वैभव सूर्यवंशी के करियर में सोमवार का दिन शायद रन, रिकॉर्ड या शॉट्स के लिए याद नहीं रखा जाएगा. दांबुला में श्रीलंका ए के खिलाफ मैच के बाद जो कुछ हुआ, उसने पहली बार इस 15 वर्षीय सनसनी के सामने क्रिकेट से अलग एक नई चुनौती खड़ी कर दी.
अब तक विरोधी टीमों की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि वैभव को आउट कैसे किया जाए. उसकी आक्रामक बल्लेबाजी, बेखौफ अंदाज और उम्र से कहीं आगे दिखाई देने वाली परिपक्वता ने उसे खास बना दिया है. लेकिन दांबुला की घटना ने शायद विरोधियों को एक नया संकेत दे दिया है. अगर गेंद से दबाव नहीं बनाया जा सकता, तो क्या शब्दों से बनाया जा सकता है?
यही इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू है
मैच का अंत नाटकीय रहा. मुकाबला टाई हुआ, सुपर ओवर हुआ और भारत ए को हार मिली. इसके बाद मैदान पर जो तनातनी हुई, उसने क्रिकेट से ज्यादा सुर्खियां बटोरीं. यह कहना मुश्किल है कि किसने क्या कहा और किसकी गलती कितनी थी... लेकिन इतना साफ है कि वैभव भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए.
यहीं से कहानी दिलचस्प हो जाती है...
महान खिलाड़ियों के करियर में एक दौर ऐसा आता है, जब विरोधी उनकी तकनीक नहीं, उनकी मानसिक मजबूती को परखने लगते हैं. सचिन तेंदुलकर को स्लेजिंग झेलनी पड़ी, विराट कोहली ने अपने शुरुआती दिनों में कई बार आक्रामक प्रतिक्रियाएं दीं और फिर समय के साथ उस ऊर्जा को प्रदर्शन में बदलना सीखा. अंतरराष्ट्रीय खेल में यह एक आम रणनीति है- अगर खिलाड़ी का बल्ला नहीं रुक रहा, तो उसके दिमाग तक पहुंचो.
दांबुला में शायद पहली बार महसूस किया
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पहली बार नहीं हुआ. पिछले साल अंडर-19 एशिया कप में भी पाकिस्तान के खिलाड़ियों के साथ उनका विवाद हुआ था.इसका मतलब यह नहीं कि वैभव अनुशासनहीन हैं. इसका मतलब सिर्फ इतना है कि वह अभी भी 15 साल के हैं, सीख रहे हैं और उसी प्रक्रिया से गुजर रहे हैं जिससे लगभग हर बड़ा खिलाड़ी कभी न कभी गुजरता है.
... लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं
वैभव अब सिर्फ एक प्रतिभाशाली किशोर नहीं हैं. वह भारतीय क्रिकेट का सबसे चर्चित युवा चेहरा हैं. उनके हर शॉट, हर प्रतिक्रिया और हर हावभाव पर कैमरे टिके रहते हैं. ऐसे में विरोधी टीमों को अगर यह महसूस होता है कि कुछ शब्द उनके धैर्य को प्रभावित कर सकते हैं, तो वे भविष्य में इस रास्ते का इस्तेमाल जरूर करेंगे.
यही वजह है कि दांबुला की घटना को सिर्फ एक झगड़े के रूप में नहीं देखना चाहिए. इसे एक चेतावनी और एक सीख के रूप में देखना चाहिए.
अच्छी बात यह है कि वैभव ने अब तक अपने क्रिकेटिंग सफर में हर चुनौती से तेजी से सीखा है. बल्लेबाजी में उनकी प्रगति इसका सबसे बड़ा प्रमाण है. इसलिए यह मानने की वजह कम है कि वह इस अनुभव से कुछ नहीं सीखेंगे.
आखिरकार, महान खिलाड़ी सिर्फ इसलिए महान नहीं बनते कि वे रन बनाते हैं. वे इसलिए महान बनते हैं क्योंकि विरोधी उन्हें उकसाने की कोशिश करते हैं और वे जवाब बल्ले से देते हैं.
दांबुला में विरोधियों को एक नया हथियार जरूर मिला है. अब देखना यह है कि वैभव सूर्यवंशी उस हथियार को कितना जल्दी बेअसर कर देते हैं.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क