राजस्थान रॉयल्स (RR) के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 में अपनी तूफानी बल्लेबाजी से लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं. 15 साल के वैभव ने सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के खिलाफ एलिमिनेटर मैच में सिर्फ 29 गेंदों पर 97 रन ठोक दिए थे. वैभव ने अपनी पारी में 12 छक्के और 5 चौके लगाए. वैभव अब आईपीएल के सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन चुके हैं. वैभव ने मौजूदा सीजन में 65 छक्के जड़े हैं और वो क्रिस गेल से आगे निकल चुके हैं.
15 साल के वैभव जिस तरह की बैटिंग कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें भारत की सीनियर टीम में शामिल करने की मांग हो रही है. इस साल भारतीय टीम का शेड्यूल काफी व्यस्त है और कई सारे टी20I-ओडीआई मुकाबले होने हैं. ऐसे में वैभव का इंटरनेशनल डेब्यू इसी साल संभव है. अगर वैभव को टीम इंडिया के लिए मौका मिलता है, तो वो भारतीय टीम के लिए सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले पुरुष खिलाड़ी बन जाएंगे. फिलहाल यह रिकॉर्ड मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के नाम है, जिन्होंने 16 साल 205 दिन की उम्र में इंटरनेशनल डेब्यू किया था. शेफाली वर्मा ने भारतीय महिला टीम के लिए 15 साल और 7 महीने में डेब्यू किया था और वो सबसे कम में डेब्यू करने वाली भारतीय विमेंस प्लेयर हैं.
इस खिलाड़ी ने किया सबसे कम उम्र में डेब्यू
वैसे मेन्स इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे कम उम्र डेब्यू करने का रिकॉर्ड मारियन घेरासिम (Marian Gherasim) के नाम पर है. मारियन घेरासिम ने 14 साल और 16 दिन की उम्र में रोमानिया की ओर से बुल्गारिया के खिलाफ 16 अक्टूबर 2020 को टी20 इंटरनेशनल (T20I) डेब्यू किया था.
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रजा सबसे कम उम्र के टेस्ट और ODI डेब्यूटेंट
उधर पाकिस्तान के हसन रजा के नाम पर सबसे कम उम्र में टेस्ट और ओडीआई डेब्यू करने का रिकॉर्ड है. हसन रजा ने 14 साल और 227 दिन की उम्र में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था. उन्होंने अक्टूबर 1996 में फैसलाबाद में जिम्बाब्वे के खिलाफ यह मुकाबला खेला था. फिर जिम्बाब्वे के ही खिलाफ उन्होंने क्वेटा में 14 साल और 233 दिन की उम्र में वनडे इंटरनेशनल डेब्यू किया. हालांकि बाद में उनकी असली उम्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया और मेडिकल टेस्ट के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने भी उनके रिकॉर्ड पर सवाल खड़े कर दिए थे.
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इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के बावजूद हसन रजा ने शुरुआती दौर में शानदार प्रतिभा दिखाई. उनकी बल्लेबाजी में टाइमिंग, क्लास और आकर्षक स्ट्रोक्स साफ नजर आते थे. लेकिन पाकिस्तान टीम में लगातार मौके नहीं मिलने की वजह से उनका करियर कभी स्थिर नहीं हो पाया.
डेब्यू के कुछ समय बाद ही उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया और वह लंबे समय तक घरेलू क्रिकेट और पाकिस्तान-ए टीम तक सीमित रह गए. हालांकि घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा, जिसके चलते उन्हें 2002-03 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए फिर से बुलाया गया. उस सीरीज में हसन रजा ने 54* और 68 रनों की उपयोगी पारियां खेलीं, लेकिन उनकी धीमी बल्लेबाजी की आलोचना हुई. इसके बाद उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ दो और टेस्ट खेले, लेकिन जल्द ही उन्हें फिर टीम से बाहर कर दिया गया. उन्होंने दिसंबर 2005 में लाहौर में इंग्लैंड के खिलाफ पाकिस्तान के लिए अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था.
कम उम्र में डेब्यू के बाद खोई चमक
हसन रजा को हमेशा एक बेहद प्रतिभाशाली बल्लेबाज माना गया. उनकी बल्लेबाजी देखने में बेहद खूबसूरत लगती थी और गेंद को टाइम करने की कला शानदार थी. लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह अपनी घरेलू क्रिकेट वाली लय और आक्रामकता को लगातार नहीं दिखा पाए. उन्होंने पाकिस्तान-ए टीम के साथ जरूर कुछ यादगार पल दिए. 2006 में अबू धाबी में खेले गए यूरेशिया कप में उन्होंने टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी.
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हालांकि हसन रजा के करियर को सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब उन्होंने अनधिकृत इंडियन क्रिकेट लीग (ICL) जॉइन कर ली. उस समय ICL को आधिकारिक मान्यता नहीं मिली थी और इसमें खेलने वाले कई खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय टीम में वापसी के दरवाजे लगभग बंद हो गए थे.
कराची में जन्मे हसन रजा ने पाकिस्तानी टीम के लिए 7 टेस्ट और 16 वनडे इंटरनेशनल मुकाबले खेले. टेस्ट क्रिकेट में रजा ने 26.11 की औसत से 235 रन बनाए, जिसमें 2 अर्धशतक शामिल रहे. वहीं वनडे इंटरनेशनल में रजा के नाम पर 18.61 के एवरेज से 242 रन दर्ज हैं. वनडे इंटरनेशनल में हसन ने एक फिफ्टी जमाई.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क