊ और लंबा हो गया है.
हवाई यात्रा की लागत का लगभग 30-40% हिस्सा जेट फ्यूल (ATF) का होता है. मिडल-ईस्ट संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर हो गई हैं. वैश्विक बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अगर तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ेगी इसका सीधा असर एयरलाइंस के परिचालन खर्च पर पड़ता है. एयरलाइंस इस बढ़े हुए खर्च का बोझ 'फ्यूल सरचार्ज' के रूप में यात्रियों पर डालेंगी. जानकारों का मानना है कि समर वेकेशन के पीक सीजन (मई-जून) तक अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट टिकटों के दाम 20% से 30% तक बढ़ सकते हैं.
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पसंदीदा डेस्टिनेशंस पर अनिश्चितता
भारतीय पर्यटकों के लिए दुबई, तुर्की, जॉर्डन और मिस्र लोकप्रिय डेस्टिनेशंस रहे हैं, लेकिन युद्ध के डर और सुरक्षा चिंताओं के कारण इन देशों की बुकिंग में गिरावट आ सकती है, वहीं दुबई और कतर जसे देश न केवल पर्यटन स्थल हैं बल्कि बड़े 'ट्रांजिट हब' भी हैं. अगर तनाव बढ़ता है, तो यहां रुकने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट्स के कैंसिल होने का खतरा बना रहता है.
क्या आपका समर वेकेशन प्लान खतरे में है?
अगर आपने पहले से बुकिंग नहीं कराई है, तो इस बार बजट बिगड़ना तय है. विशेषज्ञों का सुझाव है कि अनिश्चितता के इस दौर में यात्रियों को सतर्क रहना चाहिए. अब बुकिंग करते समय 'फ्री कैंसिलेशन' या 'रिफंडेबल टिकट्स' को प्राथमिकता देना समझदारी है. अब बीमा केवल मेडिकल इमरजेंसी के लिए नहीं, बल्कि 'ट्रिप इंटरप्शन' (Trip Interruption) के लिए भी अनिवार्य हो गया है. सुनिश्चित करें कि आपका इंश्योरेंस युद्ध या नागरिक अशांति के कारण होने वाले कैंसिलेशन को कवर करता है.
विकल्प क्या हैं?
महंगे किराए और युद्ध के डर से बचने के लिए भारतीय पर्यटक अब अपना रुख बदल सकते हैं. वियतनाम, थाईलैंड और बाली जैसे देश लोगों की पहली पसंद बन रहे हैं, क्योंकि यहां जाने के लिए मिडल-ईस्ट के एयरस्पेस की जरूरत नहीं पड़ती और वीजा प्रक्रिया भी आसान है.
वहीं इस अशांति का असर घरेलू पर्यटन पर भी देखने को मिलेगा. कश्मीर, लद्दाख, केरल और पूर्वोत्तर भारत की बुकिंग में उछाल आने की उम्मीद है. लोग जोखिम लेने के बजाय अपने ही देश की सुंदर वादियों में छुट्टियां बिताना सुरक्षित समझ रहे हैं.
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