Jonathan Trott Afghanistan Cach story:अफगानिस्तान की टीम अब मेमना टीम नहीं है, वो अब वर्ल्ड क्रिकेट में एक ऐसी टीम है जो मैच में सरेंडर नहीं करती है, बल्कि नाक में दम कर देती है. वो असल मायने में अब एक फाइटर टीम बन चुकी है.
इस टी20 वर्ल्ड कप में वो भले ही 'अफगान सेना' सुपर-8 तक नहीं पहुंच सकी हो, लेकिन उसने साउथ अफ्रीका के साथ 'डबल सुपर ओवर' वाले मैच में प्रोटियाज टीम की सांसें अटका दी थीं. मैच में एक अलग ही समां बंध गया था, भले ही अफगानिस्तान को उस मैच में हार मिली हो, पर दिल अफगानिस्तान ने ही जीता.
अफगानिस्तान ने इस टी20 वर्ल्ड कप में कुल मिलाकर 4 मैच खेले 2 जीते और 2 में हार मिली. जिस ग्रुप डी में अफगानिस्तान की टीम थी, वहां से साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड ने सुपर 8 के लिए क्वालिफाई किया.
लेकिन मौजूदा समय की इस अफगानिस्तान टीम को जिस शख्स ने सबसे ज्यादा मजबूत बनाया, वो अंग्रेज दिग्गज जोनाथन ट्रॉट थे. ट्रॉट ने 9 अगस्त 2022 को अफगानिस्तान संग कोचिंग करियर की शुरुआत की. इस दौरान उनके कोचिंग कार्यकाल में अफगानी टीम ने 6 टेस्ट मैच खेले 1 जीता, 4 में हार मिली और 1 टाई रहा. वहीं 43 वनडे में अफगानी टीम ने 20 जीते, 20 हारे और 3 मैचों का कोई नतीजा नहीं रहा.
ट्रॉट के कोचिंग कार्यकाल में अफगानिस्तान टीम का सबसे खास प्रदर्शन टी20 इंटरनेशनल में रहा. जहां अफगानी टीम ने 69 मैच खेले और 34 जीते, वहीं 32 में टीम को हार मिली. इसके अलावा 2 मैच टाई रहे और 1 मैच बेनतीजा रहा.
अब वापस आते हैं चेन्नई में गुरुवार (19 फरवरी) को हुए ट्रॉट की कोचिंग के आखिरी मैच पर. कनाडा के खिलाफ इस आखिरी ग्रुप मैच के बाद जब प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू हुई तो सब कुछ सामान्य लग रहा था. लेकिन जैसे ही ट्रॉट ने अपने सफर का जिक्र आया, वो कुछ पल के लिए रुक गए.... आवाज भर्रा गई. उन्होंने खुद को संभालते हुए कहा- मैं इमोशनल नहीं होना चाहता था. यही वह पल था जिसने उनके तीन साल के सफर की गहराई को बयान कर दिया.
अफगानिस्तान का अभियान मौजूदा टी20 वर्ल्ड कप में उम्मीदों जैसा नहीं रहा, लेकिन कनाडा पर जीत के साथ टीम ने सम्मानजनक विदाई ली. मैच में इब्राहिम जादरान (Ibrahim Zadran) की नाबाद 95 रन की पारी ने जीत सुनिश्चित की और उन्होंने अपना अवॉर्ड अपने कोच को समर्पित कर दिया. यह सिर्फ एक मैच नहीं था, बल्कि एक युग का अंत था.
