ईरान की सैन्य ताकत को लेकर पेंटागन और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन में अंतर ने नई बहस छेड़ दी है. जहां एक ओर मिसाइल प्रोग्राम को कमजोर बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर हजारों मिसाइलों की मौजूदगी का दावा किया जा रहा है. इस विरोधाभास के बीच मिडिल ईस्ट की सुरक्षा स्थिति और शांति वार्ता के भविष्य को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है.