जापानी युवक का भारत से ऐसा प्यार, बाइक से 12 बार लगाया पूरे देश का चक्कर

मासाशी मित्सुई एक जापानी फोटोग्राफर हैं, जो इन दिनों मोटरसाइकिल से अपनी 12वीं भारत यात्रा पर हैं. लेकिन आखिर वो कौन सी बात है, जो उन्हें बार-बार इंडिया खींच लाती है?

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क्या है इंडिया का वो जादू, जो जापानी फोटोग्राफर मासाशी मित्सुई को बार-बार यहां खींच लाता है (Photo: Masashi Mitsui) क्या है इंडिया का वो जादू, जो जापानी फोटोग्राफर मासाशी मित्सुई को बार-बार यहां खींच लाता है (Photo: Masashi Mitsui)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 23 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:37 AM IST

घूमना सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह जाना नहीं होता, बल्कि यह भावनाओं का खेल है. जब आप कहीं घूमकर लौटते हैं, तो खाली हाथ नहीं आते, अपनी यादों में उस जगह का एक हिस्सा साथ लाते हैं और अपना एक हिस्सा वहीं छोड़ आते हैं. कुछ जगहें दिल में घर कर जाती हैं और यह इस पर निर्भर करता है कि वहां आपको कैसा महसूस हुआ.

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क्या वहां आपको घर जैसा लगा? क्या वहां का खाना, वहां के लोग और कल्चर आपको पसंद आया? लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि कुछ जगहें ऐसी होती हैं जो आपको बार-बार अपनी तरफ खींचती हैं. आखिर उन जगहों में ऐसा क्या है जो लोग वहां दोबारा जाने से खुद को रोक नहीं पाते? जापान के फोटोग्राफर मसाशी मित्सुई की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिनका भारत से गहरा जुड़ाव बन चुका है.

मित्सुई अब तक भारत के 12 पूरे चक्कर लगा चुके हैं. वह भी मोटरसाइकिल से. करीब 2 लाख किलोमीटर का सफर उन्होंने बिना किसी गाइडबुक, ब्लॉग या यूट्यूब की मदद के तय किया. जहां मन किया, वहां रुक गए. लोगों से मिले, बातें कीं और आगे बढ़ गए. भारत की संस्कृति, परंपराएं और इतिहास उन्हें बहुत खास लगते हैं. उनका कहना है कि तेजी से हो रहे बदलाव में कई छोटी-छोटी चीजें खत्म होती जा रही हैं. वे अपनी फोटोग्राफी के जरिए इन्हें संभालकर रखना चाहते हैं.

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मित्सुई ने भारत यात्रा के दौरान ये तस्वीर ली (Photo: Masashi Mitsui)

मित्सुई पहली बार 2001 में भारत आए थे. वो साफ कहते हैं, 'सच तो ये है कि उस वक्त मुझे इंडिया कुछ खास पसंद नहीं आया था.'  लेकिन 2006 में जब वे दोबारा आए और मोटरसाइकिल से घूमना शुरू किया, तो सब कुछ बदल गया. उन्हें समझ आया कि भारत की असली जान बड़े शहरों में नहीं, बल्कि गांवों और छोटे कस्बों में है. मशहूर टूरिस्ट जगहों से कहीं ज्यादा उन्हें यहां की आम जिंदगी ने खींचा. खासकर यहां के सीधे-सादे, सच्चे और दिल के बेहद खूबसूरत लोग उन्हें भा गए. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे पूरे देश के 12 राउंड लगा लेंगे. यह 12 अलग-अलग छोटी यात्राएं नहीं थीं, बल्कि पूरे भारत का 12 बार चक्कर था.

गांवों की गलियों में ढूंढा असली भारत (Photo: Masashi Mitsui)

उन्हें भारत की सबसे बड़ी खूबी यहां की विविधता लगती है. बस कुछ किलोमीटर चलिए और सब कुछ बदल जाता है, चाहे भाषा हो, कपड़े हों या खान-पान. यहां एक ही देश में इतनी अलग-अलग दुनिया बसती हैं कि हर बार एक नया ही अनुभव मिलता है. उनके लिए पसंदीदा जगह चुनना मुश्किल है. वाराणसी और लद्दाख जैसी जगहें आकर्षक जरूर हैं, लेकिन वे ज्यादा टूरिस्ट वाली जगहों से दूर रहना पसंद करते हैं. उन्हें ओडिशा के पहाड़ी गांव, गुजरात की पुरानी गलियां और राजस्थान के देहात ज्यादा खींचते हैं. वहीं उन्हें असली भारत दिखता है.

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भारत भ्रमण के दौरान ली गई एक यादगार तस्वीर (Photo: Masashi Mitsui)

उनकी तस्वीरों में भी भारत की यही विविधता साफ झलकती है. यहां अलग-अलग जातियां, भाषाएं और संस्कृतियां हैं, लेकिन फिर भी एक चीज सबको आपस में जोड़ती है, जिसे वो 'इंडियननेस' कहते हैं. उनका मानना है कि 140 करोड़ की आबादी वाले इस देश में, जहां उत्तर और दक्षिण के लोग शायद एक-दूसरे की भाषा भी न समझ पाएं, वहां भी एक साझा पहचान सबको एक धागे में पिरोए रखती है.

मित्सुई ने अपने भारत भ्रमण के दौरान यहां के चटकीले रंगों को कैसे उतारा है (Photo: Masashi Mitsui)

कई लोग उनकी तस्वीरें देखकर समझते हैं कि वे गरीबी दिखा रहे हैं, लेकिन वे इसे गलत मानते हैं. उनका कहना है कि वे भारत की ऊर्जा और यहां की जिंदगी की खूबसूरती को कैद करना चाहते हैं. बड़े शहर उन्हें उबाऊ लगते हैं, चाहे जापान हो, यूरोप या भारत. उन्हें गांवों की सादगी और परंपरागत काम करते लोग ज्यादा दिलचस्प लगते हैं.

भारत की वो 'इंडियननेस' जो सबको जोड़ती है (Photo: Masashi Mitsui)

एक फोटोग्राफर के तौर पर उन्हें भारत में सबसे ज्यादा जो चीज खींचती है, वह है रंग. खासकर भारतीय महिलाओं की साड़ी. वे कहते हैं कि रोजमर्रा के कपड़ों में भी यहां लाल, नीला जैसे गहरे और चमकीले रंग पहनने का चलन है, जो दुनिया में और कहीं नहीं दिखता. जहां शहरों में टी-शर्ट और जींस आम हो चुके हैं, वहीं गांवों में महिलाएं आज भी अपने रंग और पहचान को संभाले हुए हैं. मित्सुई उम्मीद करते हैं कि यह परंपरा आगे भी बनी रहे.

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शहर उबाऊ हैं, गांवों के रंग ही असली जिंदगी हैं (Photo: Masashi Mitsui)

तेजी से बदलते भारत के बीच उनकी तस्वीरें हमें थोड़ा रुककर देखने की याद दिलाती हैं. वे सिर्फ जगहों की नहीं, बल्कि लोगों, रंगों और उन पलों की तस्वीरें लेते हैं जो अक्सर हमारी नजरों से छूट जाते हैं.

रिपोर्ट: महक मल्होत्रा

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