साइबर ठगी का मायाजाल, दुबई से भारतीयों को किया डिजिटल अरेस्ट और बैंक खाते खाली

भारत में साइबर ठगी के केस सामने आ चुके हैं, लोगों के बैंक खाते तक खाली हो चुके हैं. साइबर ठग लोगों को शिकार बनाने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करता है. इस संबंध में पुलिस के हाथ में बड़ी सफलता लगी है और पुलिस ने मास्टर माइंड को गिरफ्तार किया है.

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साइबर ठगी का मास्टर माइंड गिरफ्तार. (Photo: AI Generated) साइबर ठगी का मास्टर माइंड गिरफ्तार. (Photo: AI Generated)

श्रीकृष्ण पांचाल

  • पुणे,
  • 13 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:49 AM IST

भारतीय को डिजिटल अरेस्ट, इनवेस्टमेंट स्कैम, ऑनलाइन टास्क जॉब आदि के नाम पर बहुत से लोगों को शिकार बनाया जा चुका है और साइबर ठगी के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया जा चुका है. 

पिंपरी- चिंचवड़ साइबर पुलिस ने इंटरपोल और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद से उस मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है, जो दुबई और थाईलैंड से साइबर फ्रॉड का पूरा नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था. टास्क फ्रॉड, फर्जी निवेश और डिजिटल अरेस्ट जैसे हाईटेक जाल में फंसाकर आरोपी देशभर के लोगों से करोड़ों रुपये ठग रहा था. 

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आरोपी का नाम सौरभ उर्फ गणेश बाळासो काळे. साइबर ठगी की दुनिया का वह चेहरा, जिसकी तलाश पुलिस को लंबे समय से थी. देहूरोड में दर्ज एक ऑनलाइन टास्क फ्रॉड केस की जांच के दौरान पुलिस के हाथ ऐसे सुराग लगे, जिन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया. 

जून 2024 में इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जांच का धागा बार-बार एक ही शख्स तक पहुंच रहा था और वह था गणेश काळे. 

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गणेश काळे दुबई में बैठकर पूरे नेटवर्क को कंट्रोल कर रहा था. भारत में लोगों को मोटे मुनाफे का लालच दिया जाता था. उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी हासिल की जाती थी. फिर इन्हीं खातों के जरिए साइबर ठगी के करोड़ों रुपये इधर से उधर ट्रांसफर किए जाते थे. 

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जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, आरोपी के तार चीन समेत कई विदेशी नागरिकों से जुड़े होने के सबूत भी सामने आने लगे.  पुलिस को पता चला कि दुबई में आरोपी ने अपना अलग ऑफिस बना रखा था, जहां से साइबर फ्रॉड का पूरा नेटवर्क संचालित किया जाता था. 

टास्क फ्रॉड, शेयर मार्केट में निवेश का झांसा और डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीकों से लोगों को निशाना बनाया जाता था. 

पुलिस उसके पीछे थी और आरोपी लगातार ठिकाने बदल रहा था. फिर सितंबर 2025 में वह दुबई छोड़कर थाईलैंड भाग गया, लेकिन पिंपरी-चिंचवड़ साइबर पुलिस ने हार नहीं मानी. 

आरोपी के खिलाफ इंटरपोल की रेड कॉर्नर नोटिस और लुकआउट सर्कुलर जारी कराया गया. अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय किया गया और आखिरकार बैंकॉक एयरपोर्ट पर उसे दबोच लिया गया. 

11 जून को जब आरोपी को भारत लाया गया, तब मुंबई एयरपोर्ट पर साइबर पुलिस की टीम पहले से तैयार थी.  एयरपोर्ट पर ही उसे हिरासत में लेकर औपचारिक गिरफ्तारी की गई. 

पुलिस का दावा है कि आरोपी का संबंध कई बड़े साइबर फ्रॉड मामलों से है. हिंजवडी में 18 लाख रुपये की ठगी और 2 करोड़ 66 लाख रुपये के हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड केस में भी उसकी भूमिका सामने आई है. 

अब जांच एजेंसियों की नजर केवल गणेश काळे पर नहीं, बल्कि उसके पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर है. पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में कई और बड़े नाम, विदेशी कनेक्शन और करोड़ों रुपये के साइबर फ्रॉड के राज खुल सकते हैं. 

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दुबई से लेकर बैंकॉक और फिर मुंबई तक चली. इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी दुनिया के किसी भी कोने में छिप जाएं, कानून के लंबे हाथ आखिरकार उन्हें पकड़ ही लेते हैं.

फिलहाल पिंपरी- चिंचवड़ साइबर पुलिस इस मास्टरमाइंड से पूछताछ कर रही है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में देश के कई बड़े साइबर फ्रॉड मामलों का खुलासा हो सकता है. 

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