क्रिकेट में हालात कितनी तेजी से बदलते हैं, इसका सबसे बड़ा उदाहरण भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज यास्तिका भाटिया हैं. करीब छह महीने पहले वह गंभीर घुटने की चोट के कारण मैदान से बाहर थीं. सर्जरी के बाद उन्हें फिर से शून्य से शुरुआत करनी पड़ी और वह भारत की विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा भी नहीं बन सकीं. लेकिन अब उसी खिलाड़ी ने क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदान लॉर्ड्स में इतिहास रच दिया है.
इंग्लैंड के खिलाफ एकमात्र महिला टेस्ट में यास्तिका ने 158 गेंदों पर 113 रनों की शानदार पारी खेली और लॉर्ड्स के ऑनर बोर्ड पर नाम दर्ज कराने वाली पहली महिला क्रिकेटर बन गईं. भारत ने उनकी शतकीय पारी की बदौलत दूसरी पारी घोषित कर इंग्लैंड के सामने 457 रनों का विशाल लक्ष्य रखा. तीसरे दिन इंग्लैंड का स्कोर 130/6 रहा. अब आखिरी दिन टीम इंडिया को जीत के लिए सिर्फ 4 विके चाहिए.
इतिहास रचने के बाद भी यास्तिका के कदम जमीन पर हैं. मैच के तीसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद उन्होंने कहा, 'यह अविश्वसनीय है. छह महीने पहले मैं बिल्कुल अलग स्थिति में थी. अगर तब किसी ने कहा होता कि मेरा नाम लॉर्ड्स के ऑनर बोर्ड पर होगा तो मैं इस पर विश्वास नहीं करती.'
हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया कि वह इस उपलब्धि को मंजिल नहीं मानतीं. यास्तिका ने कहा, 'मेरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अभी आना बाकी है. मैं हमेशा मानती हूं कि मैं इससे भी बेहतर कर सकती हूं. यह तो सिर्फ शुरुआत है. अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है और मैं उसका इंतजार कर रही हूं.'
यास्तिका ने अपनी वापसी का श्रेय परिवार, टीम के साथियों, कोचिंग स्टाफ और बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) को दिया. उन्होंने कहा कि चोट से उबरने के कठिन दौर में इन सभी ने उनका लगातार हौसला बढ़ाया. उनके मुताबिक, माता-पिता, बहन, कोच और टीम के सहयोगी स्टाफ के बिना यह वापसी संभव नहीं थी.
उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद दो महीने तक उन्हें पूरी तरह आराम करना पड़ा और फिर नए सिरे से फिटनेस पर काम शुरू करना पड़ा. इस दौरान क्रिकेट के प्रति उनका जुनून और खुद पर भरोसा ही सबसे बड़ी ताकत बना. यास्तिका ने कहा, 'चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, खेल के प्रति प्यार और खुद पर विश्वास बनाए रखना सबसे जरूरी होता है.'
अपने ऐतिहासिक शतक पर भी यास्तिका का फोकस व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं, बल्कि टीम की जीत थी. उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य शतक पूरा करना नहीं, बल्कि तेजी से रन बनाकर टीम को इतना बड़ा स्कोर दिलाना था कि गेंदबाजों के पास इंग्लैंड के सभी 10 विकेट लेने के लिए पर्याप्त समय रहे. उनके लिए सबसे बड़ी बात हमेशा देश के लिए खेलना और टीम की जीत में योगदान देना
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क