जहां पानी से धुंआ उठता है, जबलपुर का यह झरना घूमने के लिए है बेस्ट

मध्य प्रदेश के जबलपुर में कुदरत का एक ऐसा करिश्मा है, जहां पानी की धारा गिरते ही धुएं का गुबार बन जाती है. अगर आप भी इस 'भारत के नियाग्रा' की सैर करना चाहते हैं, तो जानिए यहां पहुंचने का सबसे आसान तरीका और घूमने का बेस्ट टाइम.

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धुंध के बीच फोटोग्राफी का परफेक्ट स्पॉट (Photo: jabalpur.nic.in) धुंध के बीच फोटोग्राफी का परफेक्ट स्पॉट (Photo: jabalpur.nic.in)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:30 PM IST

अगर आप इस छुट्टियों में कुछ अलग देखना चाहते हैं, तो जबलपुर का धुआंधार झरना आपका इंतजार कर रहा है. संगमरमर की पहाड़ियों के बीच से जब नर्मदा का दूधिया पानी 30 मीटर नीचे गिरता है, तो पूरा इलाका धुएं की सफेद चादर से ढक जाता है. रोमांचक बोटिंग से लेकर केबल कार की सवारी तक, धुआंधार फॉल्स में ऐसा बहुत कुछ है जो आपकी ट्रिप को यादगार बना देगा. 

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पवित्र नर्मदा नदी के तट पर बसा भेड़ाघाट अपनी सफेद संगमरमर की चट्टानों के लिए जाना जाता है, लेकिन धुआंधार जलप्रपात यहां की जान है. यह धुंध सिर्फ देखने में ही सुंदर नहीं है, बल्कि इसके पीछे विज्ञान का एक दिलचस्प खेल छिपा है. दरअसल, नर्मदा नदी ऊपर की तरफ तो चौड़ी धारा में बहती है, लेकिन भेड़ाघाट पहुंचते ही इसे 18 मीटर चौड़ी एक बेहद संकरी घाटी का सामना करना पड़ता है.

इस तंग रास्ते की वजह से पानी की गति इतनी तेज हो जाती है कि जब यह 30 मीटर नीचे कठोर संगमरमर की चट्टानों पर गिरता है, तो पानी के कई छोटी बूंदों में टूट जाता है. यही बूंदें हवा में धुंध बनकर उड़ने लगती हैं, जिसे देखकर ऐसा लगता है मानो नदी से सफेद धुआं उठ रहा हो.

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केबल कार से बोटिंग तक, रोमांच का पूरा पैकेज

धुआंधार सिर्फ एक झरना नहीं, बल्कि एक पूरा अनुभव है. यहां आप संगमरमर की ऊंची घाटियों के बीच नाव की सवारी कर सकते हैं, जहां चांद की रोशनी में चट्टानें चांदी जैसी चमकती हैं. अगर आपको ऊंचाई से डर नहीं लगता, तो केबल कार की सवारी आपके लिए बेस्ट है. ऊपर से देखने पर ऐसा लगता है मानो आप सफेद बादलों के ऊपर तैर रहे हों. इसके अलावा यहां के प्राचीन मंदिर और हस्तशिल्प के बाजार आपकी यात्रा को यादगार बना देते हैं. फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए तो यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है, क्योंकि यहां का हर कोना कैमरे के लिए एक परफेक्ट फ्रेम देता है.

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कब जाएं और कैसे पहुंचें इस जादुई सफर पर?

यूं तो यहां साल भर रौनक रहती है, लेकिन मानसून (जुलाई से अक्टूबर) के दौरान यह झरना अपने सबसे रौद्र और सुंदर रूप में होता है. उस वक्त पानी की गर्जना कान फाड़ देने वाली होती है और कोहरा सबसे घना होता है.

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जबलपुर शहर से महज 20 किलोमीटर दूर स्थित इस जगह तक पहुंचना बेहद आसान है. जबलपुर के लिए दिल्ली, मुंबई और इंदौर जैसे बड़े शहरों से सीधी फ्लाइट्स और ट्रेनें उपलब्ध हैं. स्टेशन या एयरपोर्ट से आप टैक्सी या ऑटो लेकर 45 मिनट में भेड़ाघाट पहुंच सकते हैं. अगर आप शांति और साफ नजारों के शौकीन हैं, तो अक्टूबर से मार्च के बीच यहां आने का सबसे अच्छा समय है.

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