ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया है. ख्वाजा 4 जनवरी से सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में होने वाले एशेज सीरीज के आखिरी टेस्ट मैच के जरिए अपने इंटरनेशनल करियर का समापन करेंगे. शुक्रवार (2 जनवरी) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ख्वाजा ने ना सिर्फ अपने संन्यास की पुष्टि की, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई समाज और क्रिकेट सिस्टम को लेकर कई कड़वी सच्चाइयों पर भी खुलकर बात की.
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एशेज सीरीज 2025-26 का पांचवां और आखिरी मुकाबला उस्मान ख्वाजा के करियर का 88वां टेस्ट होगा. लेकिन इस मौके पर चर्चा उनके आंकड़ों, शतकों या रिकॉर्ड्स की नहीं, बल्कि उन सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों की हो रही है, जिन पर बोलने की कीमत उन्हें अपने पूरे करियर में चुकानी पड़ी. ख्वाजा ने बेहद साफ शब्दों में कहा कि उन्हें शुरुआत से ही नस्लीय पूर्वाग्रह और इस्लामोफोबिया का सामना करना पड़ा.
उस्मान ख्वाजा ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के पहले मुस्लिम टेस्ट क्रिकेटर होने के नाते, उन्हें बार-बार यह एहसास कराया गया कि वह बाकी खिलाड़ियों से अलग हैं. उन्होंने कहा कि एशेज सीरीज के दौरान मीडिया और कुछ वर्गों का रवैया फिर से वही पुराना रहा, जहां उनके बयानों को तोड़ा-मरोड़ा गया और उन्हें जानबूझकर विवादों में घसीटा गया. ख्वाजा ने इसे डबल स्टैंडर्ड करार दिया.
फिलिस्तीन को लेकर बात करने में क्या बुराई?
उस्मान ख्वाजा ने स्वीकार किया कि उन्होंने क्रिकेट से बाहर के मुद्दों खासतौर पर फिलिस्तीन और मानवाधिकारों पर खुलकर बोलना चुना, और यही बात कई लोगों को असहज करती है. उन्होंने कहा, 'मुझे समझ नहीं आता कि जब मैं यह कहता हूं कि हर इंसान को आजादी और बराबरी मिलनी चाहिए, तो वह विवाद कैसे बन जाता है. फिलिस्तीनियों के अधिकारों की बात करना कुछ लोगों को इतना बुरा क्यों लगता है?'
उस्मान ख्वाजा ने माना कि वह आलोचनाओं के लिए खुद को खुला छोड़ देते हैं, लेकिन फिर भी चुप नहीं रह सकते. प्रेस कॉन्फ्रेंस में ख्वाजा ने ऑस्ट्रेलिया के राइट-विंग नेताओं पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनेता जानबूझकर समाज में डर, नफरत और विभाजन फैलाते हैं, खासतौर पर अप्रवासन और इस्लाम के नाम पर. ख्वाजा ने कहा कि वह ऐसे बयानों और नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे, भले ही इससे उनकी लोकप्रियता को नुकसान क्यों ना पहुंचे.
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अपने आलोचकों को सीधे संबोधित करते हुए उस्मान ख्वाजा ने कहा, 'मुझे गैसलाइट मत कीजिए. मुझे पता है लोग कहेंगे कि मैं रेस कार्ड खेल रहा हूं. लेकिन ये सब रोज होता है, बस हम इसके बारे में बात नहीं करते.' उन्होंने कहा कि नस्लवाद सिर्फ खुले तौर पर गालियां देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चयन, आलोचना और नैरेटिव बनाने के तरीके में भी झलकता है.
उस्मान ख्वाजा संन्यास की घोषणा करते वक्त सबसे ज्यादा भावुक तब हुए, जब उन्होंने भविष्य की बात की. उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि 'अगला उस्मान ख्वाजा' वही सब झेले, जो उन्हें झेलना पड़ा. ख्वाजा की इच्छा है कि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ी चाहे किसी भी धर्म, जाति या पृष्ठभूमि से हों... उन्हें सिर्फ उनके टैलेंट और प्रदर्शन के आधार पर आंका जाए, ना कि उनकी पहचान के आधार पर.
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