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जल रहे जंगल, बिगड़ गया धरती का एनर्जी बैलेंस... 11 साल से हम लोग झेल रहे ज्यादा गर्मी

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 30 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:02 PM IST
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विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने हाल ही अपनी रिपोर्ट जारी की है. इसमें कहा गया है कि 2015 से 2025 तक के 11 साल पृथ्वी के सबसे गर्म साल रहे हैं. 2025 तीसरा सबसे गर्म साल था, जिसमें औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक काल (1850-1900) से करीब 1.43 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था. Photo: Getty

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रिपोर्ट में वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा और समुद्र के तापमान ने नया रिकॉर्ड बनाया. आर्कटिक और अंटार्कटिक में समुद्री बर्फ भी बहुत कम रह गई. यह रिपोर्ट बताती है कि पृथ्वी का मौसम तेजी से बदल रहा है और गर्मी लगातार बढ़ रही है. Photo: AFP

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वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्रीनहाउस गैसों — खासकर कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड — की मात्रा पिछले 8 लाख सालों में सबसे ज्यादा हो गई है. इन गैसों ने सूरज की किरणों को पृथ्वी पर आने दिया लेकिन गर्मी को अंतरिक्ष में वापस जाने से रोका. नतीजा यह हुआ कि पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है. Photo: Reuters

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2025 में सतह का तापमान 2024 से थोड़ा कम था, लेकिन कुल मिलाकर पिछले तीन साल (2023-2025) सबसे गर्म रहे. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अब हम उस नए दौर में जा चुके हैं जहां तापमान पिछले 10 सालों से भी काफी ज्यादा रहेगा. रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक बात समुद्र के तापमान की है. Photo: Getty

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समुद्र पृथ्वी की अतिरिक्त गर्मी का 91 प्रतिशत हिस्सा सोख लेते हैं. 2025 में समुद्र का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. 9 साल लगातार नए रिकॉर्ड बने. समुद्र की गर्म होने की रफ्तार पिछले 20 सालों में दोगुनी हो गई है. आर्कटिक और अंटार्कटिक में समुद्री बर्फ का क्षेत्रफल 1979 के बाद सबसे कम रहा. Photo: Reuters

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ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे समुद्र का स्तर बढ़ रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये बदलाव इतनी तेजी से हो रहे हैं कि प्रकृति के लिए यह बहुत चिंताजनक है. इस बार WMO रिपोर्ट में पहली बार पृथ्वी की ऊर्जा असंतुलन (EEI) को शामिल किया गया है. यह बताता है कि पृथ्वी सूरज से कितनी ऊर्जा ले रही है. Photo: AP

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कितनी ऊर्जा अंतरिक्ष में वापस भेज रही है. अगर ज्यादा ऊर्जा अंदर आ रही है और कम बाहर जा रही है तो पृथ्वी गर्म हो रही है. 2025 में यह असंतुलन 1960 के बाद सबसे ज्यादा पहुंच गया. सतह के तापमान से अकेले गर्मी का अंदाजा लगाना गलत है क्योंकि सिर्फ 1 प्रतिशत गर्मी हवा में रहती है. बाकी ज्यादातर समुद्र में जमा हो रही है. Photo: AP

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यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न की जलवायु वैज्ञानिक मैंडी फ्रॉयड कहती हैं कि गर्मी बढ़ने की रफ्तार, समुद्र गर्म होना और बर्फ पिघलने की गति बहुत चिंताजनक है. एएनयू की सारा पर्किन्स-किरकपैट्रिक कहती हैं कि पिछले तीन सालों में तापमान में बड़े बदलाव सिर्फ जलवायु परिवर्तन की वजह से ही हो सकते हैं. Photo: Getty
 

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यह रिपोर्ट हमें चेतावनी दे रही है कि पृथ्वी का मौसम पहले से ज्यादा असंतुलित हो चुका है. अगर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं रोका गया तो गर्मी, भारी बारिश, सूखा, समुद्री तूफान और बाढ़ जैसी घटनाएं और बढ़ेंगी. ये घटनाएं खाद्य सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन को प्रभावित करेंगी. Photo: Getty

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