नासा का आर्टेमिस II मिशन 54 साल बाद इंसानों को चांद की ओर ले जाने वाला पहला मानव मिशन है. यह मिशन सिर्फ एक उड़ान नहीं है, बल्कि मानवता के लिए अंतरिक्ष यात्रा के नए युग की शुरुआत है. 1972 में अपोलो 17 के बाद पहली बार इंसान चांद के पास जाएंगे.
इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन कैप्सूल में बैठकर चांद के चारों ओर घूमेंगे और वापस आएंगे. यह लैंडिंग मिशन नहीं है, लेकिन यह भविष्य में चांद पर उतरने और वहां लंबे समय तक रहने की नींव रखेगा.
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इंसानियत, स्पेस मिशन और विज्ञान को क्या फायदा होगा?
आर्टेमिस II से इंसानियत को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हम फिर से चांद की यात्रा शुरू कर रहे हैं. इससे युवा पीढ़ी को स्पेस के लिए इंट्रेस्ट बढ़ेगा. नए वैज्ञानिक तैयार होंगे. स्पेस मिशन के लिए यह बहुत जरूरी है क्योंकि यह ओरियन स्पेसक्राफ्ट, SLS रॉकेट और गहरे अंतरिक्ष में इंसानों की सुरक्षा प्रणाली की परीक्षा करेगा.
अगर यह मिशन सफल रहा तो आगे आर्टेमिस III में चांद पर उतरना और आर्टेमिस IV में चांद पर स्थाई बेस बनाने का रास्ता साफ हो जाएगा. साइंस को भी बहुत फायदा होगा. इस मिशन में चांद के पीछे वाले हिस्से से डेटा मिलेगा, रेडिएशनऔर गहरे अंतरिक्ष में इंसानों के शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी मिलेगी.
यह डेटा भविष्य में मंगल ग्रह पर जाने वाले मिशनों के लिए बहुत काम आएगा. कुल मिलाकर यह मिशन मानवता को चांद और उससे आगे जाने की नई राह दिखाएगा.
54 साल बाद इस मिशन की जरूरत क्यों पड़ी?
अपोलो कार्यक्रम 1972 में खत्म होने के बाद अमेरिका ने चांद पर जाने का कार्यक्रम बंद कर दिया था. उस समय राजनीतिक और आर्थिक कारणों से पृथ्वी की कक्षा (Low Earth Orbit) पर फोकस शिफ्ट हो गया. लेकिन अब दुनिया बदल गई है. चांद पर पानी, खनिज और अन्य संसाधन हैं जो भविष्य की स्पेस इकोनॉमी के लिए जरूरी हैं. इसलिए नासा ने आर्टेमिस मिशन शुरू किया. आर्टेमिस II इस कार्यक्रम का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण मिशन है जो इंसानों को चांद की ओर वापस ले जाएगा.
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क्या यह निजी कंपनियों के दबाव में हो रहा है?
नहीं, आर्टेमिस II मुख्य रूप से नासा का सरकारी कार्यक्रम है. हालांकि स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन जैसी निजी कंपनियां इसमें सहयोग कर रही हैं, लेकिन मिशन की मुख्य ड्राइव नासा और अमेरिकी सरकार की है. निजी कंपनियां भविष्य में चांद पर लैंडर और अन्य सेवाएं प्रदान करेंगी, लेकिन आर्टेमिस II अब भी सरकारी मिशन है.
क्या यह एलियन की खोज के लिए है?
नहीं. आर्टेमिस II का मुख्य उद्देश्य एलियन की खोज नहीं है. यह वैज्ञानिक रूप से चांद का अध्ययन, संसाधनों की जांच और भविष्य के मिशनों की तैयारी के लिए है. एलियन या जीवन की खोज के लिए अलग-अलग मिशन जैसे Europa Clipper या Mars Sample Return चल रहे हैं.
क्या चीन-रूस से प्रतियोगिता है वजह?
यह एक महत्वपूर्ण वजह है. चीन तेजी से चांद पर जा रहा है. उसने चांगई कार्यक्रम के तहत चांद के सैंपल लाए हैं. 2030 तक चांद पर अपना बेस बनाने की योजना बना रखी है. रूस भी चीन के साथ मिलकर इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन बनाने की बात कर रहा है.
अगर अमेरिका पीछे रह जाता तो चांद पर संसाधनों और रणनीतिक स्थिति पर चीन का दबदबा हो जाता. इसलिए आर्टेमिस कार्यक्रम अमेरिका को चांद पर वापसी और आगे बढ़त बनाने में मदद कर रहा है.
क्या अमेरिका मून बेस बनाकर दबदबा चाहता है?
हां, यह असली वजहों में से एक है. अमेरिका चांद पर आर्टेमिस एक्सीलरेटर के तहत स्थाई बेस बनाना चाहता है. वहां पानी के बर्फ, हीलियम-3 जैसे संसाधन हैं जो भविष्य की ऊर्जा और ईंधन के लिए उपयोगी हो सकते हैं. अमेरिका चाहता है कि चांद पर उसका नेतृत्व बने और वह अंतरिक्ष में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करे.
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असली वजह क्या है?
आर्टेमिस II मिशन की असली वजह कई हैं...
आर्टेमिस II सिर्फ एक उड़ान नहीं है. यह अमेरिका की महत्वाकांक्षा, वैज्ञानिक प्रगति और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रतीक है. 54 साल बाद चांद की ओर यह वापसी मानवता के लिए नई उम्मीद और नई संभावनाएं लेकर आ रही है.
ऋचीक मिश्रा