बिना पासपोर्ट दो देशों की सैर! भारत का वो अनोखा गांव, जहां घरों के बीच से गुजरती है सरहद

भारत के नक्शे पर एक ऐसा गांव भी मौजूद है, जहां सरहदें दीवारों को नहीं बल्कि पूरे आशियाने को ही दो हिस्सों में बांट देती हैं. यहां के लोग हर दिन बिना किसी पासपोर्ट और वीजा के अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करते हैं और इसकी वजह जानकर आप हैरान रह जाएंगे.

Advertisement
बिना पासपोर्ट दो देशों की सैर कराता नागालैंड का लोंगवा (साकेंतिक फोट- Pixabay) बिना पासपोर्ट दो देशों की सैर कराता नागालैंड का लोंगवा (साकेंतिक फोट- Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:10 PM IST

क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही गांव में रहते हुए आप दो देशों में रह सकते हैं? कि आपके घर का एक हिस्सा भारत में हो और दूसरा म्यांमार में? भारत के पूर्वोत्तर में नागालैंड की पहाड़ियों के बीच बसा लोंगवा गांव कुछ ऐसा ही हैरान कर देने वाला नजारा पेश करता है. यहां सरहदें नक्शों में नहीं, बल्कि लोगों के आंगनों के बीच से गुजरती हैं. तो चलिए जानते हैं उस गांव की कहानी, जहां बिना पासपोर्ट भी दो देशों की झलक मिल जाती है.

Advertisement

जहां एक कदम भारत में और दूसरा म्यांमार में

नागालैंड के मोन जिले में स्थित लोंगवा गांव की सबसे बड़ी खासियत इसकी भौगोलिक स्थिति है. दरअसल, भारत और म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमा इस गांव को बीच से काटती हुई निकलती है. यही वजह है कि यहां कई घर ऐसे हैं जिनका एक हिस्सा भारत में पड़ता है, जबकि दूसरा म्यांमार की ज़मीन पर. यहां रहने वाले लोगों के लिए यह कोई नई या अजीब बात नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सामान्य जिंदगी का हिस्सा है.

यह भी पढ़ें: गियर न्यूट्रल फिर भी दौड़ने लगती है कार, क्या है लद्दाख की मैग्नेटिक हिल का रहस्य

इस गांव का सबसे चर्चित ठिकाना यहां के मुखिया का घर है, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'अंग' कहा जाता है. यह घर ठीक उसी जगह बना है जहां से सीमा रेखा गुजरती है. ऐसा माना जाता है कि यहां की एक ही छत के नीचे बैठकर दो देशों में मौजूद होने का अहसास किसी जादुई अनुभव से कम नहीं है. यही वजह है कि लोंगवा गांव अक्सर दुनिया के सबसे अनोखे सीमावर्ती गांवों में गिना जाता है. 

Advertisement

बिना पासपोर्ट कैसे होती है आवाजाही

हालांकि भारत और म्यांमार के बीच यात्रा के लिए आम तौर पर पासपोर्ट और वीजा जरूरी होता है, लेकिन लोंगवा जैसे सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले स्थानीय समुदायों को लंबे समय तक परंपरागत आवाजाही की छूट मिली रही है. रिश्तेदारी, सामाजिक संबंध और खेती जैसे कामों के लिए लोग सीमित दूरी तक सीमा पार करते हैं. लेकिन, बाहरी पर्यटकों के लिए नियम अलग हैं और प्रशासन की अनुमति जरूरी होती है. 

यह भी पढ़ें: हिमालय की वो झील जहां आज भी बिखरे हैं सैकड़ों कंकाल, रहस्य बना है मौत का सच

ट्रैवलर्स के लिए क्यों है यह जगह खास

अगर आप उन यात्रियों में हैं जो आम टूरिस्ट स्पॉट से हटकर कुछ अलग देखना चाहते हैं, तो लोंगवा आपके लिए एक यादगार अनुभव बन सकता है. यहां न सिर्फ दो देशों की सीमा देखने को मिलती है, बल्कि कोन्याक नागा जनजाति की अनूठी संस्कृति, उनके पारंपरिक घर और जीवनशैली भी करीब से देखने का मौका मिलता है. यह गांव यह भी दिखाता है कि कैसे सीमाओं के बावजूद लोग आपसी जुड़ाव के साथ जिंदगी जीते हैं.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »