कैनेडी स्पेस सेंटर
फ्लोरिडा के मेरिट द्वीप पर स्थित जॉन एफ कैनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Center KSC), नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) के दस फील्ड सेंटरों में से एक है. दिसंबर 1968 से, केएससी मानव अंतरिक्ष यान का नासा का प्राथमिक प्रक्षेपण केंद्र रहा है. अपोलो (Apollo), स्काईलैब (Skylab) और स्पेस शटल (Space Shuttle) कार्यक्रमों के लिए लॉन्च ऑपरेशन कैनेडी स्पेस सेंटर लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39 से किए गए और केएससी द्वारा प्रबंधित किए गए. फ्लोरिडा के पूर्वी तट पर स्थित, केएससी केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन (CCSFS) के निकट है. दो संस्थाओं का प्रबंधन एक साथ मिलकर काम करता है, संसाधनों को साझा करता है और एक दूसरे की संपत्ति पर सुविधाओं का संचालन करता है.
हालांकि पहली अपोलो उड़ानें और सभी प्रोजेक्ट मर्करी और प्रोजेक्ट जेमिनी (Project Mercury and Project Gemini) उड़ानें तत्कालीन केप कैनावेरल वायु सेना स्टेशन से उड़ान भरी थीं, लॉन्च का प्रबंधन केएससी और इसके पिछले संगठन, लॉन्च ऑपरेशन निदेशालय द्वारा किया गया था. चौथे जेमिनी मिशन से शुरू होकर, फ्लोरिडा में नासा लॉन्च कंट्रोल सेंटर ने लिफ्टऑफ के तुरंत बाद ह्यूस्टन में मिशन कंट्रोल सेंटर को वाहन का नियंत्रण सौंपना शुरू कर दिया.
नासा के आर्टेमिस II मिशन में इस्तेमाल होने वाला ओरियन स्पेसक्राफ्ट गहरे अंतरिक्ष के लिए बना आधुनिक कैप्सूल है. इसमें 4 अंतरिक्ष यात्री बैठ सकते हैं. इसे बनाने में करीब 20 साल और हजारों करोड़ रुपये लगे. इसमें खाने-पीने का पैक्ड फूड, पानी रिसाइक्लिंग और प्रॉपर स्पेस टॉयलेट की व्यवस्था है. यह बहुत सुरक्षित है. सोलर पैनल से ऊर्जा लेता है.
नासा ने 2 अप्रैल 2026 को आर्टेमिस 2 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया. SLS रॉकेट ने फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी. इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री — रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन - ओरियन कैप्सूल में बैठकर चांद के पास जाएंगे. यह 54साल बाद इंसानों की चांद की पहली यात्रा है. मिशन 10 दिन का परीक्षण उड़ान है.
नासा आर्टेमिस II मिशन के लिए दुनिया के सबसे शक्तिशाली SLS (Space Launch System) रॉकेट का इस्तेमाल कर रहा है. यह 98 मीटर लंबा रॉकेट है जो अपोलो के सैटर्न-V से15% ज्यादा थ्रस्ट पैदा करता है. SLS ओरियन स्पेसक्राफ्ट को चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ चांद से 4.5 लाख किलोमीटर दूर तक ले जा सकता है. इसे बनाने में 11 साल और हजारों करोड़ रुपये लगे.
नासा का आर्टेमिस II मिशन 54 साल बाद इंसानों को चंद्रमा की ओर ले जाने वाला पहला क्रूड मिशन है. यह ओरियन स्पेसक्राफ्ट और SLS रॉकेट की परीक्षा करेगा. भविष्य में चांद पर लैंडिंग व स्थाई बेस बनाने की नींव रखेगा. इससे साइंस, अंतरिक्ष यात्रा और नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी. चीन की स्पेस दौड़ और चांद के संसाधनों पर दबदबा बनाने की रणनीति भी इसकी एक बड़ी वजह है.
नासा का आर्टेमिस II मिशन 1 अप्रैल 2026 को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा. भारतीय समयानुसार 2अप्रैल सुबह 3:54 बजे लॉन्च की संभावना है. आप इसे NASA YouTube चैनल, NASA+ ऐप और Amazon Prime Video पर मुफ्त लाइव देख सकते हैं. नासा के यूट्यूब चैनल पर आज शाम 5:15 बजे इन प्लेटफॉर्म पर लाइव कवरेज शुरू हो जाएगा.