कैसे बने जोनाथन ट्रॉट अफगानिस्तान के कोच खुद बताया
ट्रॉट ने खुलासा किया कि यह भूमिका (कोच) उनकी प्लानिंंगका हिस्सा कभी नहीं थी. यह जिम्मेदारी उन्हें तब मिली जब ग्राहम थोर्प ( Graham Thorpe) यह पद नहीं संभाल सके.मुझे यह मौका अचानक मिला. यानी वो एक्सीडेंटल अफगानिस्तान के कोच थे. लेकिन मैंने दोनों हाथों से इसे स्वीकार किया. मैं यहां इत्तेफाक से आया था, यहां दिल से काम किया, 2022 में जब उन्होंने टीम संभाली, तब उन्हें खिलाड़ियों में कच्चा टैलेंट तो दिखा, लेकिन प्रोफेशनल स्ट्रक्चर की कमी भी साफ नजर आई.
ट्रॉट के मुताबिक, असली बदलाव स्कोरबोर्ड पर नहीं, ड्रेसिंग रूम में आया. उन्होंने याद किया कि आयरलैंड दौरे पर पहली बार टीम को करीब से देखकर उन्हें अहसास हुआ कि अगर मानसिकता और अनुशासन में थोड़ा ढांचा जोड़ दिया जाए तो यह टीम दुनिया को चौंका सकती है. उन्होंने युवा खिलाड़ियों, जिनमें रहमानुल्लाह गुरबाज और अजमतुल्लाह उमरजई जैसे नाम शामिल थे, उनको देखकर कहा था यहां कुछ खास बन सकता है.
ट्रॉट ने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि अफगानिस्तान की टीम आज भी कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित है.ना स्थायी होम बेस, ना वैसी अकादमी संरचना जैसी बड़ी टीमों के पास होती है. इसके बावजूद टीम का प्रदर्शन उन्हें हमेशा हैरान करता रहा.
ट्रॉट ने यह बात जोड़ी कि दूसरे देशों को जो सुविधाएं मिलती हैं, उसके मुकाबले ये खिलाड़ी बहुत कम संसाधनों में खेलते हैं. फिर भी लोग उनसे सेमीफाइनल की उम्मीद करते हैं. यह अविश्वसनीय है.
अफगानी टीम के फ्यूचर को लेकर ट्रॉट का मानना है कि अब अफगानिस्तान को टीम में विविधता और गहराई लाने के लिए तैयारी करनी होगी, वहीं अलग परिस्थितियों के लिए अलग कॉम्बिनेशन, खासकर बैटिंग में लेफ्ट-राइट बैलेंस, टीम को और मजबूत बना सकता है.
ट्रॉट ने बताईं अफगानिस्तान टीम की यादगार यादगार जीतें?
अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को याद करते हुए ट्रॉट ने पाकिस्तान, इंग्लैंड और अन्य बड़ी टीमों के खिलाफ मिली जीतों का जिक्र किया.उन्होंने कहा कि विदेशी दौरों पर मिली सफलताएं टीम के आत्मविश्वास की असली नींव बनीं. उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को आर्थिक और सामाजिक रूप से अपने परिवारों की जिंदगी बदलते देखना उनके लिए किसी ट्रॉफी से कम नहीं था.
आगे क्या... क्या इंग्लैंड के कोच बनेंगे जोनाथन ट्रॉट?
अपने भविष्य को लेकर ट्रॉट ने कोई क्लियर प्लानिंग नहीं बताई, लेकिन यह जरूर कहा कि वह एक दिन इंग्लैंड क्रिकेट टीम के के साथ काम करना जरूर पसंद करेंगे. उन्होंने कहा- मैंने वहां अपना क्रिकेट खेला है. उस टीम से जुड़ाव हमेशा रहेगा. अगर कभी मौका मिला तो जरूर करना चाहूंगा.
कौन हैं जोनाथन ट्रॉट
44 साल के जोनाथन ट्रॉट का जन्म साउथ अफ्रीका में हुआ था. वह साउथ अफ्रीका की अंडर 19 टीम के लिए भी खेल चुके हैं, लेकिन उन्होंने अपना इंटरनेशनल क्रिकेट इंग्लैंड टीम के लिए खेला. 2007 में उनका सबसे पहले टी20 डेब्यू हुआ और इसके बाद 2009 में उनका टेस्ट और वनडे डेब्यू हुआ. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ओवल में अपने डेयू टेस्ट में उन्होंने शतक जड़ा था.
