इसरो के दो मिशन फेल... NSA अजित डोभाल ने किया था VSSC का सीक्रेट विजिट

इसरो के भरोसेमंद PSLV रॉकेट की 2025 और जनवरी 2026 में लगातार दो विफलताओं के बाद एनएसए अजित डोभाल ने प्रधानमंत्री के निर्देश पर वीएसएससी तिरुवनंतपुरम का गोपनीय दौरा किया. थर्ड स्टेज में तकनीकी खराबी मुख्य कारण बताई गई. किसी भी तरह के सेबोटाज की आशंका जांच के बाद खारिज कर दी गई. पीएसएलवी लॉन्च जून 2026 तक स्थगित की गई है.

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NSA अजित डोभाल ने इसरो के सेंटर का सीक्रेट विजिट किया था. (Photo: ITG) NSA अजित डोभाल ने इसरो के सेंटर का सीक्रेट विजिट किया था. (Photo: ITG)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 05 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:48 AM IST

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के भरोसेमंद रॉकेट PSLV (पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) की 2025 और 2026 में लगातार दो लॉन्च विफल हो गईं. इन विफलताओं के बाद सुरक्षा चिंताओं के चलते राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC), तिरुवनंतपुरम का दौरा किया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर हुआ था. हालांकि, इसरो ने इस दौरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.

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क्या हुईं विफलताएं?

पीएसएलवी-सी61 (18 मई 2025): यह मिशन EOS-09 (रीसैट-1बी) सैटेलाइट को लेकर गया था. लॉन्च के दौरान थर्ड स्टेज (तीसरे चरण) में मोटर के चैंबर में दबाव कम होने की समस्या आई, जिससे मिशन फेल हो गया.

यह भी पढ़ें: 'नर्वस नाइंटीज' का शिकार क्यों हो रहा इसरो का PSLV रॉकेट? लगातार दूसरी असफलता

पीएसएलवी-सी62 (12 जनवरी 2026): इस मिशन में EOS-N1 सैटेलाइट सहित 16 सैटेलाइट्स थे. फिर से थर्ड स्टेज में अनियमितता आई, जिससे सभी सैटेलाइट्स नष्ट हो गए. यह 2026 का भारत का पहला स्पेस लॉन्च था जो असफल रहा.

PSLV को इसरो का सबसे भरोसेमंद रॉकेट माना जाता है, जो पहले 60 से ज्यादा सफल लॉन्च कर चुका है. लगातार दो विफलताएं दुर्लभ हैं. इनसे निगरानी एवं नेविगेशन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ा है. इसरो ने PSLV लॉन्च जून 2026 तक रोक दिए हैं.

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एनएसए अजित डोभाल का दौरा

मीडिया रिपोर्ट्स (द हिंदू, न्यू इंडियन एक्सप्रेस) के अनुसार...

अजित डोभाल ने 22-23 जनवरी 2026 को वीएसएससी का गोपनीय दौरा किया. वे दिल्ली से इंडिगो फ्लाइट से आए, बिना किसी प्रोटोकॉल या काफिले के. सिर्फ चार सादे कपड़ों वाले सुरक्षाकर्मी साथ थे. दो दिनों में वीएसएससी डायरेक्टर और वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ बंद कमरों में छह मीटिंग्स हुईं.

दौरा प्रधानमंत्री के सीधे निर्देश पर था, ताकि तकनीकी जांच के अलावा सुरक्षा पहलुओं की समीक्षा हो सके. इसरो की फेल्योर एनालिसिस कमिटी ने दोनों विफलताओं का कारण थर्ड स्टेज में तकनीकी खराबी बताया, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को यह स्पष्टीकरण पूरा नहीं लगा. इसलिए सेबोटाज की आशंका जांची गई.

यह भी पढ़ें: 9 साल में 44 सैटेलाइट, लेकिन 5 फेल्योर... डिफेंस से जुड़े प्रोजेक्ट्स में क्यों फंस रही इसरो की उड़ान

सेबोटाज की आशंका खारिज

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने संसद में कहा कि दोनों विफलताओं के कारण अलग-अलग थे. सेबोटाज का कोई सबूत नहीं मिला. रिपोर्ट्स के अनुसार, डोभाल की जांच में भी सेबोटाज की पुष्टि नहीं हुई. मंत्री ने बताया कि इसरो ने आंतरिक कमिटियां बनाई हैं. थर्ड-पार्टी रिव्यू भी कराया जा रहा है. एनएसए डोभाल अपनी रिपोर्ट जल्द ही प्रधानमंत्री को सौंपेंगे.

आगे क्या?

इसरो पीएसएलवी की सुरक्षा और क्वालिटी चेक को और सख्त कर रहा है. अगला पीएसएलवी लॉन्च जून 2026 में हो सकता है. इन विफलताओं से करीब 2,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, लेकिन इसरो ने कहा कि ये तकनीकी सबक हैं. भविष्य के मिशन्स को मजबूत बनाएंगे. यह घटना दिखाती है कि स्पेस मिशन्स में तकनीकी चुनौतियां कितनी जटिल होती हैं. 

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