नासा ने आर्टेमिस II मिशन को पूरी तरह तैयार किया है. 1 अप्रैल को चार अंतरिक्ष यात्री 1972 के बाद पहली बार चंद्रमा के पास जाएंगे. रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई जेरेमी हैनसेन 10 दिन की उड़ान में चांद की परिक्रमा करेंगे. क्रिस्टीना पहली महिला, विक्टर पहले अश्वेत और जेरेमी पहले गैर-अमेरिकी यात्री होंगे.
नासा का आर्टेमिस II मिशन 1 अप्रैल को लॉन्च होगा. यह 54 साल बाद इंसानों को चंद्रमा के पास ले जाएगा. इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री 6 बड़े रिकॉर्ड बनाएंगे - पहला अश्वेत अंतरिक्ष यात्री, पहली महिला, पहला गैर-अमेरिकी, सबसे उम्रदराज व्यक्ति, पृथ्वी से सबसे दूर जाना और सबसे तेज री-एंट्री स्पीड. यह मिशन चंद्रमा की यात्रा को नया इतिहास देने वाला है.
शुभांशु शुक्ला 25 जून 2025 को ऐक्सिओम मिशन-4 से ISS के लिए रवाना हो चुका है. यह भारत का दूसरा राकेश शर्मा पल है. लॉन्च पैड 39A से लॉन्च हुआ. मौसम 90% अनुकूल है. वह 14 दिन तक प्रयोग करेंगे, योग करेंगे और छात्रों से बात करेंगे. यह मिशन गगनयान की तैयारी और भारत के लिए गर्व है.
कैनेडी स्पेस सेंटर का लॉन्च पैड 39A अंतरिक्ष अन्वेषण का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जिसने नील आर्मस्ट्रांग को चंद्रमा तक पहुंचाया. अब शुभांशु शुक्ला को ISS तक ले जाएगा. 25 जून 2025 को होने वाला Ax-4 मिशन भारत के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण होगा.
शुभांशु शुक्ला की भागीदारी ग्लोबल स्पेस रिसर्च में भारत की बढ़ती भूमिका को दिखाती है, जो राकेश शर्मा के नक्शेकदम पर चल रही है, जिन्हें 1984 में अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बनने का गौरव हासिल है.
चांद और सूरज को शाम को ढलते देखा होगा. लेकिन कभी पृथ्वी यानी अपनी धरती को ढलते देखा है. नहीं न. तो अब देखिए इस तस्वीर में. जिसे लिया है नासा के अर्टेमिस-1 मिशन के ओरियन स्पेसक्राफ्ट ने. इसमें हमारी नीली धरती चांद के पीछे ढलती दिखाई दे रही है. यह नजारा कई सालों के बाद दिखा है.
36 साल पहले नासा का स्पेस शटल चैलेंजर उड़ान भरने के 73 सेकेंड्स के बाद हवा में फट गया था. उसमें सवार सातों एस्ट्रोनॉट मारे गए थे. अब कुछ गोताखोरों को स्पेस शटल का एक टुकड़ा फ्लोरिडा के पास अटलांटिक महासागर में मिला है. यह टुकड़ा 20 फीट लंबा है. नासा ने इस पर पुरानी घटना को याद किया है.
अंतरिक्ष की यात्रा के लिए एक निजी कंपनी ने अपने गोलाकार यान से पर्दा उठा दिया है. यह यान विशालकाय गुब्बारे की मदद से अंतरिक्ष में जाएगा. कांच के गोले के अंदर बैठे लोगों को अंतरिक्ष का आनंद दिलाएगा. फिर उन्हें धीरे-धीरे वापस धरती पर ले आएगा. इसमें कई प्रकार की लग्जरी सुविधाएं भी मिलेंगी.
सोवियत संघ को नीचा दिखाने के लिए अमेरिका ने 60 साल पहले अंतरिक्ष में परमाणु बम फोड़ा था. यह विस्फोट धरती से 400 KM ऊपर किया गया था. इससे जो नुकसान हुआ वो आज भी जानकर लोग सहम जाते हैं...
एलन मस्क (Elon Musk) की कंपनी SpaceX जल्द ही मंगर ग्रह पर पहुंचने की तैयारी कर रही है. कंपनी की अध्यक्ष का कहना है कि इस दशक में इंसान मंगल पर कदम रख लेगा. जानिए क्या प्लान कर रही है SpaceX.