इंग्लैंड के लिए उन्होंने 52 टेस्ट में 44.08 के एवरेज से 3835 रन बनाए. वहीं 68 वनडे में उन्होंने 2819 रन 51.25 के एवरेज से नाए थे.वहीं 7 टी20 इंटरनेशनल में उनके नाम 138 रन भी रहे. इसके अलावा उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में कुल 7 विकेट झटके थे.
क्या क्या रही ट्रॉट के कोचिंग कार्यकाल की उपलब्धियां
ट्रॉट जब कोच बने तो अफगानिस्तान की टीम ने आयरलैंड के खिलाफ सीरीज 3-2 से गंवाई ही थी कि दस दिन के भीतर उसे UAE में एशिया कप खेलना पड़ा.
टूर्नामेंट में अफगानिस्तान ने शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका और बांग्लादेा को हराकर अगले दौर में जगह बनाई. पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में जीत करीब थी, लेकिन पाकिस्तान ने किसी तरह मैच निकाल लिया. इसके बाद टीम को भारत से हार का सामना करना पड़ा. ट्रॉट के लिए यह पहला बड़ा अनुभव था एक ऐसा दौर जिसे उन्होंने शुरुआत में ही जबरदस्त रोलर-कोस्टर बताया था.
जब ट्रॉट के कहने पर गुलबदीन नईब ने किया ड्रामा
... और वो ड्रामा तो आज भी कोई क्रिकेट फैन नहीं भूल होगा, जब अफगानिस्तान और बांग्लादेश के बीच 25 जून 2024 को टी20 वर्ल्ड कप 2024 का सुपर 8 का मैच हुआ था. जहां पहली बार संभवत: किसी खिलाड़ी ने क्रिकेट मैदान पर चोट लगने का ड्रामा किया. ड्रामा करने वाले गुलबदीन नईब थे, उनको सलाह देने वाले यही ट्रॉट थे.
जोनाथन ट्रॉट ने अपने खिलाड़ियों को धीमे खेलने का इशारा किया, इसके बाद नईब ने ऐसा ड्रामा किया, जिस देख क्रिकेट के बड़े-बड़े धुरंधर हैरान रह गए. तब बांग्लादेश के खिलाफ स्लिप में फील्डिंग कर रहे नायब ने 12वें ओवर में ऐंठन की शिकायत की. इससे पहले ट्रॉट को अपने खिलाड़ियों को खेल की गति धीमी करने का इशारा करते कैमरे पर देखा गया, चूंकि बारिश के कारण खलल पड़ने पर डकवर्थ लुईस प्रणाली से उनकी टीम 2 रनों से आगे चल रही थी.
ऐसे में बारिश के कारण मैच रद्द होता तो अफगानी टीम 2 रन से जीत जाती. यह देख विकेट पर मौजूद बांग्लादेशी बल्लेबाज लिटन दास भी हंसने लगे और उन्होंने नईब की नकल उतारी. बाद में नईब अफगानी खिलाड़ी नवीन उल हक और अन्य के साथ मैदान से बाहर गए.
पर जब अफगानिस्तान की टीम जीती तो नईब भागते हुए नजर आए. सुपर 8 के उस मुकाबले में कई बार बारिश के कारण बाधा पड़ी. उस समय बांग्लादेश सात विकेट पर 81 रन बना चुकी थी और 19 ओवरों में 114 रन के संशोधित लक्ष्य से दो रन पीछे थी. अफगानिस्तान ने त 8 रन से जीत दर्ज करके पहली बार वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में जगह बनाई थी, यह भी तब जोनाथन ट्रॉट का ही मास्टरस्ट्रोक था.
Krishan Kumar