ऑस्ट्रेलिया में एशियन कप खेलने गई ईरान की महिला फुटबॉल खिलाड़ियों को लेकर अब बवाल बढ़ता जा रहा है. ऑस्ट्रेलिया ने ईरान की दो और महिला खिलाड़ियों को शरण दी है. इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया अब तक ईरान की सात महिला फुटबॉल खिलाड़ियों को शरण दे दी है. यह खबर सामने आने के बाद ईरान ने महिला खिलाड़ियों से घर लौटने की अपील की है.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने X पर लिखा, 'उन्होंने मिनाब शहर में डबल-टैप टॉमहॉक हमले में 165 से ज्यादा बेगुनाह ईरानी स्कूली लड़कियों को मार डाला और अब वे उन्हें बचाने के नाम पर हमारे एथलीटों को बंधक बनाना चाहते हैं?'
बाघेई ने अपनी पोस्ट में मिनाब के एक गर्ल्स स्कूल पर अमेरिकी हमले का जिक्र किया था, जिसमें 165 से ज्यादा छात्राएं और स्टाफ के लोग मारे गए थे. हालांकि, अब तक अमेरिका ने इस हमले की जिम्मेदारी पर कुछ नहीं कहा है और कहा है कि वह घटना की जांच कर रहा है. बाघेई ने कहा, 'यह हिम्मत और दोगलापन हैरान करने वाला है. ईरान की महिला फुटबल टीम से कहना चाहता हूं कि चिंता मत करो. ईरान खुले हाथों से तुम्हारा इंतजार कर रहा है. घर वापस आ जाओ.'
ईरानी अधिकारियों ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि अगर खिलाड़ी वापस आते हैं तो वे यहां सुरक्षित रहेंगे. एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि अगर खिलाड़ी वापस ईरान जाते हैं तो उन्हें वहां मार दिया जाएगा. ट्रंप ने ऑस्ट्रेलिया से महिला खिलाड़ियों को शरण देने की अपील की. उन्होंने इसे लेकर ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज से बात की थी.
वहीं, ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ का कहना है कि देश उनका स्वागत स्वागत करेगा. उन्होंने कहा, 'ईरान अपने बच्चों का खुले हाथों से स्वागत करता है और सरकार उनकी सुरक्षा की गारंटी देती है.'
इससे पहले ईरानी महिला फुटबॉल टीम की पांच खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया ने शरण दी थी. मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क ने उन्हें देश में रहने की इजाजत देने वाले ह्यूमनिटेरियन वीजा देने वाले दस्तावेज पर दस्तखत किए.
एक तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें एक टेबल के चारों ओर टोनी बर्क के साथ खिलाड़ी बैठकर पेपरवर्क को फाइनल करते नजर आ रहे हैं.
जिन खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने शरण दी है, उनमें कप्तान जहरा घनबारी, फतेमेह पसंदिदेह, जहरा सरबली अलीशाह, मोना हमूदी और अतेफेह रमजानिजादेह शामिल हैं.
टोनी बर्क ने कहा कि ईरानी टीम के बाकी सदस्यों को भी अगर वे चाहें तो ऑस्ट्रेलिया में रहने का विकल्प दिया गया है.
एशियन कप के दौरान ईरानी टीम दुनियाभर में तब चर्चा में आ गई थी, जब एक मैच के दौरान कुछ खिलाड़ियों ने राष्ट्रगान नहीं गाया था. ईरान की सरकारी मीडिया ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB ने खिलाड़ियों के चुपचाप खड़े रहने को 'बेइज्जती की हद' बताया था. हालांकि, इसके बाद अगले सभी मैचों में टीम ने राष्ट्रगान गाया था.
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