फुटबॉल के नियम: फुटबॉल के बेसिक नियम, कैसे और कितने समय का होता मैच, जानिए सबकुछ

फुटबॉल मैच कुल 90 मिनट का होता है. मैच में 45 मिनट के खेल के बाद एक ब्रेक भी होता है. जानिए टॉस जीतने वाला कप्तान किस तरह फैसला करता है...

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Lionel Messi (File Photo) Lionel Messi (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 मई 2022,
  • अपडेटेड 3:17 PM IST
  • फुटबॉल मैच 90 मिनट को होता है
  • मैच में 45-45 मिनट के दो हाफ होते हैं
  • दोनों टीम में 11-11 खिलाड़ी होते हैं

फुटबॉल एक ऐसा खेल है, जिसे दुनिया का लगभग हर देश खेलता है. यह इतना आसान और सरल है कि बच्चे किसी छोटे मैदान पर भी आसानी से खेल सकते हैं. हालांकि इंटरनेशनल और बड़े टूर्नामेंट्स के लिए जरूर एक निर्धारित बड़ा ग्राउंड होना जरूरी होता है. फुटबॉल एक टीम गेम है, जिसमें दो टीमों का होना जरूरी है.

दोनों टीम में 11-11 खिलाड़ी होते हैं. दोनों ही टीम में एक-एक गोलकीपर भी होता है. बाकी स्ट्राइकर, डिफेंडर और मिडफील्डर होते हैं. खेल का बेसिक नियम है कि एक टीम को विपक्षी टीम के गोल पोस्ट में बॉल को पहुंचाना होता है. जितनी बार बॉल को दूसरी टीम के गोल पोस्ट में पहुंचाया जाता है, उतने गोल माने जाते हैं. साथ ही उस टीम को अपने गोल पोस्ट में भी बॉल जाने से रोकना होता है. यह काम दोनों टीम के लिए गोलकीपर करता है.

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कितने मिनट का होता है फुटबॉल मैच

फुटबॉल मैच कुल 90 मिनट का होता है. मैच में 45 मिनट के खेल के बाद एक ब्रेक भी होता है. इस तरह से एक मैच 45-45 मिनट के दो हाफ में खेला जाता है. इन दोनों ही हाफ में कुछ एक्स्ट्रा टाइम भी मिलता है, जो रेफरी तय करता है. क्रिकेट में जैसे अंपायर होता है, ठीक उसी तरह फुटबॉल में रेफरी होता है. रेफरी का अंतिम फैसला ही मान्य होता है. मैच में एक सहायक रेफरी भी होता है.

कैसे होता है फुटबॉल मैच में टॉस

क्रिकेट की तरह फुटबॉल मैच में भी टॉस होता है, लेकिन यहां टॉस जीतने वाले कप्तान को क्रिकेट की तरह बॉलिंग-बैटिंग नहीं लेना होता है, बल्कि उसकी टीम किस गोल पोस्ट पर खेलेगी. दरअसल, फुटबॉल मैदान को दो हिस्सों में बांटा जाता है. दो गोल पोस्ट होते हैं, जिन्हें दोनों टीमों में बांटा जाता है. मैच में गोल होने के बाद जब दोबारा खेल शुरू होता है, तो बॉल को बीच में सेंटर लाइन पर रखकर शुरू किया जाता है.

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फुटबॉल खेल के नियम

स्ट्राइकर 
इनका मुख्य कार्य गोल मारना होता है.

डिफेंडर्स 
अपनी विरोधी टीम के सदस्यों को गोल स्कोर करने से रोकने का कार्य डिफेंडर्स को करना होता है.

मिडफिल्डर्स
विरोधी टीम से गेंद छीन कर अपने आगे खेलने वाले खिलाड़ियों को गेंद देने का कार्य मिडफिल्डर्स को करना होता हैं.

गोलकीपर
गोल कीपर का काम गोल पोस्ट के सामने खड़े रहकर ही गोल होने से रोकना होता है.

थ्रो-इन
इसमें गेंद पूरी तरह से रेखा पार कर जाती है. तब उस विरोधी टीम को पुरस्कार में मिलती है, जिसने गेंद को अंतिम बार छुआ होता है.

गोल किक
जब गेंद पूरी तरह गोल रेखा को पार कर जाए तो गोल के बिना ही स्कोर होता है, और हमलावर द्वारा गेंद  को आखिरी बार छूने के कारण बचाव करने वाले दल को पुरस्कार में किक करने का मौका मिलता है.

कॉर्नर किक
जब गेंद बिना गोल के ही गोल रेखा को पार कर जाती है, और बचाव करने वाली टीम द्वारा गेंद को आखिरी बार छूने के कारण हमलावर दल को अवसर दे दिया जाता है.

इनडायरेक्ट फ्री किक
यह विरोधी टीम को पुरस्कार में मिलती है, जब बिना किसी विशेष फाउल (Foul) के गेंद को बाहर भेज दिया जाए और खेल रुक जाए.

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फुटबॉल के खेल में फाउल के नियम

येलो कार्ड
फुटबाल खेल में येलो कार्ड का बहुत महत्व होता है इस कार्ड के जरिये रेफरी खिलाड़ी को उसके गलत व्यवहार के लिए सज़ा के रूप में यलो कार्ड दिखाकर मैदान के बाहर भेज सकता है.

रेड कार्ड
येलो कार्ड के बाद भी खिलाड़ी के व्यवहार में सुधार नहीं होनें की दशा में रेड कार्ड दिया जाता है. रेड कार्ड का मतलब है मैदान से बाहर. यदि एक खिलाडी को बाहर निकाल दिया जाता है, तो उसकी जगह कोई दूसरा खिलाडी नहीं आ सकता है. इस तरह खिलाड़ियों की संख्या कम हो जाती है.

ऑफसाइड
फुटबॉल में ऐसा भी एक गोल होता है, जिसे फाउल मानकर काउंट नहीं किया जाता है. इसे ऑफसाइड गोल कहते हैं. दरअसल नियम के मुताबिक, आगे के खिलाडी गेंद के बिना बचाव करते हुए दूसरे खिलाडी के आगे नहीं जा सकते, खासकर विरोधी दल की गोल रेखा के एकदम पास यदि कोई खिलाड़ी ऐसा करता है, तो उसे फाउल माना जाता है. ऐसे गोल को गिना नहीं जाता है.

 

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