गांगुली ने कैप्टन विराट को दी सलाह, हार के बाद टीम में बदलाव न करें

भारत सीरीज के पहले मैच में 31 रनों से हार गया था. कोहली को छोड़कर कोई भी अन्य भारतीय बल्लेबाज इंग्लैंड के आक्रमण के आगे नहीं टिक पाया था. सीरीज का दूसरा टेस्ट लॉर्ड्स में गुरुवार से खेला जाएगा.

Advertisement
विराट ब्रिगेड (getty) विराट ब्रिगेड (getty)

विश्व मोहन मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 06 अगस्त 2018,
  • अपडेटेड 8:52 AM IST

सौरव गांगुली ने कप्तान विराट कोहली को इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में हार के बाद अंतिम एकादश में बदलाव नहीं करने की सलाह दी है. साथ ही पूर्व भारतीय कप्तान ने मुरली विजय और अजिंक्य रहाणे को अधिक प्रतिबद्धता के साथ बल्लेबाजी करने को कहा.

सलामी बल्लेबाज विजय ने बर्मिंघम टेस्ट में 20 और छह, जबकि मध्यक्रम के बल्लेबाज रहाणे ने 15 और दो रन बनाए. इस तरह से इन दोनों ने केवल 43 रनों का योगदान दिया. गांगुली ने इंस्टाग्राम पर अपनी पोस्ट में लिखा, ‘अगर आपको टेस्ट मैच जीतना है तो फिर प्रत्येक को रन बनाने होंगे.’

Advertisement

उन्होंने कहा, ‘यह पांच मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट था और मेरा मानना है कि टीम में वापसी करने और अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता है. अजिंक्य रहाणे और मुरली विजय को अधिक प्रतिबद्धता दिखानी होगी, क्योंकि वे पहले भी ऐसी परिस्थितियों में रन बना चुके हैं.’

गांगुली ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि हार के लिए है. अगर आप कप्तान हो, तो हार के लिए आपकी आलोचना होगी जैसे की जीत पर बधाई आपको मिलती है.’

उन्होंने कहा, ‘कोहली की आलोचना इसलिए भी होती रही है कि क्या उन्हें अपने बल्लेबाजों को बाहर करने से पहले पर्याप्त मौके देने चाहिए. इंग्लैंड की परिस्थितियों में स्विंग के सामने नाकामी अब बहाना नहीं हो सकता है क्योंकि हर कोई जानता है कि इंग्लैंड में उन्हें कैसी परिस्थितियों का सामना करना होगा.’

Advertisement

गांगुली ने कहा, ‘यह सच है लेकिन लगातार अंतिम एकादश से छेड़छाड़ और बदलाव करने से खिलाड़ियों के दिमाग में भय समा सकता है कि इतने वर्षों के बाद भी वे टीम प्रबंधन का भरोसा जीतने में नाकाम रहे.’

गांगुली ने इसके साथ ही कहा कि खिलाड़ियों के लिए सभी प्रारूपों में खेलना महत्वपूर्ण है. इस संदर्भ में उन्होंने पिछली भारतीय टीमों का उदाहरण दिया.

उन्होंने कहा, ‘पूर्व की दिग्गज टीमों चाहे वह ऑस्ट्रेलिया हो, दक्षिण अफ्रीका या हमारी टीम, के साथ अच्छी बात यह थी खिलाड़ी दोनों प्रारूपों में खेलते थे. इनमें सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीरेंद्र सहवाग के अलावा मैं शामिल था.’

गांगुली ने कहा, ‘इसलिए जब आप एक या दो मैचों में असफल रहते थे, तो आपके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी का मौका रहता था. प्रथम श्रेणी मैचों में 150 रन बनाने से आप अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की भरपाई नहीं कर सकते. इस टीम में विराट को छोड़कर कोई भी अन्य बल्लेबाज सभी प्रारूपों में नहीं खेलता है.’

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement